September 7, 2026
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अजनारा इंटीग्रिटी: अधूरे टावरों के निवासियों पर बढ़ा मेंटिनेंस बोझ, बिल्डर से ज्यादा अब GDA से सवाल!

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L, M और N टावरों के करीब 300 परिवारों से 1 सितंबर से नई दरों पर वसूली

OC-CC, कमर्शियल बिजली कनेक्शन और अधूरी सुविधाओं ने खड़े किए कई सवाल

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी में 1 सितंबर से मेंटिनेंस और यूटिलिटी शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी ने करीब 300 परिवारों के सामने सिर्फ अतिरिक्त भुगतान का सवाल नहीं खड़ा किया है। इससे बड़ा सवाल यह है कि जब L, M और N टावरों को लेकर निर्माण और वैधानिक औपचारिकताएं अभी पूरी होने का दावा किया जा रहा है, तब इन टावरों के निवासियों पर बढ़ी हुई मेंटिनेंस लागत क्यों डाली जा रही है ?

फोटो: सोसाइटी निवासी

बिल्डर की मेंटिनेंस एजेंसी लोटस मेंटिनेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 24 और 29 अगस्त को जारी नोटिस में मेंटिनेंस शुल्क 1.50 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति वर्गफुट करने की घोषणा की है। बिजली की दर 6.95 रुपये से बढ़ाकर 8.10 रुपये प्रति यूनिट, फिक्स चार्ज 270 रुपये प्रति केवीए और डीजी शुल्क 30.92 रुपये प्रति यूनिट किए जाने की बात कही गई है।

लेकिन इस नोटिस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दरों में वृद्धि नहीं, बल्कि उसका दायरा है। नई दरें सोसायटी के सभी 14 टावरों पर लागू नहीं होंगी। इनका भार केवल L, M और N टावरों के करीब 300 परिवारों पर पड़ेगा। बाकी 11 टावरों के लिए पुरानी दरें जारी रहेंगी।

यही वह बिंदु है जहां एक सामान्य मेंटिनेंस विवाद कई गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवालों में बदल जाता है।

फोटो: सोसाइटी निवासी

13 लाख रुपये का घाटा, हिसाब कहां है ?

मेंटिनेंस एजेंसी ने शुल्क बढ़ाने के पीछे लगभग 13 लाख रुपये प्रतिमाह के घाटे का हवाला दिया है। लेकिन निवासियों का सवाल है कि इस घाटे की गणना किस आधार पर की गई है और क्या उसका कोई ऑडिटेड या स्वतंत्र वित्तीय विवरण उनके सामने रखा गया है?

यदि वास्तव में हर महीने 13 लाख रुपये का घाटा हो रहा है तो निवासियों के लिए यह जानना स्वाभाविक है कि कुल आय कितनी है, कुल खर्च कितना है, टावरवार खर्च क्या है और प्रस्तावित नई दर किस गणना के आधार पर तय की गई है।

सिर्फ घाटे का उल्लेख और उसके आधार का खुलासा न करना पारदर्शिता के सवाल को जन्म देता है।

एक ही सोसायटी, दो शुल्क, अंतर का आधार क्या ?

नीरज त्यागी, एओए अध्यक्ष

AOA अध्यक्ष नीरज त्यागी के मुताबिक A से K तक 11 टावरों का OC, CC और अन्य दस्तावेजों के साथ हैंडओवर AOA को हो चुका है। वहीं L, M और N टावरों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और उनका रखरखाव बिल्डर की एजेंसी कर रही है।

ऐसे में AOA का सवाल है कि यदि पूरी परियोजना एक ही सोसायटी का हिस्सा है तो तीन टावरों के निवासियों के लिए अलग शुल्क संरचना का कानूनी और लागत-आधारित आधार क्या है ?

यहां विवाद का समाधान भावनात्मक दलीलों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों से होगा,

क्या लागत वास्तव में अलग है ? क्या कोई स्वीकृत शुल्क संरचना है ? और क्या निवासियों को उसकी जानकारी दी गई है ?

अधूरा निर्माण और पजेशन: जिम्मेदारी किसकी ?

आशुतोष सिंह, एओए संयुक्त सचिव

AOA संयुक्त सचिव आशुतोष सिंह का आरोप है कि L, M और N टावरों में निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है, इसके बावजूद निवासियों को पजेशन और रजिस्ट्रियां कराई गईं। उनका सवाल है कि यदि परियोजना से जुड़े बिल्डर के दायित्व अभी शेष हैं तो उनकी लागत का भार खरीदारों पर क्यों पड़े ?

अरुणेश शर्मा, एओए सचिव

AOA सचिव अरुणेश कुमार शर्मा ने भी इसी बिंदु को उठाते हुए कहा, “हमारा विरोध वैध मेंटिनेंस शुल्क से नहीं, बल्कि बिना स्पष्ट वैधानिक आधार के की जा रही बढ़ोतरी से है। यदि L, M और N टावरों का निर्माण और OC-CC की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, तो पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि इन टावरों के निवासियों से बढ़ी हुई दरों पर मेंटिनेंस और कमर्शियल बिजली शुल्क किस नियम के तहत वसूला जा रहा है। 13 लाख रुपये के घाटे का हवाला दिया गया है तो उसका पूरा हिसाब भी निवासियों के सामने रखा जाए। बिल्डर की अधूरी जिम्मेदारियों का आर्थिक बोझ निवासियों पर डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।”

बिजली की दर: बिल सिर्फ रकम का नहीं, कनेक्शन की श्रेणी का भी है

निवासियों का आरोप है कि तीनों टावरों में निर्माण कार्य जारी होने के कारण कमर्शियल विद्युत कनेक्शन सक्रिय है और अब उसी के आधार पर बढ़ी हुई बिजली दर वसूली जा रही है। यह आरोप सही है या नहीं, इसका जवाब संबंधित विद्युत दस्तावेज और बिलिंग रिकॉर्ड देंगे। लेकिन यदि कनेक्शन वास्तव में कमर्शियल है तो अगला सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है, उस कनेक्शन से पैदा होने वाली अतिरिक्त लागत किसकी जिम्मेदारी है ?

निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि तीनों टावरों में STP और फायर-फाइटिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी पूरी नहीं हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है, क्योंकि मामला सीधे निवासियों की सुरक्षा और वैधानिक अधिभोग से जुड़ता है।

फोटो: सोसाइटी निवासी

अब सवाल बिल्डर से आगे GDA तक पहुंचता है

यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यदि निवासियों के आरोप सही हैं तो GDA को स्पष्ट करना होगा कि संबंधित टावरों की वर्तमान वैधानिक स्थिति क्या है। क्या OC और CC की स्थिति स्पष्ट है ? क्या पजेशन की अनुमति थी ? क्या मूलभूत सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी हैं ? और क्या ऐसी स्थिति में मेंटिनेंस तथा यूटिलिटी शुल्क की मौजूदा व्यवस्था नियमों के अनुरूप है ?

निवासियों ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए शासन-प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया है। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शुल्क वसूली, निर्माण की स्थिति और वैधानिक दस्तावेजों की स्थिति सार्वजनिक की जाए।

फोटो: सोसाइटी निवासी

कंपनी का पक्ष सामने नहीं आया

मामले में बिल्डर कंपनी के MD और मेंटिनेंस एजेंसी के अधिकारियों से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी इस खबर में शामिल किया जाएगा।

फिलहाल अजनारा इंटीग्रिटी का विवाद एक सीधा सवाल छोड़ता है कि- 

अगर L, M और N टावर अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं, तो उनकी अधूरी परियोजना की लागत कौन चुका रहा है, बिल्डर या वे खरीदार, जिन्होंने अपने घर की कीमत पहले ही चुका दी है ?

और यदि जवाब खरीदार हैं, तो अगला सवाल और बड़ा है कि उसकी अनुमति देने वाला नियम आखिर कौन-सा है ?

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