November 4, 2026
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गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर धंसी जमीन, 4 फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा!!

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बशीरत गंज टोल के पास सर्विस रोड के स्लोप में मिट्टी का कटान

टोल प्लाजा में घुसा पानी, JCB से भराई के बाद डाला गया कंक्रीट

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

उन्नाव। उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद गंगा एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। मेरठ से प्रयागराज जाने वाले मार्ग पर किलोमीटर 423.8 के पास बशीरत गंज टोल के निकट सर्विस रोड के स्लोप में बड़ा गड्ढा हो गया। इसकी गहराई चार फीट से अधिक बताई जा रही है।

 

गड्ढे के साथ हुए मिट्टी के कटान से बड़ी मात्रा में पानी सर्विस रोड से होते हुए टोल प्लाजा परिसर में पहुंच गया। स्थिति संभालने के लिए पानी को पंप के जरिए बाहर निकाला गया। इसके बाद जेसीबी से गड्ढे में मिट्टी भरवाई गई और ऊपर से रेडीमिक्स कंक्रीट डालकर हिस्से को दुरुस्त किया गया।

उद्घाटन के चार महीने बाद ही सवाल क्यों ?

गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को हुआ था। इसके बाद एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों से सड़क और गड्ढों से जुड़ी खबरें सामने आती रही हैं। अब बशीरत गंज टोल के पास हुआ मिट्टी का यह कटान एक अलग सवाल खड़ा करता है,

क्या समस्या सिर्फ ऊपर की सड़क तक सीमित है या इसके पीछे एक्सप्रेसवे के स्लोप, मिट्टी की कॉम्पैक्शन और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ा कोई तकनीकी कारण है ?

किसी एक्सप्रेसवे के स्लोप में इतनी मात्रा में मिट्टी का कट जाना केवल सतही मरम्मत का मामला नहीं माना जा सकता। बारिश के पानी की निकासी, मिट्टी की मजबूती और स्लोप की सुरक्षा व्यवस्था की तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है।

36 हजार करोड़ की परियोजना, लेकिन सवाल ‘गड्ढे’ से आगे के हैं

36 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से उम्मीद सिर्फ तेज आवागमन की नहीं, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ सड़क की भी है। ऐसे में अब सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्लोप में मिट्टी का कटान क्यों हुआ ? क्या निर्माण के दौरान मिट्टी की कॉम्पैक्शन और जल निकासी की पर्याप्त जांच हुई थी ? क्या संबंधित एजेंसी ने निर्माण के बाद संरचना का स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट कराया है ?

और सबसे अहम, 

क्या गड्ढे की मरम्मत के साथ उसके कारण की भी जांच होगी ?

फिलहाल मौके पर गड्ढे में मिट्टी भरकर और कंक्रीट डालकर स्थिति संभाल ली गई है। लेकिन असली सवाल मरम्मत से आगे है। अगर पानी के दबाव या मिट्टी के कटान का कारण दूर नहीं किया गया, तो महज सतह की मरम्मत कितने समय तक टिकेगी?

गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि गड्ढा कितनी जल्दी भर दिया गया, बल्कि यह भी कि गड्ढा बना क्यों।

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