February 9, 2026

कार्तिक पूर्णिमा: गंगा स्नान, देव दीपावली और गुरु नानक जयंती के साथ भक्ति का महापर्व

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वाराणसी में इस दिन देव दीपावली का भव्य आयोजन होता है

NEWS1UP

भक्ति, पवित्रता और प्रकाश का पर्व कार्तिक पूर्णिमा इस बार 5 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। यह दिन सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, धर्म और अध्यात्म का संगम है। इस पावन अवसर पर देशभर के तीर्थों में गंगा स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु-शिव की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा की तारीख:

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे

  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 नवंबर 2025, रात 6:48 बजे

  • गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक

शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन प्रातःकाल गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष के स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। कहा जाता है कि यह स्नान आत्मा को पवित्र करता है और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है।

भक्ति, दान और दिव्यता का पर्व

कार्तिक पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना गया है। यह दिन कार्तिक मास के समापन और मार्गशीर्ष मास की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन देव दीपावली, गुरु नानक जयंती और तुलसी विवाह जैसे पवित्र पर्व एक साथ मनाए जाते हैं, जिससे यह तिथि और भी खास बन जाती है।

वाराणसी से हरिद्वार तक आस्था का सैलाब

वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज और ऋषिकेश जैसे तीर्थस्थलों पर इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। गंगा किनारे जलते दीपों की रौशनी में देव दीपावली का दृश्य दिव्यता का अद्भुत अनुभव कराता है। वाराणसी के घाटों पर जब हजारों दीप गंगा में तैरते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं देवता धरती पर उतर आए हों।

पूजा, दान और दीपदान का महत्व

एस्ट्रो गिरीश
  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

  • तुलसी के पास दीप जलाएं और भगवान विष्णु-शिव की पूजा करें।

  • सत्यनारायण कथा, विष्णु सहस्रनाम या भागवत गीता का पाठ करें।

  • मंदिरों या नदी किनारे दीपदान करें।

  • भोजन, वस्त्र और अन्न का दान करें।

ऐस्ट्रो गिरीश के अनुसार,

“कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया दीपदान न केवल घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है।”

तुलसी विवाह और देव दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही तुलसी विवाह के सभी अनुष्ठान पूरे किए जाते हैं। यह पर्व वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी में इस दिन देव दीपावली का भव्य आयोजन होता है, जिसमें घाटों पर लाखों दीप जलाकर भगवानों के पृथ्वी पर आगमन का स्वागत किया जाता है।

शांति, समृद्धि और मोक्ष का प्रतीक

कार्तिक पूर्णिमा का दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इस दिन स्नान, पूजा और दान करने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और पापों से मुक्ति प्राप्त होती है।

यह दिन वास्तव में “भक्ति की पूर्णता” का उत्सव है, जब हर दीप में ईश्वर की आभा झलकती है और हर श्रद्धालु के मन में प्रकाश फैलता है।

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