नगर निगम द्वारा 150 करोड़ रुपये की वसूली के बीच हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 26 नवंबर को होगी सुनवाई!

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निगम 150 करोड़ की वसूली का कर रहा दावा 

NEWS1UP

संवाददाता

गाज़ियाबाद। हाउस टैक्स बढ़ोतरी के मुद्दे पर आज पूरे शहर की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी थीं, लेकिन अदालत से आई तारीख़ ने लाखों गृहकर दाताओं को एक बार फिर मायूस कर दिया। नगर निगम द्वारा बढ़ी हुई टैक्स दरों के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई होनी थी, मगर अब अगली तारीख़ 26 नवंबर तय की गई है, यानी शहर की जनता को असमंजस की इस स्थिति में एक सप्ताह और इंतज़ार करना पड़ेगा।

इधर, दूसरी तरफ़ नगर निगम ने दावा किया है कि वह अब तक डेढ़ सौ करोड़ रुपये हाउस टैक्स के रूप में वसूल चुका है। लेकिन यह रकम कितने करदाताओं से वसूली गई और यह कुल निर्धारित लक्ष्य का कितना प्रतिशत है, इस पर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी सुनील राय कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

यही चुप्पी लोगों के सवाल और बेचैनी दोनों को और तेज़ कर रही है।

भरोसा अब भी ज़िंदा है:  हिमांशु मित्तल

हिमांशु मित्तल

याचिकाकर्ता प्रतिनिधि मंडल के सदस्य और पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने तारीख़ बढ़ने को लेकर कहा कि निराशा की कोई बात नहीं है, उम्मीद अभी भी बरकरार है। अदालत ने कुछ वाजिब कारणों से सुनवाई आगे बढ़ाई होगी और हमें भरोसा है कि हाईकोर्ट जनता को राहत देगा।” मित्तल का यह भी कहना है कि नगर निगम की महज डेढ़ सौ करोड़ की वसूली साफ़ जाहिर करती है कि जनता उच्च न्यायलय के निर्णय का इन्तज़ार कर रही है। 

मित्तल का कहना है कि-

निगम द्वारा की गई टैक्स वृद्धि पूरी तरह से अनुचित, अनैतिक और जनता पर डाला गया जबरन आर्थिक बोझ है। उनके मुताबिक, “ऐसा कोई तर्क नहीं है जो इस दमनकारी फैसले को सही ठहरा सके।”

वायरल वीडियो ने बढ़ाई जनता की उलझन

शहरभर में इन दिनों एक पुराना वीडियो फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें शीर्ष जनप्रतिनिधि टैक्स वृद्धि समाप्त करने की घोषणा करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि घोषणा के बावजूद नगर निगम बढ़ी हुई दरों पर ही टैक्स की वसूली कर रहा है।

जनता में सवाल यह है- 
अगर टैक्स वृद्धि समाप्त कर दी गई थी, तो वसूली पुरानीि दरों पर क्यों नहीं की जा रही ? इसका जवाब आज तक किसी जवाबदेह अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से नहीं दिया।

जनता का असमंजस और बढ़ा

एक तरफ़ निगम की वसूली, दूसरी तरफ़ अदालत की बढ़ी हुई तारीख़, और इनके बीच फंसा आम नागरिक,  जो न यह समझ पा रहा है कि आगे क्या होगा, और न ही यह कि अगले सप्ताह तक उसे किस निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

सच तो यह है कि
“जनता का असमंजस एक सप्ताह के लिए और बढ़ गया है।” हाईकोर्ट के अगले आदेश पर अब न सिर्फ करदाता, बल्कि पूरा शहर टकटकी लगाए बैठेगा। यह मुद्दा अब सिर्फ टैक्स का नहीं, भरोसे का बन चुका है

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