हाई राइज की ऊंचाई, सुरक्षा की कितनी गहराई ? तीन युवाओं की मौत ने खोली पोल
गेट से 25वीं मंजिल तक बे-रोकटोक पहुंच, फिर किस बात की सुरक्षा ??
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। हाई राइज सोसायटियों में घर खरीदने या किराये पर लेने वाले परिवारों की पहली प्राथमिकताओं में से एक सुरक्षा होती है। क्लब, स्विमिंग पूल और दूसरी सुविधाएं बाद में आती हैं। इसके लिए निवासी हर महीने मेंटिनेंस के रूप में मोटी रकम भी चुकाते हैं। लेकिन गोल्फ लिंक्स टाउनशिप और उसके आसपास पिछले कुछ वर्षों में सामने आई तीन घटनाओं ने इस भरोसे पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

12 अगस्त को लैंडक्राफ्ट सोसायटी के टावर 2A में करीब 21 वर्षीय अर्पण गोयल और 13 अगस्त को महागुनपुरम सोसायटी में 18 साल के प्रथम सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। इससे पहले 2022 में इसी टाउनशिप की आशियाना ली रेजीडेंसी में 18 वर्षीय युवक की 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हुई थी।
तीनों मामलों में एक समानता सामने आती है, मृतक संबंधित सोसायटी के निवासी नहीं थे और बाहरी व्यक्ति होने के बावजूद ऊंची मंजिल तक पहुंच गए।
सवाल मौत के कारण से ज्यादा पहुंचने के तरीके पर
2022 की घटना में बताया गया था कि युवक मुख्य गेट से सोसायटी में दाखिल हुआ और सुरक्षा कर्मी के सामने से लिफ्ट के जरिए 14वीं मंजिल तक पहुंच गया।
12 अगस्त 2026 को अर्पण के बारे में जानकारी है कि वह लैंडक्राफ्ट में डमी बस के गेट से दाखिल हुआ और टावर 2A की लिफ्ट से 25वीं मंजिल तक पहुंचा।
13 अगस्त 2026 को प्रथम सिंह महागुनपुरम के मुख्य द्वार से बेसमेंट तक पहुंचा, वहां से सीढ़ियों के रास्ते टावर में गया और फिर लिफ्ट से 14वीं मंजिल तक पहुंचा।
2022 की घटना को पुलिस जाँच में आत्महत्या बतया गया था, जबकि बीती 12 और 13 अगस्त की घटनाओं में भी शरुआती पुलिस जाँच में आत्महत्या का एंगल सामने आने की बात कही जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन मौत का कारण जो भी हो, सुरक्षा में हुई संभावित चूक का सवाल अपनी जगह कायम है।
“1724 फ्लैट हैं, हर किसी से पूछताछ संभव नहीं” कितना जिम्मेदाराना ?

महागुनपुरम की घटना के बाद मेंटिनेंस एजेंसी की ओर से यह तर्क सामने आया कि सोसायटी में 1724 फ्लैट हैं और हर व्यक्ति से पूछताछ करना संभव नहीं है। यह तर्क अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य 1724 फ्लैटों में रहने वाले हर निवासी से पूछताछ करना नहीं है। सवाल यह है कि जो व्यक्ति निवासी नहीं है, उसकी पहचान और एंट्री दर्ज हुई या नहीं ? किससे मिलने आया ? किस फ्लैट में जाना है ? निवासी ने अनुमति दी या नहीं ? एंट्री कब हुई और वह किस टावर में गया ? यही तो विजिटर मैनेजमेंट और गेट सिक्योरिटी का मूल उद्देश्य है।
इसलिए “1724 फ्लैट हैं” सुरक्षा की कठिनाई हो सकती है, सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का जवाब नहीं।
मेंटिनेंस में सुरक्षा के नाम पर भुगतान, फिर जवाबदेही किसकी ?
निवासी सुरक्षा के लिए भुगतान करते हैं। गार्ड, सीसीटीवी, एक्सेस कंट्रोल और विजिटर मैनेजमेंट पर खर्च होता है। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का बिना प्रभावी सत्यापन ऊंची मंजिल तक पहुंच जाना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा का विषय है।
सवाल केवल गार्ड से नहीं होना चाहिए। सवाल यह भी है कि सुरक्षा एजेंसी, सोसायटी प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी करने वाले जिम्मेदार लोगों ने अपना काम कितना प्रभावी ढंग से किया ?
और यह सवाल सिर्फ इन दो सोसायटियों तक सीमित नहीं

हाई राइज सोसायटियों में सुरक्षा से जुड़ा एक दूसरा गंभीर पहलू भी सामने आ रहा है। कुछ सोसायटियों में सुरक्षा एजेंसी बदलने की प्रक्रिया को लेकर नियमों और पारदर्शिता की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। कहीं बिना पर्याप्त प्रक्रिया के एजेंसी बदलने की चर्चा है तो कहीं जनरल बॉडी की स्वीकृति और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बीती 1 अगस्त को राजनगर एक्सटेंशन की KW सृष्टि सोसाइटी में नियम विरुद्ध सिक्योरिटी कंपनी बदलने की कोशिश का मामला काफी सुर्ख़ियों में रहा है।
यह मामला लैंडक्राफ्ट या महागुनपुरम या किसी सोसाइटी विशेष की घटनाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन व्यापक सवाल जरूर उठता है-
जब सुरक्षा हजारों परिवारों से जुड़ा विषय है, तो सुरक्षा एजेंसी के चयन और बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ??
सवाल यह नहीं कि वे क्यों पहुंचे, सवाल यह है कि उन्हें रोका क्यों नहीं गया
हाल की दोनों घटनाओं की पुलिस जांच अपना निष्कर्ष देगी। यदि आत्महत्या सामने आती है तो वह अलग विषय है। लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति का बिना प्रभावी सत्यापन सोसायटी में प्रवेश कर ऊंची मंजिल तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
हाई राइज की सुरक्षा केवल गेट पर खड़े गार्ड का नाम नहीं है। यह एक पूरी प्रणाली है, गेट एंट्री से लेकर टावर, लिफ्ट, सीसीटीवी और विजिटर रिकॉर्ड तक। और जब निवासी इसी सुरक्षा के लिए हर महीने भुगतान करता है तो उसका सवाल भी सीधा है-
“अगर कोई बाहरी व्यक्ति हमारी सोसायटी में दाखिल होकर 14वीं या 25वीं मंजिल तक पहुंच सकता है, तो फिर हमारी सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है ??”
