February 12, 2026

ईडी की बड़ी कार्रवाई: फर्जी बैंक गारंटी मामले में रिलायंस पावर के CFO अशोक पाल गिरफ्तार, ईडी की बड़ी कार्रवाई

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68 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारंटी केस

नकली ईमेल डोमेन से भेजे गए दस्तावेज़

ईडी की जांच में करोड़ों की संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

NEWS1UP

नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी की समूह कंपनी रिलायंस पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी  अशोक पाल(CFO) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिं के एक मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला लगभग 68 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने शुक्रवार देर रात पाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया। शनिवार को उन्हें विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उनके न्यायिक रिमांड की मांग करेगी।

 मामला क्या है?

यह पूरा विवाद रिलायंस NU BESS लिमिटेड से जुड़ा है, जो रिलायंस पावर की एक सहायक कंपनी है। कंपनी ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) को ₹68.2 करोड़ की बैंक गारंटी सौंपी थी। जांच में पाया गया कि यह बैंक गारंटी फर्जी थी।

रिलायंस NU BESS का पुराना नाम महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड था। ईडी ने जांच में पाया कि यह फर्जी गारंटी ओडिशा स्थित कंपनी “बिस्वाल ट्रेडलिंक” द्वारा तैयार की गई थी, जो कथित रूप से फर्जी बैंक गारंटी जारी करने के रैकेट में शामिल थी।

 ईडी की जांच और पहले की गिरफ्तारियां

ईडी ने अगस्त में बिस्वाल ट्रेडलिंक और उसके निदेशकों के ठिकानों पर छापेमारी की थी और कंपनी के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तार किया था। यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा नवंबर 2024 में दर्ज एक एफआईआर से उपजा है। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि कंपनी 8% कमीशन लेकर फर्जी बैंक गारंटी जारी करती थी।

 रिलायंस समूह का पक्ष

रिलायंस समूह ने उस समय बयान जारी कर कहा था कि रिलायंस पावर खुद इस धोखाधड़ी का शिकार हुई है। कंपनी ने 7 नवंबर 2024 को स्टॉक एक्सचेंज को इस घटना की जानकारी दी थी और बताया कि उसने अक्टूबर 2024 में ही दिल्ली पुलिस की EOW में आरोपी कंपनी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।

 SBI के नाम से धोखाधड़ी

ईडी के सूत्रों ने खुलासा किया कि बिस्वाल ट्रेडलिंक ने लोगों को भ्रमित करने के लिए State Bank of India (SBI) के ईमेल डोमेन जैसा नकली डोमेन, s-bi.co.in  बनाया, जो असली SBI डोमेन sbi.co.in से मिलता-जुलता है।
इस नकली डोमेन से SECI को फर्जी ईमेल और दस्तावेज भेजे गए ताकि गारंटी असली लगे।

 करोड़ों की संदिग्ध लेन-देन

जांच में यह भी सामने आया कि बिस्वाल ट्रेडलिंक ने कमीशन के फर्जी बिल, कई अघोषित बैंक खाते, और कई करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का जाल बिछाया हुआ था। ईडी ने बताया कि यह कंपनी सिर्फ कागजों पर मौजूद एक “पेपर एंटिटी” थी, जिसका रजिस्टर्ड पता बिस्वाल के रिश्तेदार के आवास पर था। सूत्रों के मुताबिक छापेमारी के दौरान उस पते पर कंपनी के कोई आधिकारिक दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं मिले।

यह मामला अब रिलायंस समूह के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुका है। ईडी की गिरफ्तारी से जांच एक नए मोड़ पर पहुंची है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या जांच में और बड़े नाम सामने आते हैं या नहीं।

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