930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र वितरित, कानून-व्यवस्था, पुलिस सुधार और रोजगार पर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
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भूमेश शर्मा
लखनऊ, 17 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटर (ग्रेड-ए) अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित कर्मियों को आत्म-अनुशासन, जनसेवा और तकनीकी दक्षता को अपने कार्य का आधार बनाने की सीख दी।

ड्यूटी के दौरान रील बनाना अनुशासनहीनता
मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्यूटी के प्रति सजगता और गंभीरता पुलिस सेवा की मूल पहचान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ड्यूटी के दौरान रील बनाना या ऐसा कोई भी कार्य करना, जिससे पुलिस की गरिमा प्रभावित हो, अनुशासनहीनता है। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे वे हंसी का पात्र बनें।
नवचयनित युवा बनेंगे डिजिटल वॉरियर्स
सीएम ने कहा कि चयनित अभ्यर्थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने वाले सारथी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी युवा आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता, निष्पक्षता और टीम भावना के साथ यूपी पुलिस को और अधिक सशक्त बनाएंगे। स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा में इनकी भूमिका डिजिटल वॉरियर्स के रूप में महत्वपूर्ण होगी।

2017 से पहले दंगे और कर्फ्यू, अब सुरक्षा का माहौल
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले और वर्तमान उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश में औसतन हर दूसरे-तीसरे दिन दंगे होते थे और त्योहारों के दौरान तनाव तथा लंबे समय तक कर्फ्यू लगना सामान्य बात थी। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कहीं कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और हर वर्ग को सुरक्षा का वातावरण मिला है।
जब आईपीएस ही असुरक्षित थे तो आम लोग कैसे सुरक्षित होते
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी सुरक्षित नहीं थे। मुरादाबाद की एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब आईपीएस अधिकारी तक असुरक्षित थे, तब आम नागरिक, महिलाएं और व्यापारी स्वयं को कैसे सुरक्षित महसूस कर सकते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की सख्त कार्रवाई और प्रभावी अभियोजन के कारण अपराधियों को कड़ी सजाएं मिली हैं।

पुलिस सुधारों को मिली नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1972 से लंबित पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को उनकी सरकार ने सात जनपदों में लागू किया। उन्होंने इसे पुलिस सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आम नागरिकों को बेहतर और त्वरित पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हुई है।
सवा दो लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में बिना सिफारिश और बिना भेदभाव के सवा दो लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों की अपेक्षाओं के अनुरूप भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया और प्रशिक्षण क्षमता में भी व्यापक विस्तार किया गया।
फॉरेंसिक और साइबर सुरक्षा ढांचा हुआ मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब तकनीक आधारित आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में फॉरेंसिक लैब की संख्या बढ़ाई गई है, साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है तथा सभी 75 जिलों में साइबर थाने और साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। समय पर सूचना मिलने पर साइबर ठगी के शिकार लोगों की धनराशि बचाने में भी सफलता मिल रही है।

बेहतर कानून-व्यवस्था से बढ़ी अर्थव्यवस्था
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेहतर सुरक्षा वातावरण का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक बढ़ी है। बड़े उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
यूपी अब रेंग नहीं रहा, बल्कि दौड़ रहा है
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पुलिस अवसंरचना, प्रशिक्षण केंद्रों और आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि आज अनेक जिलों में पुलिस कर्मियों के लिए आधुनिक हाईराइज बैरकें बनाई जा रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब रेंगने वाला नहीं, बल्कि दौड़ने वाला राज्य बन चुका है।
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की अपेक्षा
नवचयनित अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरी तरह मेरिट के आधार पर नौकरी मिली है, इसलिए शासन उनसे केवल ईमानदारी, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक लंबित कार्यों और टालमटोल की प्रवृत्ति को समाप्त करना होगा तथा उत्तर प्रदेश की नई पहचान को और मजबूत बनाने में सभी को योगदान देना होगा।
कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, डीजी (कारागार) पी.सी. मीणा, डीजी (भर्ती बोर्ड) एस.बी. शिरडकर तथा एडीजी (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोड़ा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

