February 12, 2026

दहेज नहीं चाहिए: बेटियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, अब होगा बेटों का सम्मान!

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एक रुपये में हुई शादियों ने बताया

रिश्ता दिलों से बनता है, रुपयों से नहीं

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की मिट्टी इन दिनों एक ऐसी ख़ामोश क्रांति की गवाह बन रही है, जिसने अनगिनत बेटियों की आँखों में फिर से चमक लौटा दी है। दहेज के नाम पर चलती सौदेबाज़ी को एक झटके में नकारते हुए यहाँ के युवाओं ने वो कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी। लाखों रुपये के प्रस्तावों को ठुकराकर, और कई जगह सिर्फ 1 रुपये में विवाह कर, इन युवाओं ने साबित कर दिया कि रिश्तों की नींव पैसों पर नहीं, दिल की सच्चाई और एक-दूसरे के सम्मान पर टिकती है। यह बदलाव सिर्फ एक परंपरा के टूटने भर का नहीं, बल्कि उन परिवारों की राहत और गर्व का है जो अपनी बेटियों को सिर उठा कर विदा करना चाहते हैं।

जिले में एक के बाद एक सामने आए उन फैसलों ने हर किसी का दिल छू लिया है, जिसमें युवाओं ने 3 लाख से लेकर 31 लाख रुपये तक के प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिए कि-

“रिश्ते बिकते नहीं, निभाए जाते हैं”

आपको बता दें कि हाल ही में हुई सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत में युवाओं से दहेज, नशाखोरी और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को पूरी तरह त्यागने की अपील की गई थी। 

इन बच्चों ने समाज का सिर गर्व से ऊंचा किया है: नरेश टिकैत

बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने युवाओं के इस कदम को समाज के हृदय से निकला सबसे बड़ा बदलाव बताया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि “इन युवाओं ने साबित कर दिया कि बदलाव कानून नहीं, दिल बदलने से आता है। आज उन्होंने सिर्फ दहेज नहीं ठुकराया, उन्होंने बेटियों की इज़्ज़त को नया जीवन दिया है।”

टिकैत ने बताया कि सर्वखाप अवधेश राणा और प्रवीण कुमार सहित उन सभी युवाओं की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इस कुप्रथा को ठुकराया है। जल्द ही उनका सम्मान किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें आदर्श मान सकें।

पंचायत की अपील के बाद समाज में उठी नई चेतना

सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत में दहेज, नशाखोरी और मृत्यु भोज के बहिष्कार की जो अपील की गई थी, वो अब एक आंदोलन बनकर फैलने लगी है। गाँवों में बातचीत का विषय अब “कितना दहेज” नहीं, बल्कि “किस लड़के ने दहेज ठुकराया” बन गया है।

मुजफ्फरनगर: जहाँ से शुरू हुआ सम्मान का सफ़र

प्रतीकात्मक इमेज

यह परिवर्तन सिर्फ एक जिले का नहीं, उन हजारों बेटियों का सपना है जो कभी दहेज के बोझ से डरती थीं। आज मुजफ्फरनगर के युवा यह संदेश दे रहे हैं कि- 

“बेटियाँ बोझ नहीं, परिवार का मान होती हैं”

उनकी यह सोच अब उम्मीद का दीपक बनकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल रही है। लोगों को विश्वास है कि जिस दिन यह आग हर दिल में जल उठेगी, दहेज जैसी कुप्रथाएँ सिर्फ इतिहास की एक काली पंक्ति बनकर रह जाएँगी।

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