रात के सन्नाटे में महिला पत्रकार पर हमला!
घटना ने फिर उठाया सवाल
क्या एनसीआर की सड़कें अब भी असुरक्षित हैं ?
NEWS1UP
नई दिल्ली/नोएडा। बीती रात के करीब 12:45 बजे, जब नोएडा के एक नामी न्यूज़ चैनल में काम करने वाली महिला पत्रकार अपने दफ्तर से घर के लिए निकलीं, तब शायद उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह सफर एक खौफनाक अनुभव में बदल जाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर उनकी फोर्ड फिगो कार के पीछे स्कूटी सवार दो लोग लग गए, और दिल्ली के आश्रम इलाके तक उनका पीछा करते रहे। लेकिन यह सिर्फ एक पीछा नहीं था, यह एक महिला पत्रकार के आत्मविश्वास, साहस और दिल्ली-एनसीआर की सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई का सामना था।

पीछा, हमला और वीडियो में कैद हुआ डर
महिला पत्रकार ने हिम्मत दिखाते हुए अपने मोबाइल फोन से उन दोनों मनचलों का वीडियो बना लिया। जैसे ही उनकी कार ट्रैफ़िक के कारण धीमी हुई, स्कूटी पर पीछे बैठे युवक ने लकड़ी जैसी किसी चीज़ से कार का पिछला शीशा तोड़ डाला। यही नहीं, उसने कार का दरवाज़ा खोलने की भी कोशिश की, मगर दरवाज़ा लॉक था। पत्रकार ने पूरी समझदारी से कार की स्पीड बढ़ाई और सीधे डीएनडी फ्लाईओवर की ओर निकल गईं। उन्होंने अपने एक दोस्त को फोन पर बताया कि वह खतरे में हैं। दोस्त ने कहा, “रुको मत, गाड़ी चलाती रहो।” वो चलती रहीं, और यही शायद उन्हें बचा गया।
लाजपत नगर के टैक्सी ड्राइवर बने मददगार!
आश्रम इलाके में पहुंचते ही उन्होंने पुलिस को कॉल किया और अपनी लोकेशन बताई। लाजपत नगर में कुछ टैक्सी ड्राइवरों ने उनकी कार देखकर हालात भांप लिए। उन्होंने मदद की पेशकश की और पत्रकार ने तुरंत अपनी कार गुप्ता मार्केट के पास रोकी। तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची, बयान दर्ज किया गया और FIR सनलाइट कॉलोनी थाने में दर्ज की गई। दक्षिण-पूर्व दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है और पांच टीमें उनकी तलाश में लगी हैं।
एनसीआर की रातें और ‘सेफ सिटी’ का दावा
दिल्ली और नोएडा दोनों जगह की पुलिस ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत महिला सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती हैं। लेकिन जब एक महिला पत्रकार, जो शहर की समस्याओं को आवाज़ देती है, खुद इस तरह के हमले का शिकार हो जाए, तो सवाल यह उठता है कि सुरक्षा कैमरे और गश्त आखिर कितने कारगर हैं?
अमूमन देर रात इसी हाईवे से, ऑफिस से घर पंहुचने वाले एक शख्स कहते हैं-
“नोएडा-एक्सप्रेसवे जैसे हाईवे पर रात में पुलिस की मौजूदगी बहुत कम होती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही का सबूत है।”
पुलिस की सक्रियता, लेकिन भरोसे की कमी
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने खुद घटनास्थल का जायज़ा लिया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है। पर सवाल यह भी है, क्या हर महिला को तब तक डर में जीना होगा जब तक आरोपी पकड़े नहीं जाते?
पत्रकारों के लिए नई चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक महिला के साथ नहीं हुई, बल्कि यह उस पेशे के लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जो दिन-रात समाज के सच को सामने लाने में लगे हैं। रात में रिपोर्टिंग या शिफ्ट ड्यूटी करने वाली महिला पत्रकारों के लिए यह मामला एक रियलिटी चेक की तरह है कि दिल्ली-एनसीआर में “न्यूज़ रूम से होम” का सफर अब भी सुरक्षित नहीं हुआ है।
महिला पत्रकार की हिम्मत और सूझबूझ ने उन्हें बचा लिया, लेकिन यह सवाल अब भी बाकी है, क्या दिल्ली-एनसीआर की सड़कें महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं, या हमें हर बार हिम्मत और किस्मत के भरोसे रहना होगा ?
