लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में जल–त्रासदी, एओए-मेंटिनेंस एजेंसी की नाकामी से 450 परिवार बंधक जैसे हालात में!
नलों में सन्नाटा, टॉवरों में त्राहि-त्राहि
हाई मेंटीनेंस की वसूली, बदले में पानी भी नसीब नहीं!
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। एनई-9 स्थित लैंडक्राफ्ट सोसाइटी में जल संकट से हालात आपदा जैसे बन गए हैं। सोसाइटी के फेज-वन में पिछले तीन–चार दिनों से पानी की सप्लाई पूरी तरह ध्वस्त है। नलों से पानी नहीं, बल्कि मेंटिनेंस एजेंसी की नाकामी और एओए की संवेदनहीनता टपक रही है। स्थिति इतनी भयावह है कि फ्लैटों में न नहाने का पानी है, न पीने का और फ्लश तक करने के लिए भी एक बूंद उपलब्ध नहीं।
यह समस्या कुछ घंटों की नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों से चली आ रही गंभीर लापरवाही का परिणाम है। आज तड़के से हालात और बदतर हो गए, जब पूरे फेज-वन में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। चार टॉवर, 22-22 मंज़िल, और उनमें रहने वाले करीब 450 परिवार मानो एओए की गलत नीतियों की सजा भुगत रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्गों की सेहत और कामकाजी लोगों की दिनचर्या, सब कुछ ठप हो चुका है। एओए ने रेसिडेंट्स को इलेक्ट्रिक पैनल में तकनीकी खराबी का हवाला देकर उनसे धैर्य बनाये रखने की अपील की है परन्तु निवासी इससे और भड़क गए।
एक बूंद पानी नहीं, लेकिन मेंटीनेंस पूरा वसूला जाता है
सी-टॉवर की निवासी डॉ. शिमोना राज गुस्से और बेबसी के साथ कहती हैं कि-
“तीन दिन से पानी की समस्या है। रात तक कभी-कभार थोड़ा पानी आ जाता था, लेकिन आज सुबह से एक बूंद भी नहीं। हम हर महीने हाई मेंटीनेंस चार्ज देते हैं, फिर भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा न मिलना शर्मनाक है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और मैं क्लिनिक तक नहीं पहुंच सकी। यह सीधी-सीधी बदइंतज़ामी है।”
एओए की लापरवाही ने बिगाड़े हालात
सोसाइटी के पूर्व एओए अध्यक्ष इस पूरे मामले को तकनीकी खराबी मानने से साफ इनकार करते हैं। उनका कहना है कि यह संकट एओए की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदार फैसलों का नतीजा है।
पूर्व एओएअध्यक्ष एस के भटनागर बताते हैं-

“एओए ने बिना तैयारी और समझ के मेंटीनेंस एजेंसी बदलकर गोदरेज फैसिलिटी सर्विसेज को जिम्मेदारी दे दी। नई एजेंसी को सिस्टम की कोई जानकारी नहीं। नतीजा, पूरी सोसाइटी पानी के लिए तरस रही है।”
हम बंधक बन गए हैं, कोई सुनने वाला नहीं
निवासी चंद्रशेखर कहते हैं-

“ऐसा लग रहा है जैसे हम अपने ही घरों में बंधक बनकर रह गए हैं। पानी नहीं है, टैंकर की कोई ठोस व्यवस्था नहीं, और एओए से सिर्फ खोखले आश्वासन मिलते हैं। मेंटीनेंस तो पूरा लिया जाता है, लेकिन सुविधा शून्य है।”
वहीं रेखा चतुर्वेदी का कहना है-

“घर का सारा काम ठप है। बच्चों और बुज़ुर्गों की हालत खराब है। एओए को पहले से हालात पता थे, फिर भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। यह लापरवाही नहीं, बल्कि निवासियों के साथ सीधा अन्याय है।”
सवालों के घेरे में एओए, जवाबदेही तय हो
लैंडक्राफ्ट सोसाइटी का यह मामला अब सिर्फ पानी की कमी का नहीं, बल्कि प्रबंधन की असफलता, गैर-जवाबदेही और निवासियों की उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है। निवासियों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से टैंकरों की नियमित व्यवस्था की जाए, मेंटीनेंस एजेंसी और एओए की जवाबदेही तय हो और मेंटीनेंस चार्ज के बदले मिलने वाली सुविधाओं का ऑडिट कराया जाए। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो निवासी प्रदर्शन, प्रशासनिक शिकायत और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। सवाल साफ है कि जब पैसा पूरा लिया जाता है, तो बुनियादी सुविधा क्यों नहीं ?
