November 4, 2026
[t4b-ticker]

NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: निर्दोष छात्रों को तुरंत रिहा करो, पुलिस कार्रवाई की होगी स्वतंत्र जांच

0
supreme court

दिल्ली समेत 7 राज्यों को नोटिस, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश

छात्रों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की होगी निष्पक्ष जांच

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा और अहम आदेश सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन छात्रों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और जिन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दिल्ली समेत सात राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।

CJI की सख्त टिप्पणी: निर्दोषों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अदालत के सामने कई गंभीर आरोप आए हैं। इनमें पेलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चले जाने, इलेक्ट्रिक बैटन के प्रयोग, महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, कीलों लगी लाठियों से हमला, मीडिया कर्मी की पिटाई और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा किए जाने जैसे आरोप शामिल हैं।

CJI ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी ने अपनी कानूनी सीमाओं का उल्लंघन कर निर्दोष लोगों पर अत्याचार किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। इसके लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।

स्वतंत्र जांच के संकेत, जवाबदेही तय होगी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया स्वतंत्र जांच का मामला बनता है। जांच समिति की संरचना पर अदालत बाद में निर्णय लेगी, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और जवाबदेही तय करने वाली हो।

सरकार का पक्ष: 250 पुलिसकर्मी भी घायल

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें कई को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने दावा किया कि हिंसा में कुछ असामाजिक और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल थे तथा सरकार इस संबंध में उपलब्ध डेटा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप: मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिससे संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed