गुरुजी… एक शुक्रिया अभी भी बाकी है: गुरु पूर्णिमा पर छलका सचिन तेंदुलकर का दर्द, भावुक संदेश ने जीत लिया देश का दिल
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शिवाजी पार्क पहुंचकर गुरु रमाकांत आचरेकर को दी श्रद्धांजलि
बोले, आपने ही मुझे खिलाड़ी नहीं, इंसान भी बनाया
NEWS1UP
स्पोर्ट्स डेस्क
मुंबई। क्रिकेट के मैदान पर करोड़ों दिलों पर राज करने वाले ‘मास्टर ब्लास्टर’ सचिन तेंदुलकर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरु और महान क्रिकेट प्रशिक्षक रमाकांत आचरेकर को याद कर भावुक हो गए। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क स्थित आचरेकर स्मारक पर पहुंचकर उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की और सोशल मीडिया पर ऐसा भावुक संदेश साझा किया, जिसने खेल जगत के साथ-साथ करोड़ों प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया।
सचिन ने लिखा,
“आज यहां खड़े होकर महसूस हुआ कि चाहे कितने भी साल गुजर जाएं, मुझे हमेशा लगता है कि एक ‘थैंक्यू’ अभी भी कहना बाकी रह गया है। मुझ पर भरोसा करने, मुझे सही राह दिखाने और मुझे वह इंसान बनाने के लिए आपका धन्यवाद। गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं, आचरेकर सर।”
सचिन की यह भावनात्मक श्रद्धांजलि महज एक संदेश नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा को नमन है, जिसने भारतीय क्रिकेट को उसका सबसे चमकदार सितारा दिया।

क्रिकेट के ‘द्रोणाचार्य’ थे रमाकांत आचरेकर
रमाकांत आचरेकर भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा प्रशिक्षकों में शामिल रहे, जिनकी कोचिंग ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए। सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे दिग्गज उनके सबसे चर्चित शिष्य रहे। क्रिकेट की दुनिया में उन्हें सम्मानपूर्वक ‘क्रिकेट का द्रोणाचार्य’ कहा जाता है। उनकी सादगी, अनुशासन और खिलाड़ियों को तराशने की अद्भुत क्षमता आज भी प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।
जहां शुरू हुआ था सपना, वहीं झुका शिष्य का सिर

मुंबई के शिवाजी पार्क में वर्ष 2024 में रमाकांत आचरेकर का स्मारक स्थापित किया गया। यही वह मैदान है, जहां कभी आचरेकर की पैनी नजरों ने एक नन्हे सचिन की प्रतिभा को पहचाना था। वर्षों बाद उसी स्थान पर पहुंचकर सचिन का अपने गुरु के प्रति नतमस्तक होना गुरु-शिष्य संबंध की अमर मिसाल बन गया।
24 साल… 100 शतक… और अनगिनत यादें
सचिन तेंदुलकर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 24 वर्षों तक फैला रहा। उन्होंने 200 टेस्ट, 463 वनडे और 1 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। टेस्ट क्रिकेट में 15,921 रन, वनडे में 18,426 रन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक का विश्व रिकॉर्ड आज भी उनके नाम दर्ज है। लेकिन इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी सचिन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हर महान उपलब्धि के पीछे किसी गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन होता है।
