सीमा सुरक्षा बल परिसर में व सीमा चौकियों पर सामूहिक स्वर में ‘गूंजा वन्देमातरम’
राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गान
कमांडेंट वी. बी. यादव के नेतृत्व में देशभक्ति का अनूठा संगम
NEWS1UP
संवाददाता
फाजिल्का-सादकी बॉर्डर, (पंजाब)। सादिकी रोड स्थित 65वीं वाहिनी का पूरा परिसर आज राष्ट्रभक्ति की भावनाओं से सराबोर रहा, जब वाहिनी मुख्यालय और इसकी सभी सीमा चौकियों पर राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम” की सामूहिक गूंज सुनाई दी। यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि 7 नवम्बर 1875 को महान राष्ट्रकवि स्व. बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित “वन्दे मातरम” आज 150वीं वर्षगांठ पर पहुँच गया है। इस अवसर पर देशभर में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 65वीं वाहिनी ने अपने कमांडेंट वी. बी. यादव के निर्देशन में इस गीत को सामूहिक रूप से गाकर राष्ट्रगीत के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट वी. बी. यादव ने बंकिमचंद्र चटर्जी के राष्ट्रनिर्माण में योगदान को स्मरण करते हुए कहा-
“1875 में जब बंकिम बाबू ने ‘बंगदर्शन’ में ‘वन्दे मातरम’ प्रकाशित किया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम का स्वर बन जाएगा। यह वह गीत था जिसने हर क्रांतिकारी के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की।”
उन्होंने आगे कहा-
“वन्दे मातरम केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का महामंत्र है। यह गीत आज भी हमारे देश की एकता, अखंडता और सशक्त राष्ट्र भावना का प्रतीक है।”
इस अवसर पर वाहिनी मुख्यालय सहित सभी सीमा चौकियों पर एक साथ सामूहिक राष्ट्रगीत गान किया गया। इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में 9 अधिकारी, 58 अधीनस्थ अधिकारी और 219 अन्य कार्मिक सहित कुल 286 कर्मियों ने भाग लिया।
सामूहिक गायन के उपरांत सभी अधिकारियों और जवानों ने प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम” की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित “वन्दे भारत” कार्यक्रम का सजीव प्रसारण विविध स्थानों पर एकत्र होकर देखा और गीत के ऐतिहासिक महत्व को स्मरण किया। 65वीं वाहिनी के इस भावनात्मक आयोजन ने न केवल राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और गौरव को पुनर्जीवित किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि-
“जब तक भारतभूमि पर वन्दे मातरम की गूंज रहेगी, तब तक राष्ट्रप्रेम की लौ सदैव प्रज्वलित रहेगी।”
