जाड़े की मेवा: मूंगफली का स्वाद और सेहत की कहानी!
कभी मोहल्लों में गूंजती थी आवाज़
‘भुनी और करारी लो..!’
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
दादरी/गाजियाबाद। सर्दियों की पहली ठंड पड़ते ही जैसे मौसम का मिज़ाज बदलता है, वैसे ही बदल जाती है शहर की खुशबू। हवा में कहीं न कहीं से आती है, भुनी मूंगफली की महक। वो महक जो बचपन की यादों से भरी है, अपनापन जगाती है और ठंड की शामों को अपनेपन की गर्माहट देती है।कभी मोहल्लों में, गली-कूचों में रात के वक़्त एक आवाज़ गूंज उठती थी,
“भुनी और करारी लो… जाड़े की मेवा लो”
और फिर हम बच्चे नंगे पैर, हाथों में सिक्के दबाए, उस आवाज़ के पीछे दौड़ पड़ते थे। भुनी हुई मूंगफली की बड़ी कड़ाही, अंगारों में खदकते दाने और ठेले के चारों ओर जुटी भीड़, वो नज़ारा सर्दियों की पहचान था। अब वो आवाज़ें तो शहरों के शोर में कहीं खो गई हैं, पर मूंगफली का जादू आज भी हर नुक्कड़, हर चौक पर वैसा ही है। भुनती मूंगफली की खुशबू से मन जैसे अपने आप खिंच जाता है। और दिल में बस एक ही ख्याल आता है, “चलो, एक मुट्ठी मूंगफली ले ही लेते हैं।”
स्वाद का मज़ा और अपनापन

मूंगफली खरीदने का अपना अलग ही आनंद है। चाहे कोई 50 ग्राम ले या आधा किलो, जब तक वजन पूरा होता है, खरीदार पाँच-दस दाने चख ही लेता है। और ठेलेवाला भी मुस्कुराकर कहता है-
“भाई साहब, चख लीजिए… मूंगफली बिना चखे कौन खरीदता है”
ऐसा अपनापन शायद किसी और खरीदारी में नहीं मिलता।
सिनेमा और मूंगफली की यादें

एक समय था जब सिनेमा हॉल की हर सीट के नीचे मूंगफली के छिलकों का ढेर लग जाता था। सिनेमा में हँसी, तालियाँ और मूंगफली के छिलके, सब साथ-साथ होते थे। आज सिनेमा हॉल में मूंगफली की जगह पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक ने ले ली है। अब स्वाद महँगा हो गया है, पर मज़ा..! कहीं खो गया है।
गरीबों का बादाम, सेहत में अमीर
मूंगफली को लोग प्यार से “गरीबों का बादाम” कहते हैं। लेकिन असलियत में, इसके फायदे किसी बादाम से कम भी नहीं। इस छोटे से दाने में विटामिन E, विटामिन B3 (नियासिन), फोलेट (विटामिन B9), मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स मौजूद होते हैं।
न्यूट्रिशनिस्ट डॉ साल्वी सोनी के अनुसार:
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विटामिन E त्वचा को सर्दियों की रूखाई से बचाता है और चमक बनाए रखता है।
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विटामिन B3 (नियासिन) दिमाग़ की कार्यक्षमता और याददाश्त को बेहतर बनाता है।
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फोलेट दिल की सेहत के लिए अहम है और शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
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और सबसे बड़ी बात, इसकी तासीर गर्म होती है, जो सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखती है।
चाय, ठंड और मूंगफली: परफेक्ट जोड़ी
सर्दियों की शाम में जब हल्की-हल्की धूप ढलती है, हाथों में गरम चाय का प्याला होता है और सामने मूंगफली की प्लेट, तो समझ लीजिए मौसम अपने पूरे शबाब पर है। मूंगफली के छिलके तोड़ने की ‘टक-टक’ आवाज़ और उनके बीच होने वाली हल्की-फुल्की बातें,
सर्दियों को बसंत-सा बना देती हैं।
लोगों की बातें:
सभासद ज्ञानसिंह रावल पुरानी यादों में खोते हुए कहते हैं-

“हमारे ज़माने में पाँच पैसे और दस पैसे की भी कीमत थी। उन्हीं सिक्कों से हम मूंगफली खरीदते थे और कितना आनंद आता था! हाथ में ठंडी धातु का सिक्का, और थोड़ी देर बाद उसी हाथ में गरम मूंगफली, लगता था जैसे छोटी-सी रकम में पूरी सर्दी खरीद ली हो”
ज्ञानसिंह भावुक होते हुए आगे कहते हैं- आज के बच्चों को शायद यकीन भी न हो कि कभी पाँच पैसे में भी इतनी खुशी मिल जाती थी।

बैडमिंटन कोच विकास शर्मा बचपन को याद करते हुए कहते हैं-
“जब हम बच्चे थे, तो मूंगफली सिर्फ खाने की चीज़ नहीं थी, वो सर्दियों की शाम का उत्सव थी। दोस्त मिलते, आग के पास बैठकर मूंगफली तोड़ते, हँसी-मज़ाक करते, जैसे हर दाना कोई छोटी खुशी दे जाता था। अब ठंड तो वही है, पर वो माहौल, वो मासूमियत नहीं रही।”
मणिपाल हॉस्पिटल की न्यूट्रिशनिस्ट, डॉ साल्वी सोनी बताती हैं कि-

“मूंगफली सर्दियों में सबसे सस्ती और पौष्टिक स्नैक है। इसमें मौजूद विटामिन्स और हेल्दी फैट्स दिल, त्वचा और दिमाग़, तीनों के लिए फायदेमंद हैं। रोज़ एक मुट्ठी मूंगफली सर्दियों के मौसम में आपकी सबसे अच्छी साथी बन सकती है।”
हर दाने में छिपी है एक कहानी
मूंगफली सिर्फ एक स्नैक नहीं, ये सर्दियों का स्वाद, स्मृति और संवेदना है। हर भुना दाना जैसे कहता है-
“खा लो मुझे.. मैं सर्दियों की सबसे गरम कहानी हूँ”
