दिवाली के बाद धुएं में घुटा गाजियाबाद-नोएडा: हवा में जहर, लोगों का सांस लेना हुआ मुश्किल!

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रात की पटाखों की रौनक सुबह की हवा के लिए ज़हर बन गई

गाज़ियाबाद में AQI 480 के पार, नोएडा में 350 से ऊपर

NEWS1UP

संवाददाता

गाज़ियाबाद/नोएडा। दिवाली की रात रंग-बिरंगी रौशनी और पटाखों की आवाज़ से गूंजता गाज़ियाबाद और नोएडा, अब जहरीली हवा की गिरफ्त में है। रातभर चली आतिशबाज़ी ने सुबह की ताज़ी हवा को धुएं के जाल में कैद कर दिया है। हवा में घुला बारूद और धूल अब इस कदर बढ़ चुके हैं कि सांस लेना भी एक चुनौती बन गया है। यह नजारा सिर्फ आंखों को नहीं चुभता, बल्कि गवाही देता है उस लापरवाही कि जिसने तमाम चेतावनियों और निर्देशों को अनसुना कर दिवाली को प्रदूषण का त्यौहार बना डाला।

गाज़ियाबाद में हवा का दम घुटा, AQI पहुंचा 480 के पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी और मोदीनगर इलाकों में एक्यूआई 450 से 480 के बीच दर्ज किया गया। यानी हवा “गंभीर” श्रेणी में है। सुबह के समय सड़कों पर हल्का कोहरा नहीं, बल्कि धुएं की मोटी परत तैरती नजर आई। लोगों को आंखों में जलन, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें हो रही हैं। अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या में भी इज़ाफा देखा जा रहा है।

गाज़ियाबाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक बाहर न निकलें, मास्क पहनें और सुबह की सैर से परहेज़ करें। लेकिन सवाल उठता है, जब चेतावनियाँ पहले से दी गई थीं, तो आखिर ऐसी स्थिति आने ही क्यों दी गई ?

नोएडा में भी ‘ग्रीन पटाखों’ की आड़ में जलाए गए बारूद

नोएडा में भी हालात कम भयावह नहीं हैं। सेक्टर 62, 18, 77 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक्यूआई 350 से ऊपर पहुंच गया है। शहर की हवा में इतनी भारी मात्रा में धुआं और कण (PM2.5) घुल चुके हैं कि दृश्यता तक कम हो गई है। लोगों ने ‘ग्रीन पटाखों’ के नाम पर धड़ल्ले से प्रतिबंधित पटाखे जलाए, नतीजा वही पुराना, पर इस बार और भी जहरीला। रात की चमक-दमक अब सुबह की धुंध में खो गई है।

शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है

कानून का मज़ाक, चेतावनियों की अनदेखी

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल दिवाली पर हरित पटाखों के सीमित उपयोग की अनुमति दी थी। लेकिन न नोएडा ने पालन किया, न गाज़ियाबाद ने। प्रशासन की सख्ती और लोगों की लापरवाही के बीच पर्यावरण सबसे बड़ा शिकार बन गया। पटाखों की बिक्री खुलेआम हुई, जलाने पर कोई रोक नहीं लगी, और अब वही धुआं पूरे एनसीआर की हवा में जहर घोल रहा है।

अब पहाड़ों तक पहुंचा असर

दिल्ली-एनसीआर का यह जहरीला धुआं अब उत्तराखंड के पहाड़ों तक पहुंच गया है। नैनीताल और देहरादून में भी एक्यूआई 160 से 220 तक पहुंच चुका है। यानी जो हवा कभी शुद्धता के लिए जानी जाती थी, अब वहां भी प्रदूषण का असर साफ दिख रहा है।

नागरिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल!

हर साल की तरह इस बार भी वही कहानी दोहराई गई, अपीलें की गईं, चेतावनियां जारी हुईं, लेकिन लोगों ने मानो पर्यावरण की आवाज़ को दबा दिया। नतीजा, दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर जहरीली गैस चैंबर में बदल गया। ये हालात केवल प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता का प्रमाण भी हैं।

अब वक्त है आत्ममंथन का

गाज़ियाबाद और नोएडा की यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है, क्या वाकई यह उत्सव की खुशी है, या खुद अपने ही शहर का गला घोंटने की परंपरा ? अब वक्त है कि हम आतिशबाज़ी की जगह संवेदनशीलता दिखाएं। दीये जलाएं, लेकिन हवा को न जलाएं। बच्चों को खुशियां दें, लेकिन उनके फेफड़ों को जहर से नहीं भरें। गाज़ियाबाद और नोएडा की यह स्थिति हर नागरिक के लिए चेतावनी है, कि अब अगर नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ़ नहीं करेंगी।

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