February 12, 2026

5 किमी रोज़ दौड़ने वाला भी नहीं बच पाया हार्ट ब्लॉकेज से: कार्तिक श्रीनिवासन की सीख, फिटनेस नहीं, संतुलन ज़रूरी है!

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रोज़ाना दौड़, हेल्दी खाना और समय पर नींद के बावजूद दिल की दो धमनियों में ब्लॉकेज

NEWS1UP

हेल्थ डेस्क

Why me?  यह सवाल बेंगलुरु के कम्युनिकेशन प्रोफेशनल कार्तिक श्रीनिवासन के मन में तब उठा, जब उन्हें यह पता चला कि रोज़ 5 किमी दौड़ने, घर का खाना खाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बावजूद उनके दिल की दो धमनियों में ब्लॉकेज हैं, और उन्हें एंजियोप्लास्टी के ज़रिए दो स्टेंट लगाने पड़े।

15 अक्टूबर को एक राष्ट्रीय अंग्रेजी अख़बार में  प्रकाशित अपने लेख में कार्तिक ने अपने इस अनुभव को साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने 2011 से 2015 के बीच कई बार सीने में हल्का असहजता महसूस की थी। पहले जांच में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे दौड़ते समय दोबारा वही परेशानी शुरू हुई, इस बार जांच में दो ब्लॉकेज निकले।

मैं सब कुछ ठीक कर रहा था, फिर भी क्यों ?

कार्तिक लिखते हैं:

“मैं रोज़ाना 5 किमी दौड़ता हूं (साल में लगभग 290-300 दिन)। समय पर सोता हूं, धूम्रपान नहीं करता, जंक फूड से दूर रहता हूं, पारिवारिक इतिहास में हार्ट की बीमारी नहीं, और 2018 से घर से काम करने के कारण तनाव भी कम। फिर भी ये सब क्यों हुआ?”

उन्हें शुक्र है कि उन्हें हार्ट अटैक नहीं आया, बल्कि दौड़ते समय हुई असहजता के कारण एंजियोग्राम हुआ और समय रहते इलाज हो गया। इस अनुभव ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।

अब मैं सब कुछ और बेहतर कर रहा हूं

एंजियोप्लास्टी के बाद कार्तिक का नज़रिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने बताया —

“अब मैं धीरे-धीरे फिर से दौड़ना शुरू कर चुका हूं। बाहर का खाना लगभग बंद कर दिया है। अब मुझे लगता है कि घर का खाना ही असली लक्ज़री है, बाहर का खाना नहीं। मैं ‘चीट डे’ पर ही कुछ बाहर खाता हूं, वो भी सोच-समझकर।”

उन्होंने अपने जीवन से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड (पैक्ड) फूड्स पूरी तरह हटा दिए हैं और अब हर भोजन को सोच-समझकर तैयार करते हैं।

दो आदतें, जिन्होंने जीवन में लाया बड़ा बदलाव

 गहरी सांसेंनींद की कुंजी

कार्तिक ने बताया कि पहले वे समय पर सोते तो थे, लेकिन नींद की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। अब उन्होंने डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।
उनके अनुसार:

  • सोने से पहले गहरी सांसें लेने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

  • दिन में दो बार प्रैक्टिस करने से तनाव कम होता है और दिमाग शांत रहता है।

  • इससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो नींद और रिलैक्सेशन को बढ़ावा देता है।

  • नींद स्कोर अब नियमित रूप से 85+ रहता है, और वे सुबह तरोताज़ा महसूस करते हैं।

 ‘मूवमेंट अलर्ट’ – दिनभर शरीर को सक्रिय रखना

कार्तिक पहले से ही रोज़ 8,000-10,000 कदम चलते थे, लेकिन अब उन्होंने महसूस किया कि दिनभर शरीर को हलचल में रखना और भी ज़रूरी है।
उनके अनुसार:

  • सिर्फ व्यायाम ही काफी नहीं, बल्कि हर घंटे थोड़ा चलना-फिरना भी ज़रूरी है।

  • लंबे समय तक बैठे रहना, फिटनेस की मेहनत को बेअसर कर सकता है।

  • उन्होंने अपने लिए 250 कदम प्रति घंटे का लक्ष्य तय किया है ताकि शरीर लगातार सक्रिय बना रहे।

 स्वस्थ जीवनशैली का मतलब सिर्फ फिटनेस नहीं, संतुलन है

कार्तिक श्रीनिवासन की कहानी यह याद दिलाती है कि भले ही हम नियमित रूप से व्यायाम करें, सही खाएं और समय पर सोएं, फिर भी शरीर के अंदर कुछ ऐसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं जिन्हें हम नहीं समझते। तनाव, नींद की गुणवत्ता, मानसिक शांति और दिनभर की हलचल, ये सभी मिलकर असली स्वास्थ्य का निर्माण करते हैं।

 कार्तिक की सीख:

“फिटनेस का मतलब सिर्फ 5 किमी दौड़ना नहीं, बल्कि अपने शरीर और मन के साथ जुड़ाव बनाए रखना है। अब मैं हर सांस, हर भोजन और हर कदम के प्रति सचेत हूं, क्योंकि मुझे मिला है जीवन का दूसरा मौका।”

क्या आप भी दिनभर कुर्सी पर बैठे रहते हैं और सोचते हैं कि सुबह की जॉगिंग काफी है ?
कार्तिक की कहानी शायद आपको याद दिलाए, चलते रहिए, सांस लेते रहिए, और ज़िंदगी को महसूस कीजिए।

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