गाजियाबाद। हाउस टैक्स को लेकर गाजियाबाद में मचा घमासान अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। जिन आशंकाओं की चर्चा शहरभर में महीने से हो रही थी, वे आखिर सच साबित हुईं। मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने 20 प्रतिशत छूट की अंतिम तारीख एक बार फिर आगे बढ़ा दी है। अब यह राहत 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। निगम का दावा है कि यह फैसला आमजन को राहत देने के लिए है, लेकिन शहर में इसे लेकर सवाल भी तेज हैं। एक तरफ निगम हर महीने छूट की तारीख बढ़ाकर अपनी मजबूरी छिपाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर हाईकोर्ट में सुनवाई पर सुनवाई टल रही है, तारीख़ के बाद तारीख़ मिल रही है। इस बीच, जनता असमंजस और इंतज़ार के बीच झूल रही है।
बड़ा सवाल यही है कि क्या यह ‘राहत’ है या सिर्फ समय खरीदने की कोशिश ?
हाईकोर्ट की अगली सुनवाई से पहले दबाव में निगम ?
नगर निगम की 300 से 400 फीसदी तक की भारी-भरकम टैक्स वृद्धि को पूर्व उपाध्यक्ष अनिल स्वामी, पूर्व पार्षद एवं आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र त्यागी और पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल हाईकोर्ट में चुनौती दे चुके हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित है। कानूनी जानकार साफ कहते हैं कि जब तक हाईकोर्ट इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं देता, निगम प्रशासन चाहकर भी बढ़ी हुई दरों को साफ-साफ लागू नहीं कर सकता। इसलिए छूट बढ़ाने की घोषणा उसकी मजबूरी बन चुकी है।
हाउस टैक्स में अत्याधिक बढोत्तरी का विरोध करते नागरिक (फाइल फोटो)
बोर्ड बैठक में बढ़ोतरी वापस लेकिन…
नगर निगम की ओर से हाउस टैक्स में की गई रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी ने पिछले महीनों में शहरभर में तीखा विरोध खड़ा कर दिया था। बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की घोषणा महापौर ने स्थानीय विधायकों, सांसदों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में की थी, जिसके बाद लोगों ने इसे राहत की जीत बताया। लेकिन इसके बाद निगम ने बढ़ी हुई दरों पर ही 20% छूट का ‘लॉलीपॉप’ देकर वसूली जारी रखी। यही वह पल था जब लोगों ने महसूस किया कि घोषणा कुछ और थी और हकीकत कुछ और।
हाउस टैक्स में अत्याधिक बढोत्तरी का विरोध करते नागरिक (फाइल फोटो)
टैक्स देंगे, लेकिन…
आशियाना सोसाइटी के निवासी एन. एस. कोहली कहते हैं- “हम टैक्स देने से पीछे नहीं, पर न्यायसंगत होना चाहिए। स्थिति बिल्कुल स्पष्ट नहीं है, इसलिए हम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे।”
शहर के अधिकांश करदाता इसी असमंजस में हैं, टैक्स जमा करें या कोर्ट के आदेश का इंतजार करें।
जनता का धैर्य और निगम की हठनीति: कौन जीतेगा ?
स्पष्ट है कि शहर में भ्रम कायम है। छूट की तारीखें हर महीने बढ़ती जा रही हैं, आंदोलन अब भी सुर्खियों में हैं, और जनता का भरोसा डगमगाया हुआ है। अब पूरी नजरें 3 दिसंबर को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। क्या कोर्ट इस उलझन को सुलझाएगा, या फिर निगम एक और महीने की ‘छूट’ का ऐलान करेगा ?
फिलहाल इतना तय है, गाजियाबाद का हाउस टैक्स विवाद अभी खत्म होने वाला नहीं।