दर्द से इंसानियत तक: बिहार के हिन्दू परिवार ने मुसलमानों को कब्रिस्तान के लिए दी एक बीघा ज़मीन!
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
पटना। बिहार में बक्सर जिले के चौसा प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत डेवी डीहरा गांव में मानवता और आपसी सौहार्द की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। यहां एक हिंदू परिवार ने अपने इकलौते बेटे की असमय मृत्यु के गहरे दुख को समाज के लिए प्रेरणा में बदलते हुए गंगा-जमुनी तहज़ीब की सच्ची भावना को जीवंत कर दिया है।

सड़क हादसे में अपने बेटे को खो चुके जनार्दन सिंह ने मुस्लिम समाज के लिए एक बीघा जमीन कब्रिस्तान हेतु दान कर यह साबित किया है कि इंसानियत मज़हब से कहीं बड़ी होती है।
18 नवंबर को देहरादून में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जनार्दन सिंह के बड़े पुत्र शिवम कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी। शिवम परिवार का सहारा ही नहीं, बल्कि कम उम्र में ही अपने परिश्रम से देहरादून में तीन फैक्ट्रियां खड़ी कर चुका एक होनहार युवा था। इसी वर्ष उसकी शादी की तैयारी चल रही थी, लेकिन एक हादसे ने परिवार की खुशियों को पलभर में उजाड़ दिया।
शिवम के चाचा बृजराज सिंह बताते हैं कि शिवम का व्यक्तित्व बेहद उदार और समाजहित की भावना से ओत-प्रोत था। बृजराज सिंह के अनुसार, यह जमीन पूरी तरह मुस्लिम समाज को समर्पित रहेगी। ’क्रबिस्तान के लिए एक कमेटी बनेगी जिसमें हिंदू – मुसलमान दोनों रहेंगे । ये कमेटी ही कब्रिस्तान का संचालन करेगी।’
गाँव के मुसलमान बताते हैं कि “हमारे गाँव में पहले एक कब्रिस्तान था, लेकिन ज़मीन वो शिक्षा विभाग की थी और वहाँ सरकारी स्कूल बन गया । हमारे बाप दादा उसी ज़मीन में दफ़न हैं लेकिन उनका नामोनिशान मिट गया । हम पर दवाब आने लगा कि हम वहाँ शव नहीं दफ़ना सकते। जनार्दन सिंह गाँव के मुस्लिम समुदाय के लिए मसीहा हैं।”
जनार्दन सिंह कहते हैं कि-

मुस्लिमों की कठिनाई देख कर, हिंदू समाज का होने के बावजूद मेरा दिल पिघल जाता था। जिस तरह से मणिकर्णिका घाट हमारे धर्म के लिए उत्तम जगह है कर्म- कांड करने के लिए, उसी तरह से हमने एक धर्म के लिए एक पवित्र जगह दे दी।
जनार्दन सिंह के परिवार का यह निर्णय केवल एक भूमि दान नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब की वह जीवंत तस्वीर है, जिसमें सदियों से इस की साझा संस्कृति सांस लेती रही है।
“बेटे की असमय मौत से टूटे इस परिवार ने अपने गहरे शोक को परोपकार में बदलकर समाज को यह संदेश दिया है कि दर्द से भी मोहब्बत और भाईचारे की रोशनी पैदा की जा सकती है, वो भी मौजूदा दौर में!!
