Completion Certificate के बिना फ्लैट न बेचें, न ट्रांसफर करें, न दें कब्जा: GDA का बिल्डर को दो-टूक आदेश
कानूनों का हवाला देकर बिल्डर से सात दिन में मांगा जवाब
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। फ्लैट खरीदारों के लिए बेहद अहम खबर है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना फ्लैट बेचने, हस्तांतरित करने या खरीदार को कब्जा देने पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-1 की ओर से जारी आदेश में संबंधित बिल्डर/डेवलपर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक Completion Certificate प्राप्त किए बिना किसी फ्लैट की बिक्री, हस्तांतरण या खरीदार को कब्जा न दिया जाए।

राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी ग्रैंड सवाना सोसाइटी के मामले में GDA का यह आदेश का हुआ है। जीडीए सूत्रों के मुताबिक यह आदेश शहर के सभी बिल्डरों को जारी किये गए हैं।
GDA ने केडीपी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को लिखित रूप से अपने आदेश में नियम-कानूनों का भी स्पष्ट हवाला दिया है। प्राधिकरण के अनुसार स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और बिना पूर्णता प्रमाण-पत्र के फ्लैटों का विक्रय/हस्तांतरण या कब्जा दिया जाना उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973, उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट-2010, रेरा एक्ट तथा प्राधिकरण की भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 के प्रावधानों के विपरीत है। आदेश में अधिनियम की
हाईकोर्ट की फटकार के बाद GDA का तंत्र सक्रिय
यह आदेश ऐसे समय सामने आया है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने से पहले फ्लैटों का कब्जा दिए जाने के मामले में GDA की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने GDA के उपाध्यक्ष से स्पष्टीकरण भी मांगा था कि प्राधिकरण की आपत्तियों और बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद खरीदारों को कब्जा कैसे दिया गया।
हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब GDA का मौजूदा प्रवर्तन तंत्र भी एक्शन में दिखाई दे रहा है। संबंधित परियोजना को जारी यह आदेश इसी सक्रियता की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया है।
पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फिर फ्लैट का कब्जा
GDA ने साफ कर दिया है कि केवल निर्माण पूरा हो जाने का दावा पर्याप्त नहीं है। संबंधित परियोजना के लिए आवश्यक पूर्णता प्रमाण पत्र हासिल करना जरूरी है। इसके बाद ही फ्लैट की बिक्री, हस्तांतरण और खरीदार को कब्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
आदेश में संबंधित पक्ष से स्वीकृत मानचित्र, वास्तविक निर्माण की स्थिति, संशोधित मानचित्र (यदि कोई हो), Completion Certificate तथा अन्य आवश्यक स्वीकृतियां और विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सात दिन में रिकॉर्ड मांगा, अनुपालन नहीं हुआ तो कार्रवाई
GDA ने आदेश प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर संबंधित अभिलेख और की गई कार्रवाई की जानकारी प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फ्लैट खरीदारों के लिए बेहद अहम संदेश
इस आदेश का सीधा मतलब है कि फ्लैट खरीदार केवल बिल्डर के कब्जा पत्र या निर्माण पूरा होने के दावे पर निर्भर न रहें, बल्कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट की स्थिति भी जांचें। क्योंकि GDA के इस आदेश में अब यह बात बिल्कुल साफ कर दी गई है कि Completion Certificate के बिना फ्लैट की बिक्री, हस्तांतरण और खरीदार को कब्जा देना स्वीकार्य प्रक्रिया नहीं है।

Daer aaye durust aaye .
Dhanyavad .
yadi ye mamla high court nahi gaya hota to prasasan kabhi bhi jagta nahi . jo builders buyers ko bina completion certificate flat / society dekar vida ho gaye isme buyers ka kya dosh hai . Aam admi ko to hasin sapne/ nakse dikhakar E VEHICLE me khumakar /unka dimag hilakar vida ho gaye unka kya hoga . kya GDA us samay nahi tha .
mera anurodh hai ki purane mamlo ka bhi niptara GDA ko kar dena chahiye tha.
DHANYAVAD.