14 करोड़ की ‘डिजिटल जेल’: कानून के नाम पर NRI डॉक्टर दंपति से महालूट!!
फोन कॉल से शुरू हुई कैद
17 दिन में उड़ गए 14.85 करोड़!
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी अब सिर्फ़ तकनीक का अपराध नहीं रही, यह अब मानसिक कैद और डर के ज़रिये लूट का सबसे ख़तरनाक हथियार बन चुकी है। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश से सामने आया ताज़ा मामला इसकी सबसे भयावह मिसाल है, जहाँ UN में सेवा दे चुके NRI डॉक्टर दंपति को कानून, राष्ट्र सुरक्षा और गिरफ्तारी के डर में ऐसा जकड़ा गया कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी भर की कमाई 14 करोड़ 85 लाख रुपये ठगों के हवाले कर दी।
फोन कॉल से शुरू हुई ‘डिजिटल जेल’
24 दिसंबर को आए एक फोन कॉल ने डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा की ज़िंदगी को जैसे थाम लिया। कॉल करने वालों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा बताया और फर्जी मुकदमों, अरेस्ट वारंट और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का डर दिखाया।
डर इतना गहरा बैठा कि अगले 17 दिनों तक यह दंपति अपने ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रही, हर पल वीडियो कॉल पर निगरानी, हर बातचीत पर पहरा।

कानून का डर, राष्ट्र सुरक्षा का बहाना
साइबर ठगों ने खुद को इतना “ऑथेंटिक” दिखाया कि उन्होंने PMLA, मनी लॉन्ड्रिंग कानून और नेशनल सिक्योरिटी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को पूरी तरह मानसिक रूप से तोड़ दिया। डॉक्टर इंदिरा तनेजा को अलग-अलग दिनों में कभी 2 करोड़, कभी 2.10 करोड़ रुपये आठ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए।
बैंक मैनेजर से भी झूठ बुलवाया
इस केस का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि ठगों ने पीड़िता को पहले से “स्क्रिप्ट” दे रखी थी। जब भी डॉक्टर इंदिरा बैंक जातीं, उनसे कहा जाता-
“अगर बैंक स्टाफ पूछे कि पैसा क्यों ट्रांसफर कर रही हैं, तो यही कहानी बताना।”
यहां तक कि बैंक मैनेजर को भी वही झूठ सुनाया गया, जो साइबर ठगों ने रटवाया था।

वीडियो कॉल पर ‘निगरानी’, बाहर जाने तक की इजाज़त नहीं
डिजिटल अरेस्ट के दौरान अगर डॉक्टर इंदिरा को कहीं बाहर जाना होता या किसी से बात करनी होती, तो ठग उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल करके सब कुछ सुनते-देखते थे—ताकि कहीं यह ठगी उजागर न हो जाए।
पुलिस स्टेशन में भी दिखाया गया ‘पावर’
10 जनवरी की सुबह ठगों ने नया नाटक रचा। कहा गया-
“अब सारा पैसा RBI रिफंड करेगा, लोकल पुलिस को जानकारी है।”
डॉक्टर इंदिरा जब थाने पहुंचीं, तब भी ठग वीडियो कॉल पर थे। उन्होंने SHO से बात तक कराई और पुलिसकर्मियों से बदतमीजी भरे लहजे में बात की। यहीं जाकर सच्चाई सामने आई 14.85 करोड़ की ठगी।
सदमे में डॉक्टर दंपति, जांच स्पेशल सेल को
करीब 48 साल अमेरिका में रहकर UN जैसी संस्था में सेवा देने वाले डॉक्टर दंपति आज गहरे सदमे में हैं। दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी है।
अगर UN में काम कर चुके, पढ़े-लिखे, जागरूक नागरिक इस तरह “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंस सकते हैं, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है ?
