गंगा किनारे छल की चिता: परंपरा शर्मसार!!

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भूमेश शर्मा
ब्रजघाट। उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर स्थित ब्रजघाट पर गुरुवार की सुबह हवा में सिर्फ धुआँ नहीं, बल्कि एक भारी-भरकम रहस्य भी तैर रहा था। गंगा किनारे बहती शांत हवा अचानक सवालों के तूफान में बदल गई, जब चार लोग एक कार से उतरे और सामने एक ऐसी चिता सजाने लगे, जिसका सच किसी की कल्पना से भी परे था।
यह घटना सिर्फ धोखाधड़ी नहीं बल्कि विश्वास, परंपरा और संवेदनाओं से खेलने का प्रयास है। इस कहानी की सबसे बड़ी भयावहता यह नहीं कि कोई बीमा क्लेम पाने के लिए अपराध पर उतर आया…बल्कि यह है कि उसने ऐसा करने के लिए अंतिम संस्कार जैसी पवित्र और भावनाओं से भरी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। गंगा के घाटों पर जहाँ लोग आखिरी विदाई की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं एक आदमी अपने झूठ की राख उड़ाने आया था। लेकिन इस बार गंगा किनारे सिर्फ चिता नहीं जली, एक बरसों पुरानी परंपरा के दुरुपयोग की कोशिश का पर्दाफाश भी हुआ।
गंगा तट पर ‘हल्का शव’… और गहराता शक!
स्थानीय लोग बताते हैं कि अंतिम संस्कार की तैयारियाँ बिल्कुल पारंपरिक थीं, लकड़ियाँ, घी, कफ़न, बाँस, रस्सी… सब कुछ विधिवत खरीदा गया। लेकिन जैसे ही एक युवक कार की पिछली सीट से “शव” उठाकर लाया, भीड़ का माथा ठनक गया। शव इतना हल्का कि एक व्यक्ति आसानी से हाथों में उठाकर चिता तक ले आया! जिज्ञासा और संदेह ने मिलकर भीड़ को चिता के और करीब खींच लिया। जैसे ही किसी ने कफ़न हटाया तो गंगा किनारे हलचल मच गई। वह शव नहीं…एक पुतला था। बिलकुल असली इंसान जैसे कपड़ों में लिपटा हुआ, लेकिन निर्जीव प्लास्टिक और रुई से भरा हुआ। शोर उठते ही ब्रजघाट का शांत माहौल हड़कंप में बदल गया।
पुलिस पहुँची, दो फरार, दो गिरफ्तार
पुलिस के आते ही चार में से दो युवक भाग निकले, लेकिन दो को कोतवाली पुलिस ने दबोच लिया। पूछताछ शुरू हुई और जो कहानी सामने आई, वह किसी क्राइम-थ्रिलर जैसी थी।
कमल सोमानी: कर्ज से जूझता व्यापारी और ‘पुतले का संस्कार’ प्लान
दिल्ली के पालम का रहने वाला कमल सोमानी कभी करोल बाग में कपड़े की दुकान चलाता था। पुश्तैनी कर्ज 23 लाख से बढ़ते-बढ़ते 50 लाख तक पहुँच गया था। दुकान बिक चुकी थी, जीवन की दिशा धुँधली हो चुकी थी। इन्हीं हालातों में उसने एक खतरनाक प्लान बना डाला।
अपने स्टाफ उड़ीसा निवासी अंशुल (उम्र 30) के नाम पर ऑनलाइन 50 लाख का इंश्योरेंस हड़पने का एक खतरनाक प्लान बना डाला। अंशुल को इसकी भनक तक नहीं थी। अंशुल के ‘फर्जी मृत्यु प्रमाण’ के लिए गंगा किनारे उसका नकली अंतिम संस्कार के रूप में अगली कड़ी जोड़ी गई।
दोस्त भी अनजान: रिश्तेदारी का बहाना, अंतिम संस्कार की सच्चाई छुपा ली
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमल ने अपने साथ आए दोस्त आशीष को भी सच नहीं बताया। उससे कहा कि “रिश्तेदारी में मौत हो गई है, परिवार में कोई नहीं… मुझे मदद चाहिए।” आशीष मदद को तैयार हुआ और अपनी कार में कमल को लेकर ब्रजघाट पहुँच गया, बिना यह जाने कि कार में वह पुतला था जिसे कमल ‘मृत अंशुल’ बनाकर जलाना चाहता था।
अगर प्लान सफल हो जाता…?
अगर भीड़ का शक न जागता, अगर पुलिस समय पर न पहुँचती, तो कमल के हाथ में अंशुल के नाम पर श्मशान की अंतिम संस्कार पर्ची होती और इसके सहारे 50 लाख का इंश्योरेंस क्लेम। लेकिन एक मामूली सी भूल “बहुत हल्का शव” पूरा खेल बिगाड़ गई।
ब्रजघाट की चौकसी से टला करोड़ों का बीमा घोटाला
नगर पालिका के कर्मियों और स्थानीय लोगों की सजगता ने एक बड़े बीमा फर्जीवाड़े को होने से बचा दिया। पुलिस अब कमल सोमानी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है, जबकि इस अनोखे केस ने पूरे इलाके में चर्चाओं का तूफान खड़ा कर दिया है।
