February 9, 2026

गाजियाबाद की हम-तुम रोड: 24 मीटर की फ़ाइल, 6 मीटर की सड़क और हर दिन मंडराती मौत!!

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हम तुम रोड निवासी फोरम के आंदोलन की फाइल फोटो

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। यह कहानी किसी दूर-दराज़ के गांव की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े गाजियाबाद के उस शहरी इलाके की है, जहाँ विकास के दावे हर बोर्ड पर लिखे हैं, लेकिन ज़मीन पर इंसानों की जान की कोई कीमत नहीं। नेशनल हाईवे-58 से राजनगर एक्सटेंशन को जोड़ने वाली हम-तुम रोड आज सिर्फ एक सड़क नहीं रही, यह सरकारी फ़ाइलों में दफन वादों, अधूरी योजनाओं और प्रशासनिक बेरुख़ी की सबसे भयावह तस्वीर बन चुकी है।

जिस सड़क को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की योजना में 24 मीटर चौड़ा होना था, वह आज भी 5 से 6 मीटर में सिमटी हुई है, वो भी बदहाल। इसी संकरे रास्ते से हज़ारों परिवार रोज़ गुजरते हैं, स्कूल जाते बच्चे, काम पर जाते युवा, बुज़ुर्ग और महिलाएं। और इसी रास्ते पर हर दिन मौत दबे पांव चलती है।

फाइल फोटो

जब एक के बाद एक युवक मरते हैं, महिलाएं कुचली जाती हैं, किसी का हाथ कट जाता है, तो सवाल यह नहीं रह जाता कि सड़क कब बनेगी। सवाल यह बन जाता है कि क्या प्रशासन को लाशें दिखाई नहीं देती हैं या उसे सिर्फ़ फाइलें दिखाई देती हैं ?

यह रिपोर्ट हम-तुम रोड पर हुए हादसों की सूची भर नहीं है। यह उस व्यवस्था के ख़िलाफ़ एक आरोप-पत्र है, जो हर दुर्घटना के बाद खामोश हो जाती है और अगली मौत तक इंतज़ार करती है। अब जब सब्र टूट चुका है, तो यह सिर्फ़ मांग नहीं, न्याय की पुकार है।

‘हम-तुम रोड’ आज विकास नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की पहचान बन चुकी है। मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सड़क करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में सात बहुमंजिला आवासीय सोसाइटियों, निलाया ग्रीन, मोती रेजीडेंसी, महक जीवन, संचार रेजीडेंसी, मीडो विष्टा, राज विलास, दीया ग्रीन, और एक बड़े गांव मोरटा को जोड़ती है।

फाइल फोटो

24 मीटर की स्वीकृति, ज़मीन पर 5–6 मीटर की मजबूरी

स्थानीय लोगों के मुताबिक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की क्षेत्रीय विकास योजना में हम-तुम रोड को 24 मीटर चौड़ा दिखाया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वर्षों बाद भी यह सड़क कहीं 5 तो कहीं 7 मीटर से अधिक चौड़ी नहीं है। न कोई फुटपाथ, न सर्विस लेन, न स्पीड कंट्रोल, भारी ट्रक-लोडर, मिट्टी ढोते डम्पर, बसें, कारें और पैदल लोग सब एक ही संकरे और जर्जर रास्ते में फंसे हुए हैं।

फाइल फोटो

हादसों की सड़क बन चुकी है ‘हम-तुम रोड’

प्रशासनिक उदासीनता ने इस सड़क को खून से सींच दिया है। 29 अगस्त 2024 को एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इसी वर्ष एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने दो महिलाओं को टक्कर मारी, जिसमें एक महिला की मौके पर ही मृत्यु हो गई। दिसंबर 2024 में ट्रक की टक्कर से एक युवक को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा।

इनके अलावा दर्जनों छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें लोग गंभीर रूप से घायल हुए। स्थानीय लोग अब इसे बेझिझक “मौत की हम-तुम रोड” कहने लगे हैं।

फाइल फोटो

धरना-प्रदर्शन हुए, पर सुनवाई शून्य

लगातार हो रही मौतों और हादसों से तंग आकर स्थानीय निवासियों ने “हम-तुम रोड निवासी फोरम” का गठन किया। फोरम के बैनर तले पैदल मार्च निकाले गए, धरना-प्रदर्शन किए गए, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए, यहां तक कि स्थानीय विधायक ने विधानसभा में भी हम-तुम रोड का मुद्दा उठाया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नतीजा आज भी सिफ़र है।

फाइल फोटो

अब सब्र टूटा, आंदोलन तेज़

दो दिन पहले एक बार फिर सड़क पर आक्रोश फूटा। नारेबाजी हुई, प्रदर्शन हुआ और अब बड़े आंदोलन की तैयारी चल रही है।
महक जीवन सोसाइटी के निवासी मुरारीलाल शर्मा ने कहा-

मुरारीलाल शर्मा

“हम-तुम रोड पर हर दिन मौत मंडराती है। इस बार लड़ाई आर-पार की होगी। अब या तो सड़क बनेगी या सिस्टम जवाब देगा।”

यह सिर्फ एक सड़क का मामला नहीं है, यह हजारों नागरिकों के जीवन और सुरक्षा का सवाल है। अगर अब भी हम-तुम रोड पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाला जनांदोलन सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगा, उसकी आंच शासन और प्रशासन दोनों तक पहुंचेगी।

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