November 4, 2026
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लाखों का AMC, फिर भी डेढ़ घंटे लिफ्ट में कैद बुजुर्ग! जॉनसन लिफ्ट्स की मेंटेनेंस व्यवस्था कटघरे में!!

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प्रोव्यू लैबोनी सोसाइटी में ARD सिस्टम फेल होने का आरोप, सूचना के करीब 45 मिनट बाद पहुंची मेंटीनेंस टीम

एओए ने पुलिस से की शिकायत

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित प्रोव्यू लैबोनी सोसाइटी में लिफ्ट की मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रोजाना दूध की सप्लाई करने आए एक बुजुर्ग करीब डेढ़ घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहे। आरोप है कि लिफ्ट का ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) सिस्टम काम नहीं कर रहा था, जबकि सोसाइटी की लिफ्टों का कंप्रिहेंसिव AMC कथित तौर पर जॉनसन लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है।

घटना बीते रविवार सुबह करीब 8:15 बजे की बताई जा रही है। बुजुर्ग ए टावर की 13वीं मंजिल पर दूध की डिलीवरी करने के बाद लिफ्ट संख्या L-D 9061 से नीचे लौट रहे थे। लिफ्ट चलते ही तकनीकी समस्या के कारण रुक गई। अटकते-रुकते लिफ्ट नीचे तो पहुंची, लेकिन पहली और ग्राउंड फ्लोर के बीच फंस गई।

ARD सिस्टम ने नहीं दिया सहारा, बुजुर्ग बने लिफ्ट में बंधक

लिफ्ट में फंसने के बाद बुजुर्ग ने अलार्म बजाया। आवाज सुनकर पास के फ्लोर पर काम कर रही महिला कर्मचारी और अन्य लोग मौके पर पहुंचे। लेकिन आरोप है कि लिफ्ट का ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस काम नहीं कर रहा था, जिसके चलते लिफ्ट में फंसे व्यक्ति को तत्काल बाहर निकालना संभव नहीं हो सका।

घटना की सूचना तत्काल लिफ्ट की मेंटीनेंस कंपनी जॉनसन लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को मोबाइल के जरिए दी गई। निवासियों के मुताबिक कंपनी की मेंटेनेंस टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 45 मिनट लग गए। सवाल यही है कि जिस कंपनी की जिम्मेदारी लिफ्ट की नियमित मेंटीनेंस और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है, उसकी टीम को आपात स्थिति में मौके तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा ?

डेढ़ घंटे तक लिफ्ट में कैद रहे बुजुर्ग

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार करीब डेढ़ घंटे बाद बुजुर्ग को किसी तरह लिफ्ट से बाहर निकाला जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह डेढ़ घंटा बुजुर्ग के लिए किसी सजा से कम नहीं था। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में बुजुर्ग ने जिस तरह धैर्य और संयम बनाए रखा, उसकी अब सोसाइटी में हर तरफ प्रशंसा हो रही है।

बताया जा रहा है कि जब काफी देर तक उन्हें लिफ्ट से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला तो बुजुर्ग लिफ्ट के एक तरफ बैठ गए और सकुशल बाहर निकलने की प्रार्थना करते रहे। लंबे समय तक बंद लिफ्ट में रहने के बावजूद उन्होंने घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखा।

AMC के नाम पर लाखों रुपये, फिर भी सुरक्षा सिस्टम फेल ?

इस घटना ने अब सीधे तौर पर जॉनसन लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की मेंटीनेंस व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी की लिफ्टों की कंप्रिहेंसिव AMC कंपनी के पास है। इसके लिए कथित तौर पर छोटी लिफ्ट के लिए करीब 2,05,717 रुपये और बड़ी लिफ्ट के लिए करीब ढाई लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।

निवासियों का सवाल है कि जब कंपनी को लिफ्ट की व्यापक मेंटीनेंस और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है और इसके लिए लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, तो ARD जैसा महत्वपूर्ण इमरजेंसी सिस्टम काम करने की स्थिति में क्यों नहीं था ?

मेंटेनेंस का जवाब मांगने पर अपग्रेडेशन का दबाव ?

निवासियों ने कंपनी पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब लिफ्ट की खराबी और मेंटेनेंस को लेकर कंपनी से सवाल किए जाते हैं तो कथित तौर पर उसके कर्मचारी लिफ्ट अपग्रेड कराने का दबाव बनाते हैं।

निवासियों के अनुसार सोसाइटी में लिफ्ट करीब 2012 से संचालित हैं। ऐसे में केवल करीब 14 वर्ष के भीतर लिफ्टों को अपग्रेड कराने के तर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निवासियों का सवाल है कि अगर नियमित कंप्रिहेंसिव एएमसी के बावजूद लिफ्ट का ARD सिस्टम तक भरोसेमंद तरीके से काम नहीं कर रहा, तो समस्या लिफ्ट की उम्र में है या उसके रखरखाव की व्यवस्था में ?

AOA ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया

घटना के बाद मामले को लेकर सोसाइटी के एओए अध्यक्ष मोहित दीक्षित और सचिव कुमार कुणाल ने संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में जॉनसन लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों, एएमसी प्रभारी, संबंधित फैसिलिटी मैनेजर और इंजीनियर की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

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