इंजेक्शन या इंफेक्शन ? दादरी में नवजात के ‘गैंग्रीन केस’ ने हिलाया स्वास्थ्य विभाग!
चार दिन की बच्ची की उंगलियां नीली पड़ीं
दाहिने हाथ में गैंग्रीन की पुष्टि
परिवार ने लगाया गलत इंजेक्शन का आरोप
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा। दादरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती नवजात बच्ची के हाथ में गैंग्रीन का गंभीर मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन या संक्रमण की वजह से बच्ची का हाथ खराब हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी है।
क्या है पूरा मामला
5 अक्टूबर को जन्मी नवजात को पोस्ट-डिलीवरी जांच के लिए गोपाल नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक, 9 अक्टूबर को बच्ची की उंगलियां नीली और सूजी हुई दिखीं। डॉक्टरों ने स्थिति को सामान्य बताया, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया। 11 अक्टूबर को नोएडा के चाइल्ड पीजीआई, में जांच के बाद डॉक्टरों ने उसके दाहिने हाथ में गैंग्रीन की पुष्टि की।
संक्रमण या इंजेक्शन की गलती
प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में नवजात सेप्सिस (Bloodstream infection) की संभावना जताई गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग यह भी जांच रहा है कि कहीं इंजेक्शन लगाने या नस में दवा देने की प्रक्रिया के दौरान कोई गलती तो नहीं हुई। जांच दल में एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन और एक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं, जो रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
परिवार का आरोप, अस्पताल की चुप्पी
परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और देरी से इलाज का आरोप लगाया है। बच्ची के पिता ने कहा, “अगर डॉक्टर समय पर ध्यान देते, तो शायद हाथ बच जाता।” वहीं, अस्पताल प्रबंधन से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
विशेषज्ञों की राय:
कस्बे के सबसे पुराने, प्रतिष्ठित और विश्वसनीय बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव अग्रवाल ने कहा-
नवजात को कोई प्रॉब्लम थी तभी तो एनआईसीयू में रखने की नौबत आई, उन्होंने नर्सिंग होम के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हुए किसी भी मेडिकल लापरवाही की संभावना से साफ इंकार किया।
एक वरिष्ठ नवजात रोग विशेषज्ञ ने नाम न छपने की शर्त पर कहा-
नवजात में गैंग्रीन बेहद दुर्लभ और गंभीर स्थिति होती है। यह संक्रमण या रक्त प्रवाह में रुकावट का संकेत है। ऐसे मामलों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन न होना भारी पड़ सकता है।
72 घंटों में पेश हो रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने 72 घंटे में प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी है। जांच पूरी होने के बाद यह तय होगा कि क्या अस्पताल पर लापरवाही या प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाएगा। फिलहाल बच्ची का इलाज नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में जारी है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक अस्पताल की चूक नहीं, बल्कि छोटे शहरों के निजी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, मॉनिटरिंग और जवाबदेही के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। क्या यह इंफेक्शन था या इंजेक्शन की गलती ? सच्चाई अब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगी।
