गाजियाबाद हाउस टैक्स विवाद: राहत का एलान, भ्रम बरकरार!
पुरानी दरों की बात कहकर महापौर ने दी राहत!
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। पिछले सात महीनों से चल रहे हाउस टैक्स विवाद ने गुरुवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब महापौर सुनीता दयाल ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया कि हाउस टैक्स की वसूली अब पुरानी दरों के आधार पर की जाएगी। महापौर के इस बयान से जहां शहर के लाखों करदाताओं में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं यह बयान कई गंभीर और असहज सवाल भी खड़े कर गया है।

30 जून 2025 का फैसला क्यों रहा बेअसर ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नगर निगम सदन का फैसला सर्वोपरि था, तो फिर 30 जून 2025 को सदन में अत्यधिक बढ़ी हुई हाउस टैक्स दरों को वापस लेने के निर्णय के बावजूद उन्हीं बढ़ी हुई दरों से टैक्स की वसूली क्यों की गई ? उस दिन शीर्ष जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से राहत की घोषणा की गई थी, फिर भी जमीनी हकीकत इससे उलट क्यों रही ?
छूट का एलान, पर आधार अस्पष्ट
महापौर द्वारा महीने दर महीने 20 प्रतिशत छूट के एलान ने भी भ्रम को और बढ़ाया। यदि पुरानी दरें ही लागू थीं, तो छूट की जरूरत क्यों पड़ी ? और यदि बढ़ी हुई दरों को आधार बनाकर छूट दी जा रही थी, तो फिर सदन के फैसले का क्या हुआ ? निगम प्रशासन आज तक यह स्पष्ट नहीं कर सका कि करदाताओं से वास्तव में किस टैक्स स्लैब पर वसूली की गई।

हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व पार्षदों को इस मुद्दे पर माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि यदि महापौर अत्यधिक टैक्स वृद्धि के पक्ष में नहीं हैं, तो उन्हें उच्च न्यायालय में स्पष्ट एफ़िडेविट दाखिल कर बढ़ी हुई दरों को औपचारिक रूप से गलत घोषित करना चाहिए।
चुनावी दबाव और शासन की चिंता
नगर निगम की राजनीति से जुड़े जानकारों के अनुसार, निगम की कमजोर टैक्स वसूली की रिपोर्ट शासन स्तर तक पहुंच चुकी है। 2027 की शुरुआत में संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए, सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को यह आशंका है कि हाउस टैक्स गाजियाबाद में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। हालिया यू-टर्न को इसी राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
राहत कब ज़मीन पर उतरेगी ?
महापौर के बयान के बाद जनता को राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन जब तक करदाताओं को पुरानी दरों के अनुसार संशोधित बिल नहीं मिलते और जिन लोगों ने बढ़ी हुई दरों पर टैक्स जमा कर दिया है उन्हें अतिरिक्त राशि की वापसी या अगले बिल में स्पष्ट एडजस्टमेंट का प्रमाण नहीं मिलता, तब तक स्थिति भ्रमपूर्ण बनी रहेगी।
