गाजियाबाद। NH-58 से राजनगर एक्सटेंशन को जोड़ने वाली बहुचर्चित ‘हमतुम रोड’अब विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की पहचान बन चुकी है। सड़क की हालत दिन-प्रतिदिन बद से बदत्तर होती जा रही है, लेकिन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। हालात इतने भयावह हैं कि जरा-सी बारिश में यह सड़क पैदल और दोपहिया चालकों के लिए ‘मौत की सड़क’ बन जाती है।
गड्ढों में तब्दील सड़क, उखड़ी सतह, भरा हुआ कीचड़ और फिसलन, यह सब किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि रोजाना फिसलकर गिरने, वाहन पलटने और गंभीर चोटों की घटनाएं आम हो चुकी हैं। इसके बावजूद न मरम्मत हुई, न स्थायी समाधान।
ख़तरनाक ‘हमतुम रोड’
धरनों से थके लोग, अब NHRC की शरण
बरसों से चले आ रहे धरने-प्रदर्शन, ज्ञापन और आश्वासनों से जब कोई राहत नहीं मिली, तो मजबूर होकर स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाज़ा खटखटाया। निलायाग्रीन सोसायटी के मंजीत चौहान ने 16 जनवरी को NHRC में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के साथ अख़बारों की पुरानी कतरनें, सड़क की भयावह हालत के वीडियो और प्रशासन द्वारा दिए गए खोखले आश्वासनों की प्रतियां भी संलग्न की गईं।
इस मामले को गंभीर मानते हुए NHRC ने त्वरित संज्ञान लिया और 19 जनवरी को GDA के उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर 6 सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
बड़ा सवाल: क्या NHRC के आदेश से भी नहीं जागेगा GDA?
अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यही है कि जिस अथॉरिटी को जनता की आवाज़, हादसे और संभावित मौतें नहीं जगा सकीं, क्या वह NHRC के निर्देशों के बाद कुछ करेगी ? या फिर यह पत्र भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, जैसे दर्जनों शिकायतें पहले दफन हो चुकी हैं?
लोग अपाहिज हो रहे हैं, जान जा चुकी हैं
मंजीत चौहान का कहना है-
मंजीत चौहान, शिकायतकर्त्ता
“हमतुम रोड पर चलते हुए लोग अपाहिज हो चुके हैं, कुछ की जान भी गई है। क्या GDA किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार कर रहा है ? क्या किसी वीआईपी हादसे के बाद ही यह सड़क बनेगी ? ”
उनका आरोप है कि सड़क की बदहाली मानवाधिकार उल्लंघन के दायरे में आती है, क्योंकि यह नागरिकों के जीवन और सुरक्षित आवागमन के अधिकार को सीधे चुनौती देती है।
वोट बहिष्कार का ऐलान, सोसायटी गेट पर लगे बैनर
प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित होकर हमतुम रोड के दोनों ओर बसी सात हाउसिंग सोसायटियों ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। इन सोसायटियों ने आगामी किसी भी चुनाव में वोट न डालने का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं, इस फैसले को सार्वजनिक करने के लिए सोसायटी गेट पर बाकायदा बैनर और बोर्ड भी टांग दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है-
“जब सड़क नहीं, सुरक्षा नहीं, सुनवाई नहीं, तो वोट क्यों ?”
विकास प्राधिकरण की चुप्पी सवालों के घेरे में
हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर हालात और अब NHRC की सख्त टिप्पणी के बावजूद GDA की ओर से कोई स्पष्ट बयान या कार्ययोजना सामने नहीं आई है। क्या यह चुप्पी लापरवाही का संकेत है, या फिर एक और औपचारिकता निभाकर मामला ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी ?