GH-7 में CC-OC पर आर-पार की लड़ाई, बिल्डर को 15 दिन का अल्टीमेटम!
GDA के निरीक्षण में निर्माण संबंधी कमियां मिलने का दावा, 2022 में मेंटेनेंस हैंडओवर के बाद भी प्रमाणपत्रों का इंतजार!
बिजली कनेक्शन और सोलर प्रोजेक्ट अटके, फ्लैट मालिकों की बढ़ी चिंता!!
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। घर खरीदने के लिए जीवनभर की कमाई लगाने वाले फ्लैट मालिकों को अगर अपने ही परिसर में बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है। क्रॉसिंग रिपब्लिक की GH-7 सोसाइटी में कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC) का मामला अब इसी मोड़ पर पहुंच गया है। सोसाइटी के फ्लैट मालिकों की एसोसिएशन ने बिल्डर क्रॉसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (CIPL) के प्रबंध निदेशक को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन ने साफ कहा है कि तय समय में दोनों वैधानिक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए तो वह इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। अल्टीमेटम की प्रतियां गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष और मेरठ मंडल के आयुक्त को भी भेजी गई हैं।

फ्लैट बिके, कब्जा मिला, लेकिन प्रमाणपत्र कहां ?
क्रॉसिंग रिपब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित चौधरी और महासचिव अभय यादव का आरोप है कि बिल्डर ने CC और OC के बिना ही फ्लैट बेचकर खरीदारों को कब्जा दे दिया। एसोसिएशन का कहना है कि आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों के अभाव में आज सोसाइटी के निवासी कई जरूरी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं थीं, तो फ्लैटों का कब्जा किस आधार पर दिया गया? इस सवाल का जवाब बिल्डर और संबंधित प्राधिकरण, दोनों की ओर से सामने आना जरूरी है।

2022 में हैंडओवर, फिर भी अधूरा मामला
एसोसिएशन अध्यक्ष रोहित चौधरी के मुताबिक, वर्ष 2022 में बिल्डर ने सोसाइटी का केवल मेंटेनेंस हैंडओवर किया था। उस दौरान GDA के अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया, लेकिन स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण कार्य पूरा नहीं मिलने के कारण CC जारी नहीं किया गया। चौधरी का दावा है कि बिल्डर ने इसके बाद दो-तीन बार कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया, लेकिन निरीक्षण के बाद हर बार आवेदन निरस्त हो गया।
चौधरी के अनुसार, हैंडओवर के समय एसोसिएशन को GDA से स्वीकृत नक्शे, लेआउट, डीओडी, इलेक्ट्रिकल ड्राइंग जैसे दस्तावेज और IFMS की राशि सौंपी गई थी। इसके बावजूद CC और OC का मामला अब तक नहीं सुलझ सका है। वर्षों बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने से फ्लैट मालिकों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
न अपना बिजली कनेक्शन, न सोलर लाइटिंग का रास्ता साफ
एसोसिएशन का कहना है कि आवश्यक वैधानिक दस्तावेज नहीं होने के कारण सोसाइटी अपना स्वतंत्र विद्युत कनेक्शन हासिल नहीं कर पा रही है। सोलर एनर्जी और सोलर लाइटिंग परियोजना भी आगे नहीं बढ़ पा रही। इसका सीधा असर सोसाइटी के विकास, सुविधाओं और निवासियों के खर्च पर पड़ रहा है। चौधरी के मुताबिक, यदि आवश्यक प्रमाणपत्र समय पर उपलब्ध होते, तो सोसाइटी अपनी जरूरतों के मुताबिक बिजली और सौर ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ा सकती थी।
CC और OC की अनुपलब्धता ने फ्लैट मालिकों के बीच संपत्ति की वैधानिक स्थिति को लेकर भी चिंता पैदा की है। एसोसिएशन का मानना है कि इसका असर भविष्य में फ्लैटों से जुड़े बैंक ऋण और अन्य प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
अब 15 दिन में जवाब देना होगा
एसोसिएशन ने बिल्डर को 15 दिन की समयसीमा देकर स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के पक्ष में नहीं है। अल्टीमेटम की प्रतियां GDA उपाध्यक्ष और मेरठ मंडल के आयुक्त को भेजकर एसोसिएशन ने प्रशासन का ध्यान भी इस विवाद की ओर खींचा है। यदि निर्धारित अवधि में समाधान नहीं निकला, तो मामला हाईकोर्ट पहुंच सकता है।
GH-7 का विवाद केवल CC और OC हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह उन सवालों को भी सामने लाता है, जिनका जवाब हर फ्लैट खरीदार जानना चाहता है कि क्या बिना आवश्यक प्रमाणपत्रों के कब्जा देने की परिस्थितियों की जांच हुई ? GDA के निरीक्षण में बताई गई कमियों को दूर कराने के लिए क्या कदम उठाए गए ? और यदि वर्षों बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिले हैं, तो इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी ?
फिलहाल गेंद बिल्डर और संबंधित अधिकारियों के पाले में है। अगले 15 दिन तय करेंगे कि GH-7 के फ्लैट मालिकों को वैधानिक दस्तावेजों के लिए और इंतजार करना पड़ेगा या यह विवाद न्यायालय की चौखट तक पहुंचेगा।
