तोड़ना तो पड़ेगा ही! अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा!!
5 साल हो या 50 साल, अवैध तो अवैध ही रहेगा
पुराना कब्जा और बड़ा निवेश भी नहीं बचाएगा!
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नई दिल्ली/मेरठ। अगर आपको लगता है कि अवैध निर्माण पर वर्षों से कब्जा, करोड़ों का निवेश या लंबे समय से चल रहा कारोबार उसे वैध बना देगा, तो यह भ्रम छोड़ दीजिए।
सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है, समय अवैधता को वैधता में नहीं बदलता।
मेरठ के सेंट्रल मार्केट मामले में अदालत ने दो टूक कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पांच साल बाद हो या 50 साल बाद, कार्रवाई से बचने का आधार सिर्फ पुरानापन नहीं हो सकता।
कब्जा पुराना, कानून नहीं बदला
सेटबैक क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और ऐसे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। अर्थात निर्माण की उम्र, कब्जे की अवधि या निवेश की रकम, इनमें से कोई भी तथ्य अपने आप निर्माण को वैध नहीं बनाता।
उल्देपुर की 500-600 अवैध कॉलोनियों पर सवाल
उल्देपुर में करीब 500 से 600 अवैध कॉलोनियों के निर्माण की जानकारी सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई और इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत का सवाल भी अहम था, जब वर्षों से कॉलोनियां बस रही थीं, सड़कें बन रही थीं और निर्माण हो रहा था, तब संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे ?
अवैध निर्माण बनने के बाद कार्रवाई एक बात है, लेकिन उसे बनने से रोकना किसकी जिम्मेदारी थी, यह सवाल अब व्यवस्था के सामने है।
जोन-1 के 16,726 निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ शहर के जोन-1 में करीब 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शुरुआत सीलिंग से करने को कहा गया है। सील के बावजूद बची इमारतों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने 44 संपत्तियों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए और आवास विकास क्षेत्र में अब तक हुई सीमित कार्रवाई पर जवाब मांगा।
प्रमुख सचिव आवास से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव, आवास से पूछा है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए कैसे ? मेरठ के जोन ए, बी, सी और डी में अवैध निर्माण और उन पर की गई कार्रवाई को लेकर प्राधिकरण के चेयरमैन गुरुप्रसाद से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ईलिन सारस्वत के अनुसार, सुनवाई में अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि पिछले वर्षों में अवैध कॉलोनियां विकसित होती रहीं और सड़कें तक बनती रहीं, फिर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

प्रभावित लोगों के पुनर्वास का विकल्प सरकार के पास
सेंट्रल मार्केट सहित अन्य स्थानों पर ध्वस्तीकरण से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का निर्णय सरकार पर छोड़ा गया है। सरकार चाहे तो पुनर्वास की व्यवस्था कर सकती है। याचिकाकर्ता को कथित जान से मारने की धमकी के मामले में भी सरकार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
अगली सुनवाई: 9 दिसंबर
अब निगाहें 9 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। प्रमुख सचिव आवास और संबंधित प्राधिकरण की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अवैध निर्माणों की इतनी बड़ी संख्या कैसे सामने आई, जिम्मेदार निगरानी व्यवस्था ने क्या कार्रवाई की और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
मेरठ की यह सुनवाई एक सीधा संदेश छोड़ती है-
अवैध निर्माण जितना पुराना होगा, उतना ही पक्का हो जाएगा, यह धारणा कानून नहीं है।
निर्माण पुराना हो सकता है, कब्जा पुराना हो सकता है, निवेश पुराना हो सकता है, लेकिन अवैधता केवल समय बीतने से वैधता में नहीं बदलती।
