अयोध्या दीपोत्सव: योगी का सपा पर बड़ा हमला, उन्होंने रामभक्तों पर चलवायीं थीं गोलियां
9वें दीपोत्सव में रामनगरी बनी आस्था, संघर्ष और सत्य की विजय की प्रतीक भूमि
दीपों में झलकी आस्था की ज्योति और राजनीति की गरमाहट
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
अयोध्या। जब अयोध्या की सरयू तट पर लाखों दीप झिलमिलाने लगे, तो केवल रोशनी ही नहीं फैली, बल्कि इतिहास की हर परत मानो उजागर हो उठी। यह सिर्फ दीपों का पर्व नहीं था, यह था 500 वर्षों के संघर्ष, आस्था और सत्य की विजय का उत्सव।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के मंच से जिस दृढ़ स्वर में अपने विचार रखे, वह केवल एक भाषण नहीं बल्कि सनातन अस्मिता का घोष प्रतीत हुआ। उन्होंने कहा-
“ये दीप केवल दीप नहीं हैं, ये 500 वर्षों के अंधकार पर आस्था की विजय के प्रतीक हैं।”
योगी ने अपने संबोधन में यह भी याद दिलाया कि किस तरह राम जन्मभूमि आंदोलन के समय “कांग्रेस ने भगवान श्रीराम को मिथक कहा था और समाजवादी पार्टी ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं।” उनके शब्दों में सियासी चुभन थी, पर उससे भी अधिक था आस्था की आग का ताप, जिसने इस मंच को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक शक्ति का केंद्र बना दिया।

राजनीति की परतें और रोशनी की आभा
दीपोत्सव की दिव्यता के बीच राजनीति की चिंगारी भी जल उठी। एक दिन पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था-
“क्यों खर्चा करना बार-बार दियों और मोमबत्तियों पर… हटाइए इस सरकार को, हम और सुंदर रोशनी कराएंगे।”
योगी ने इस बयान का सीधा जवाब न देते हुए भी अर्थपूर्ण प्रहार किया।
उन्होंने कहा,
“हर दीप हमें याद दिलाता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। सत्य की नियति होती है विजयी होना।”
यह संदेश सिर्फ अयोध्या के दीपों के लिए नहीं था, यह था उस विचारधारा के लिए जो वर्षों तक संघर्ष के बावजूद झुकी नहीं।
अयोध्या: जहां हर कण में मर्यादा है, हर दीप में दया है
योगी ने अपने भाषण में अयोध्या की पहचान को ऐसे शब्दों में पिरोया जो सुनने वालों के दिल में उतर गए।
“अयोध्या सप्त पुरियों में प्रथम है, जहां धर्म स्वयं मानव रूप में अवतरित हुआ है। हर कण में मर्यादा है, हर दीप में दया है, हर हृदय में श्रीराम का वास है।”
2017 में जब योगी सरकार ने पहला दीपोत्सव आयोजित किया था, तब 1 लाख 71 हजार दीप जलाए गए थे। आज 2025 में, अयोध्या में लाखों दीप जगमगा रहे हैं, और अब तंबू में नहीं, भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला विराजमान हैं।

आस्था से प्रशासन तक: दीपोत्सव बना वैश्विक प्रतीक
अब दीपोत्सव केवल उत्तर प्रदेश का पर्व नहीं रहा, यह विश्व को भारतीय संस्कृति का संदेश देने वाला उत्सव बन गया है। दुनिया के अनेक देशों से श्रद्धालु, पर्यटक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि इस आयोजन में शामिल हुए। यह आयोजन बताता है कि जब नीति में निष्ठा और शासन में श्रद्धा जुड़ जाए, तो परंपरा भी आधुनिकता की मिसाल बन जाती है।
दीपों की यह रोशनी केवल अयोध्या की नहीं, भारत की आत्मा की है
रामनगरी की यह दीपमाला हमें याद दिलाती है, सत्य को कितनी भी बार दबाने की कोशिश हो, वह अंततः विजयी होता है। 500 वर्षों का अंधकार मिटा, क्योंकि आस्था अडिग रही। आज अयोध्या के हर दीप में बस एक संदेश झलकता है, “जहां राम हैं, वहां प्रकाश है, और जहां प्रकाश है, वहां भारत की आत्मा है।”
