February 11, 2026

गाजियाबाद हाउस टैक्स विवाद: पुराना साल आंदोलनों और असमंजस में बीता, अब नए साल पर टिकी उम्मीदें!

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हाई कोर्ट की सुनवाई फिर टली

अब 15 जनवरी 2026 होगी अगली तारीख

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। नगर निगम के हाउस टैक्स विवाद ने पूरे साल करदाताओं को उलझन में रखा, और अब जब 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर है, विवाद का समाधान भी अगले साल की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है। नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स की दरों में की गई भारी वृद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ गई। अब अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी, यानी नए साल का पहला बड़ा फैसला इसी मामले से जुड़ेगा।

पुराना साल असमंजस में बीता, करदाता रहे दुविधा में

अप्रैल से शुरू हुआ हाउस टैक्स का यह विवाद पूरे साल करदाताओं के लिए तनाव का कारण बना रहा। निगम ने बोर्ड बैठक में बढ़ी हुई दरों को वापस लेने का फैसला जरूर सुनाया था, लेकिन इसके बाद भी नागरिकों के पास बढ़ी हुई दरों पर ही बिल भेजे गए। जनता के लिए यह स्थिति बिल्कुल उलट थी, घोषणा पुरानी दरों पर वापसी की, और दस्तक नई दरों की भारी भरकम रसीदों की।

इस विरोधाभास के खिलाफ तीन पूर्व पार्षदों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जनता को उम्मीद थी कि 2025 के अंत तक न्यायालय से कोई राहत मिल जाएगी, पर अब तक सुनवाई के टलते रहने से यह उम्मीद नए साल की ओर खिसक गई है।

निगम की वसूली जारी, जनता की निगाहें अदालत पर

याचिका लंबित रहने के बावजूद नगर निगम बढ़ी हुई दरों पर 20 प्रतिशत की छूट के साथ टैक्स की वसूली कर रहा है। वहीं अधिकांश करदाता पुराने और नए फैसलों की इस उलझी गुत्थी में अदालत की दिशा देखने को मजबूर हैं। अनेकों नागरिक मानते हैं कि जब बोर्ड ने दरें वापस लेने की घोषणा कर दी थी, तो नए बिल भेजना न्यायसंगत नहीं था। यही वजह है कि अब हर तारीख टलने के साथ जनता का मनोबल थोड़ा और गिरता नजर आता है। हालांकि याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद पूरी तरह आश्वस्त हैं कि न्यायालय जनता के हित में फैसला देगा। उनका कहना है कि तारीख आगे बढ़ना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे उनकी उम्मीदों पर कोई असर नहीं पड़ता।

नया साल, नई उम्मीद ?

2025 करदाताओं के लिए भ्रम और प्रतीक्षा का वर्ष रहा। अब नजरें 2025 पर टिक गई हैं। क्या 15 जनवरी को इस विवाद का पटाक्षेप होगा ? क्या करदाता नए साल में साफ-सुथरी टैक्स नीति के साथ राहत की सांस ले पाएंगे ?

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