भव्य परंपरा के दिव्य दर्शन: दिल्ली-एनसीआर से बिहार तक गूंजा छठ मइया का जयघोष!

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श्रद्धा, समरसता और व्यवस्थाओं की अनोखी झलक

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नई दिल्ली/नोएडा/गाजियाबाद। देशभर में लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा पूरे उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। सोमवार शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर लाखों श्रद्धालु उमड़े। पारंपरिक गीतों, पूजा-अर्चना और व्रती महिलाओं की अपार आस्था ने वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया। चार दिवसीय इस पर्व का समापन आज (मंगलवार) सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को छठ पर्व की बधाई देते हुए कहा-

“सूर्य उपासना के पावन पर्व छठ की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व समाज में अनुशासन, संयम और समर्पण का प्रतीक है। छठी मइया और भगवान भास्कर से यही प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रकाश फैलाएं।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर सूर्यदेव की एक प्रतीकात्मक छवि साझा करते हुए यह भी लिखा कि-

“भारत की संस्कृति और लोक परंपराओं की विविधता में छठ पूजा जैसी आस्थामय परंपराएं हमारी सभ्यता की जीवंतता का परिचायक हैं।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील और संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेशवासियों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा-

“लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं और व्रती माताओं-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। सूर्यदेव व छठी मइया की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संचार हो।”

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नोएडा, गाज़ियाबाद, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे जिलों में घाटों की सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था सर्वोच्च स्तर पर सुनिश्चित की जाए।

नोएडा में छठ की भव्य तैयारियाँ: आधुनिकता संग परंपरा का संगम

नोएडा में इस बार छठ पूजा का आयोजन पहले से अधिक भव्य रूप में हुआ।

  • प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर 18 प्रमुख घाटों का निर्माण कराया, जिनमें सबसे विशाल घाट नोएडा स्टेडियम (सेक्टर-21A) में तैयार किया गया।

  • यहां करीब 40 से 45 हजार श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान था।

  • घाटों पर 10 चेंजिंग रूम, ड्रोन सर्विलांस, CCTV कैमरे, गोताखोर, और आपातकालीन मेडिकल टीमें तैनात की गईं।

  • इस बार 52 से अधिक स्थानों पर पारंपरिक गीत-संगीत और पूजा का आयोजन हुआ।

नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय आरडब्ल्यूए समितियों ने मिलकर घाटों की सजावट और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा। सेक्टर 50, 76, 120 और 137 की सोसाइटीज़ में कृत्रिम जलाशयों पर भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।

छठ पर्व के अवसर पर नोएडा में 28 अक्टूबर को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया, ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पर्व मना सकें।

गाज़ियाबाद में 70 से अधिक घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

गाज़ियाबाद प्रशासन ने इस बार छठ पर्व के लिए 70 से अधिक घाटों को सजाया-संवारा।

  • सबसे प्रमुख हिंडन नदी घाट को आकर्षक लाइटिंग और लेज़र शो से सजाया गया, जो इस बार का मुख्य आकर्षण बना।

  • हिंडन नदी में पर्याप्त जल सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने 2,000 क्यूसेक पानी छोड़ा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  • शहर में 750 सफाई कर्मचारी और 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

  • खोड़ा, लोनी, साहिबाबाद, राजनगर एक्सटेंशन, कविनगर और वैशाली जैसे क्षेत्रों में भी भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की।

हिंडन घाट पर सूर्यास्त के समय का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा, ढोलक की थाप पर गूंजते छठ गीत, टिमटिमाती दीप सजावट और श्रद्धा से भरे जनसमूह ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

दिल्ली और बिहार में भी रही आस्था की अनूठी छटा

दिल्ली के कालिंदी कुंज, यमुना विहार, मयूर विहार और वज़ीराबाद के घाटों पर भी हजारों श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य देने पहुंचे। वहीं बिहार में घाटों पर जनसैलाब उमड़ा।

चुनावी माहौल के बीच कई नेताओं ने भी घाटों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और जनता से संवाद साधा। पटना, दरभंगा, गया, भागलपुर और सासाराम में घाटों को फूलों, केले के पेड़ों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया।

छठ मइया की कृपा से आलोकित हुआ जीवन

चार दिन तक चले इस पर्व ने समाज में एकता, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति सम्मान की भावना को फिर से जीवित कर दिया। प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन हुआ तो श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं-

“छठी मइया सबके घर में सुख-समृद्धि बरसायें, जीवन में आलोक फैले और हर दिन नई ऊर्जा लेकर आए।”

छठ पूजा आज केवल बिहार या पूर्वांचल तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अब एक राष्ट्रीय पर्व बन चुकी है। दिल्ली-एनसीआर में इसकी भव्यता और जनभागीदारी ने यह साबित किया कि भारत की संस्कृति हर दिशा में समान रूप से पूजी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के संदेशों के साथ यह पर्व न केवल श्रद्धा बल्कि संयम, स्वच्छता और सामूहिकता का प्रतीक बन गया है।

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