एमसीसी सिग्नेचर हाइट्स पर GDA का आदेश: 30 दिन में पूर्ण हैंडओवर, अन्यथा बिल्डर पर दंडात्मक व आपराधिक कार्रवाई!
GDA का आदेश आया, पर क्या चलेगा ?
1600 परिवारों की सांसें अटकीं
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। होम बायर्स के साथ बिल्डरों की मनमानी और कथित धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के सरकारी दावों के बीच ज़मीनी हक़ीक़त लगातार सवाल खड़े करती रही है। जिलाधिकारी द्वारा गठित स्पेशल टास्क टीम और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की सक्रियता के दावे जितने मुखर हैं, उतनी ही मुखर उन परिवारों की पीड़ा भी है, जो सालों से अपने वैधानिक अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ताज़ा मामला राजनगर एक्सटेंशन स्थित एमसीसी सिग्नेचर हाइट्स का है, जहां 1600 से अधिक परिवार आज भी बुनियादी सुरक्षा और मुकम्मल हैंडओवर की राह देख रहे हैं।
30 दिन का अल्टीमेटम: नियत या नाटक ?

बीती 12 दिसंबर को जीडीए के संयुक्त सचिव एम.पी. सिंह ने अन्निका प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी निर्मल जैन, डायरेक्टर मनीष जैन तथा संजीव और प्रवीण रहलान के विरुद्ध आदेश जारी कर नव-निर्वाचित एओए को मेंटीनेंस सहित कंप्लीट हैंडओवर सौंपने के लिए 30 दिनों की समयसीमा तय की। आदेश में चेताया गया कि अनुपालन न होने पर यूपी नगर नियोजन एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम-1973, यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 (धारा 25 व 26), यूपी रेरा अधिनियम-2016, भारतीय न्याय संहिता-2023 तथा राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम-2023 के तहत कार्रवाई होगी।
पर सवाल यह है, क्या यह समयसीमा निर्णायक होगी या फिर पहले की तरह चेतावनी काग़ज़ों में ही सिमट जाएगी ?
हैंडओवर की पूरी सूची: क़ानून साफ़, अमल धुंधला
आदेश में बिल्डर को निर्देशित किया गया है कि वह रेज़िडेंट्स को आवश्यक सेवाओं से जुड़े सभी तकनीकी अवयव सौंपे। साथ ही लैंड टाइटल डीड्स, बिल्डिंग प्लान, कन्वेयंस व प्रॉपर्टी इंश्योरेंस विवरण, अनसोल्ड फ्लैट्स व कैपिटल एसेट्स, ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़, सभी असेट्स का मेंटीनेंस शेड्यूल, ऑडिटेड व टैक्स रिकॉर्ड, आईएफएमएस व कॉर्पस फंड, जीडीए सहित समस्त विभागों से एनओसी/सीसी/ओसी, अप्रूव्ड ले-आउट, आर्किटेक्चरल व स्ट्रक्चरल ड्रॉइंग, एसटीपी/डब्ल्यूटीपी, लिफ्ट, विद्युत सुरक्षा, फायर सेफ्टी व पर्यावरण एनओसी, लिफ्ट पंजीकरण, पार्किंग का स्वीकृत मानचित्र निवासियों को सौंपें और बिल्डिंग का पेंट भी कराकर दें। सूची लंबी है, क़ानून स्पष्ट है, पर अमल अब भी अधूरा।
बैठक में स्वीकारोक्ति, कार्रवाई में हिचक!
11 दिसंबर को जीडीए ने एओए और बिल्डर पक्ष की संयुक्त बैठक कराई। बैठक के मिनट्स के अनुसार बिल्डर पक्ष ने आईएफएमएस की धनराशि उपलब्ध न होने की बात स्वीकार की। यहीं से बड़ा प्रश्न उभरता है, जब अनियमितताएं स्वीकार हैं, तो कड़ी धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं ?
2013 का प्रोजेक्ट, 2025 में भी अधूरा!
जानकारी के अनुसार, 2013 में लॉन्च हुए इस प्रोजेक्ट का अब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया गया। फिलहाल सोसाइटी के पास फायर एनओसी तक नहीं है। यानी 1600 परिवार ऐसे परिसर में रह रहे हैं, जहां आपात स्थिति में सुरक्षा इंतज़ाम अधूरे हैं, यह महज़ प्रशासनिक ढिलाई नहीं, बल्कि जान-माल के साथ जोखिम है।
एओए का अल्टीमेटम
एओए अध्यक्ष राजेश कुमार कहते हैं कि-

“1600 परिवारों की जीवन भर की गाढ़ी कमाई और उनका जीवन दांव पर है। आधा-अधूरा कुछ स्वीकार नहीं। पीने लायक पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। यदि जीडीए ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की, तो लड़ाई आरपार की होगी।”
कब, कैसे और किस कीमत पर ?
क्या 30 दिन का अल्टीमेटम वाकई बिल्डर को कानून के कटघरे तक लाएगा ? क्या बिना फायर एनओसी और सीसी के रह रहे परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय होगी ? और क्या चेतावनियों से आगे बढ़कर दंडात्मक कार्रवाई होगी ?
एमसीसी सिग्नेचर हाइट्स का मामला एक सोसाइटी भर की कहानी नहीं, यह उस व्यवस्था का आईना है जहां क़ानून मौजूद हैं, पर उनका असर सीमित। अब समय है काग़ज़ी सख़्ती से आगे बढ़कर समयबद्ध, पारदर्शी और उदाहरणात्मक कार्रवाई का, ताकि होम बायर्स का भरोसा लौटे और 1600 परिवार सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकें।
