February 11, 2026

गौर होम्स चुनाव में धांधली: हाईकोर्ट आदेश कुचला, फर्जी वोटरों का खेल, चुनाव अधिकारी पर अवमानना की तलवार!

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हाईकोर्ट आदेश 2015: मत प्रतिशत आधारित चुनाव का स्पष्ट निर्देश

90 से अधिक संदिग्ध वोटर, जो सदस्य ही नहीं!

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। गौर होम्स सोसाइटी का चुनाव अब एक चुनावी धांधली, प्रशासनिक मनमानी और कानूनी अवमानना का हाई–प्रोफाइल मामला बन चुका है। बीती 4 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी एवं सहायक निदेशक मत्स्य ऋचा चौधरी को कड़े शब्दों में नोटिस जारी कर पूछ लिया है कि-

“किस अधिकार से आपने हाईकोर्ट के आदेश को पलटकर चुनाव कराया ?”

हाईकोर्ट का आदेश था, मत प्रतिशत से चुनाव: अधिकारी ने अपनी ही ‘व्यवस्था’ थोप दी

29 मई 2015 को हाईकोर्ट ने गौर होम्स सोसाइटी के चुनाव मत प्रतिशत (Vote Percentage System) के आधार पर कराए जाने का आदेश दिया था। वर्षों तक यह प्रणाली लागू रही। लेकिन 12 अक्टूबर 2025 को चुनाव अधिकारी ने न केवल इस आदेश की अनदेखी की, बल्कि अपनी इच्छा से चुनाव “1 फ्लैट–1 वोट” पर करा दिए, जो कोर्ट के स्पष्ट आदेश/मॉडल बॉयलाज की खुली अवमानना है।

हाईकोर्ट ने इस कृत्य को गंभीर मानते हुए निर्वाचन अधिकारी को एक माह के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने या फिर अवमानना कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है।

चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप: कैश की वसूली, फर्जी वोटर, और दस्तावेजों का अभाव

गौर होम्स सोसाइटी के चुनाव में उम्मीदवारों और सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोप चौंकाने वाले हैं- 

  • 10 उम्मीदवारों ने डिप्टी रजिस्ट्रार को लिखित शिकायत में कहा कि चुनाव लड़ने के लिए उनसे 10,000 रुपया कैश वसूला गया।

  • करीब 90 फर्जी व्यक्तियों से वोट डलवाए गए, ये लोग वोटर ही नहीं थे।

  • चुनाव अधिकारी ने बिना डीड ऑफ़ डेक्लेरेशन (Form-A) के ही चुनाव पूरा करा दिया, जबकि यह आधारभूत कानूनी दस्तावेज होता है।

इन आरोपों ने पूरे चुनाव को अवैध, आपराधिक और संदिग्ध बना दिया है।

याचिकाकर्ता, मुकेश पाल सिंह

याचिकाकर्ता मुकेश पाल सिंह कहते हैं कि-

हमने पहली बार इतने बड़े स्तर पर धांधली होते देखी है। चुनाव अधिकारी ने हाईकोर्ट के आदेशों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया। 1 फ्लैट–1 वोट लागू करके चुनाव को मनमर्जी से मोड़ दिया गया।

हमारे सामने 90 से ज्यादा ऐसे लोगों को वोट डालने दिया गया जो सोसाइटी के वोटर ही नहीं थे

मुकेश आगे कहते हैं कि ये चुनाव कानून के खिलाफ, अपार्टमेंट एक्ट के खिलाफ और हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कराए गए हैं। हमें कोर्ट से न्याय मिलेगा।

मॉडल बायलॉज का मज़ाक: सोसाइटी चुनावों में फैली अराजकता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

शहर की कई हाउसिंग सोसाइटीज़ में मॉडल बायलॉज की अनदेखी अब ‘परंपरा’ बन चुकी है। लेकिन गौर होम्स सोसाइटी मामले में हाईकोर्ट की सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कानून उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट का यह कदम उन सभी अधिकारियों और सोसाइटी मैनेजमेंट्स के लिए कठोर चेतावनी है जो नियमों को जेब में रखकर चुनाव कराने की आदत डाल चुके हैं।

अब सबकी नज़र हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही पर

गौर होम्स सोसाइटी के विवादित चुनाव को लेकर आगामी एक माह में चुनाव अधिकारी की प्रतिक्रिया और कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर शहर की निगाहें टिकी रहेंगी।

शहर की सोसायटियों में इस बार हाईकोर्ट के ऐसे कड़े हस्तक्षेप ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। यह मामला अब एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सोसाइटी चुनावों में पारदर्शिता और न्यायिक हस्तक्षेप की मिसाल बन चुका है।

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