पेंट और बेसमेंट का खेल: KW सृष्टि में फ्लैट मालिकों को खोलना होगा तीसरा नेत्र!
UP Apartment Act की धारा 4(8) बनी निवासियों की सबसे बड़ी ढाल
क्या GDA करवाएगा पालन ?
NEWS1UP
एक्सक्लूसिव फ़ॉलो-अप रिपोर्ट
गाजियाबाद। जीडीए ने 25 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राजनगर एक्सटेंशन स्थित KW सृष्टि सोसाइटी के निवासियों के पक्ष में बड़ा कदम उठाया। लगभग एक दशक से लटके इस मामले में जीडीए ने बिल्डर/प्रमोटर पंकज जैन को एक माह के भीतर सोसाइटी का पूरा हैंडओवर, मेंटेनेंस सहित अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही, यूपी अपार्टमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई है। बिल्डर की मेंटेनेंस एजेंसी ने बयान दिया है कि वे 30 नवंबर तक हैंडओवर दे देंगे।

लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यहीं खड़ा होता है, क्या वाकई इस बार निवासियों को उनका वास्तविक अधिकार मिलेगा ? क्योंकि इतिहास गवाह है-जो बिल्डर बुनियाद से लेकर फिनिशिंग तक नियमों की धज्जियाँ उड़ाता रहा हो, जो वर्षों तक बायर्स को प्राधिकरणों और अदालतों के चक्कर कटवाता रहा हो, जो हर बार किसी न किसी प्रपंच से जिम्मेदारी से बच निकलता रहा हो… क्या वह अचानक से ईमानदार बन जाएगा ? क्या वह बिना किसी साज़िश के सोसाइटी निवासियों को उनके अधिकार सौंप देगा ? सवाल जायज़ है।
आदेश में छिपी सबसे अहम लाइन: जो पूरी लड़ाई की असली कुंजी है
जीडीए ने अपने आदेश में साफ लिखा है कि-
बिल्डर सोसाइटी के क्षतिग्रस्त प्लास्टर, दरारें, लीकेज, और रंगाई-पुताई पूर्ण कराकर ही हैंडओवर देगा।
यही नहीं, आदेश जारी करने से पहले प्राधिकरण ने UP Apartment Act-2010 की धारा 4(8) का हवाला भी दिया, जो साफ कहती है कि हस्तांतरण के बाद 2 साल तक सभी मरम्मत की जिम्मेदारी बिल्डर की होगी। यानी पेंटिंग हो, प्लास्टर हो, सीपेज हो, बेसमेंट का पानी हो, सब कुछ बिल्डर के पैसे से ठीक होगा। अब सवाल ये, क्या बिल्डर अपने खर्चे से लाखों-करोड़ों का पेंट वर्क करा देगा ? अतीत कहता है; नहीं!
रंगाई-पुताई: वही पुराना खेल, वही पुरानी साज़िश

उँची इमारतों में पेंटिंग करोड़ों का खेल है। और बिल्डर हमेशा यह बोझ निवासियों पर डालने की कोशिश करता है।
यह खेल कैसे चलता है ?
बिल्डर AOA में फूट डालता है।
एक धड़ा बिना पेंट वर्क के उसे सोसाइटी छोड़ने देता है। कुछ महीनों बाद AOA निवासियों पर जबरन पेंटिंग का खर्च थोप देता है। फिर शुरू होती है वसूली- जबरन, अवैध और नियम-विरुद्ध। शहर की कई सोसाइटी इसका ज्वलंत उदाहरण हैं। KW सृष्टि में क्या ऐसा होगा ? यह पूरी तरह निर्भर करेगा कि निवासी कितने जागरूक हैं और जीडीए कितनी ईमानदारी से निगरानी करता है।
बेसमेंट का पानी: सबसे महंगा और सबसे भ्रष्ट काम

बेसमेंट में पानी जमा होना लगभग हर सोसाइटी की समस्या है। इसका समाधान, Expansion Joint Treatment लाखों में पड़ता है। और यहाँ भी अक्सर घोटाला ऐसे होता है:
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बिल्डर काम नहीं करता
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दो-चार “मरम्मत” दिखाकर भाग जाता है
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बाद में AOA यह खर्च निवासियों पर डाल देता है
UP Apartment Act कहता है-
यह बिल्डर की जिम्मेदारी है, बायर्स का एक रुपया भी नहीं लगेगा।
KW सृष्टि में यह बिंदु सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा।
अधूरा हैंडओवर: हक़ छीनने की सबसे पहली चाल है
सम्पूर्ण हैंडओवर में पेंटिंग और प्लास्टर, सीपेज समाधान, बेसमेंट वॉटरप्रूफिंग, सभी कॉमन एरिया का फिनिशिंग, बिजली, फायर, लिफ्ट, सीवेज की कम्प्लीट फिटनेस रिपोर्ट, प्राधिकरण से मिले CC, OC, विभिन्न विभागों से मिले NOC, AMC और मेंटेनेंस खातों का पूरा ऑडिट, डिफेक्ट्स लायबिलिटी पीरियड का क्लीन रिकॉर्ड, ये सभी शामिल होना चाहिए।
ये सब फ्लैट मालिकों का कानूनी हक़ है, कोई एहसान नहीं। बिल्डर और अथॉरिटी दोनों का भुगतान बायर्स ही करते हैं, इसलिए आधा-अधूरा हैंडओवर देना सीधा-सीधा छल है।
इस बार खेल नहीं चलेगा: केवल तभी, अगर निवासी चौकन्ने रहें
KW सृष्टि के निवासी अब ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ, एक ओर है दशकों की प्रताड़ना, और दूसरी ओर सही लड़ाई जीतने का मौका। यदि इस बार भी नजरें फेर लीं, यदि दस्तावेज़ बिना पढ़े हस्ताक्षर हो गए, यदि बिल्डर की “जुगाड़ मरम्मत” को मरम्मत मान लिया गया, तो आने वाले वर्षों तक फिर वही भुगतना पड़ेगा जो अब तक भुगता है।
गेंद अब दो पाले में: निवासियों और जीडीए के
निवासी जागरूक रहें। जीडीए इस बार जिम्मेदारी निभाए। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दायित्व पर टिकें, तो KW सृष्टि एक मिसाल बन सकती है, जहाँ बायर्स ने पहली बार अधिकार के साथ हैंडओवर लिया, न कि भीख की तरह। पर अगर लापरवाही हुई, तो फिर वही पुराना खेल, वही पुराना दर्द।
