October 11, 2026
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2016 से GDA को था CC का इंतजार! फिर 2026 में कहा,‘याचिका से पता चला’!!

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बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट कब्जे पर हाईकोर्ट सख्त, छह सदस्यीय जांच समिति गठित

समिति की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल!

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। जिस बिल्डर को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) वर्ष 2016 से कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) लेने के लिए पत्र लिख रहा था, उसी परियोजना में बिना CC फ्लैटों का कब्जा दिए जाने की जानकारी प्राधिकरण को आखिर हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका से कैसे मिली ?

यही सवाल अब बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट फ्लैटों का कब्ज़ा देने के मामले का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद GDA ने सचिव की अध्यक्षता में छह सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को यह पता लगाना है कि मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के फ्लैटों का कब्जा आखिर कैसे दिया गया। समिति में अपर सचिव, प्रभारी मुख्य अभियंता/प्रभारी प्रवर्तन जोन-7, प्रभारी मुख्य नगर नियोजक, विधि अधिकारी और सहायक अभियंता जोन-7 को शामिल किया गया है। समिति को 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

नंद किशोर कलाल, जीडीए उपाध्यक्ष

GDA की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी है। सोमवार की सुनवाई में जीडीए वीसी की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग भी अदालत ने स्वीकार कर ली, हालांकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा बुलाए जाने की गुंजाइश रखी गई है।

लेकिन असली कहानी समिति से पहले की है!

GDA के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, प्राधिकरण ने 10 अगस्त 2016 और फिर 23 अगस्त 2016 को बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए पत्र लिखे। इसके बाद 27 अक्टूबर 2016 को बिल्डर ने आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया। फिर 19 मार्च 2017 को GDA ने बिल्डर को आंतरिक विकास कार्य पूरे कराकर कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने और उसे आवंटियों को सौंपने के निर्देश दिए। मामला यहां भी नहीं रुका। 28 जून 2019 को प्राधिकरण ने एक बार फिर बिल्डर को CC हासिल करने के लिए चेताया।

यानी दस्तावेज बताते हैं कि GDA को वर्षों से यह जानकारी थी कि परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट लंबित है।

फिर सवाल वही है-

जब GDA 2016 से CC के लिए बिल्डर को पत्र लिख रहा था, तो बिना CC कब्जा दिए जाने की जानकारी उसे हाईकोर्ट की याचिका से क्यों मिली ?

यही वह बिंदु है, जिस पर बुधवार की सुनवाई में सबकी निगाहें रहेंगी।

एक फ्लैट की बाउंड्री दिखी, सैकड़ों फ्लैटों का CC नहीं ?

मामले को और गंभीर बनाता है GDA का अपना प्रवर्तन रिकॉर्ड। 20 मार्च 2023 को दाखिल एक RTI आवेदन में उल्लेख है कि 16 मार्च 2023 को तत्कालीन प्रवर्तन जोन-7 प्रभारी ने एक ग्राउंड फ्लोर फ्लैट के बाहर लॉन की बाउंड्री वॉल पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई की थी। यह तथ्य अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

अगर जोन-7 के अधिकारी को एक फ्लैट के बाहर बनी बाउंड्री वॉल की जानकारी हो सकती थी और उस पर कार्रवाई भी की जा सकती थी, तो उसी परियोजना में सैकड़ों फ्लैटों को बिना CC कब्जा दिए जाने की स्थिति प्राधिकरण की निगाह से कैसे बच गई ?

क्या GDA की निगरानी केवल छोटी संरचनाओं तक सीमित थी ? या फिर उस समय परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और उसके आधार पर कब्जे की निगरानी किसी और स्तर पर होनी थी ? इन सवालों के जवाब अब सिर्फ प्राधिकरण के कार्यालय में नहीं, बल्कि हाईकोर्ट की निगरानी में तलाशे जा रहे हैं।

जांच समिति में प्रभारी मुख्य अभियंता के नाम पर सवाल

सुरेश चन्दर, याचिकाकर्ता

जांच समिति में प्रभारी मुख्य अभियंता को शामिल किए जाने पर याचिकाकर्ता सुरेश चन्दर ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि समिति में ऐसे अधिकारी की मौजूदगी, जिसकी पूर्व भूमिका को लेकर वह सवाल उठा रहे हैं, जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा करती है। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह मुद्दा उनके अधिवक्ता बुधवार को अदालत के समक्ष रखेंगे।

जांच समिति के अध्यक्ष एवं GDA सचिव, विवेक मिश्रा

वहीं, जांच समिति के अध्यक्ष एवं GDA सचिव विवेक मिश्रा का कहना है कि जांच का उद्देश्य पूरे मामले के तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल करना है और समिति अपनी रिपोर्ट उपलब्ध रिकॉर्ड एवं तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत तैयार करेगी।

बिल्डर को नोटिस, नक्शा रद्द करने की चेतावनी

हलफनामे में GDA ने बताया है कि फ्रेंड्स लैंड डेवलपर्स को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका के माध्यम से प्राधिकरण को जानकारी मिली कि बिल्डर ने GDA से कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त किए बिना लोगों को फ्लैटों में कब्जा दे दिया।

बिल्डर से स्पष्टीकरण मांगा गया है और सभी औपचारिकताएं पूरी कर एक माह के भीतर कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर स्वीकृत मानचित्र निरस्त करने और विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

लेकिन यहां भी सवाल यही है- 

जब GDA के पास 2016, 2017 और 2019 के पत्राचार मौजूद थे, तो 2026 में जारी नोटिस में ‘रिट याचिका के माध्यम से जानकारी मिलने’ की बात क्यों लिखी गई ?

अब सवाल सिर्फ बिल्डर से नहीं, निगरानी तंत्र से भी

हाईकोर्ट की हालिया कार्यवाही से साफ है कि मामला अब केवल बिल्डर द्वारा बिना CC कब्जा दिए जाने तक सीमित नहीं रह गया है। अदालत GDA की भूमिका, जिम्मेदारी और निगरानी तंत्र को भी परख रही है। ताजा रिपोर्टिंग के मुताबिक अदालत ने GDA से विस्तृत जवाब मांगा है और पूर्व पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी भी तलब की है।

यही वजह है कि बुधवार की सुनवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। 

2016 से पत्राचार

2017 में निर्देश

2019 में फिर चेतावनी

2023 में फ्लैट के बाहर निर्माण पर कार्रवाई

और अब 2026 में हाईकोर्ट के सामने दावा, ‘याचिका से पता चला।’ इन घटनाओं के बीच जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है, वह यही है GDA को जब सब कुछ पता था, तो कार्रवाई कहां थी ? और अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदारी किसकी है ?

अब अदालत की निगाह केवल इस बात पर नहीं होगी कि बिल्डर ने नियम तोड़े या नहीं, बल्कि इस पर भी होगी कि नियमों की निगरानी करने वाला तंत्र इतने वर्षों तक क्या करता रहा। बुधवार की सुनवाई इस मामले में सिर्फ अगली तारीख नहीं, बल्कि GDA की जवाबदेही की अगली बड़ी परीक्षा बन सकती है।

2 thoughts on “2016 से GDA को था CC का इंतजार! फिर 2026 में कहा,‘याचिका से पता चला’!!”

  1. In our Society Ansal Neelpadm 1 Sector 5 Vaishali Ghaziabad, the Builder didn’t complete the amenities as per approved Plan and instead of six EWS flats in each block ABCD and EFGH, constructed 210 studio flats which were neither part of approved Plan nor compounded. The original file of Builder is missing from the records of GDA and also the file from the office of Principal Secretary Housing Lucknow. Who acted in violation of principle of natural justice and didn’t provide a single opportunity to be heard as per provisions of the UP Apartment Act 2010 to our Association known as AAO Neelpadm 1 Sector 5 Vaishali Ghaziabad. Right from 2015 we have taken follow up action with both authority GDA and Principal Secretary Housing Lucknow but maintained silence. We moved to Consumer Disputes Redressal commission, New Delhi where our case is pending for the last 10 years for final arguments. But every time adjournment is granted to the advocate of Builder without imposing any cost. Now the next date of hearing is 24th September 2026 . Let us keep our fingers crossed. Whether final arguments will be heard it again adjournment?

    1. You must directly or through advocate raise voice against adjournment.

      Other option is to prefer an application to change the bench

      Other option is to move High/Supreme court (which is applicable to NCDRC) with Mandamus writ and secure a time bound clouser order.

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