एक के बाद एक फैसले हाईकोर्ट में सवालों के घेरे में, अब गुलमोहर टावर पर डिप्टी रजिस्ट्रार से जवाब तलब
14 मई का आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावहीन, व्यक्तिगत हलफनामा और पूरी फाइल तलब
पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसलों को लेकर भी बढ़ी न्यायिक पड़ताल

भूमेश शर्मा
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। सोसायटी विवादों पर फैसले लेने वाला डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय अब खुद न्यायिक सवालों के घेरे में है। गुलमोहर टावर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसायटीज एंड चिट्स गाजियाबाद के 14 मई 2026 के आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावहीन कर दिया है। अदालत ने डिप्टी रजिस्ट्रार से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और संबंधित मामले की पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड पेश करने को भी कहा है।
जिस चुनाव को अवैध बताया, उसी फैसले पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
डिप्टी रजिस्ट्रार ने 14 मई 2026 के आदेश में 25 मई 2025 को हुए गुलमोहर टावर सोसायटी के चुनाव को अवैध घोषित करते हुए सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 25(2) के तहत नए चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
सोसायटी की ओर से इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावहीन रखने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
लेकिन असली सवाल गुलमोहर टावर से बड़ा है

गुलमोहर टावर का मामला अब केवल एक सोसायटी के चुनाव का विवाद नहीं रह गया है। पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यकाल में लिए गए कई फैसले भी हाईकोर्ट में चुनौती और चर्चा का विषय बन चुके हैं। एक के बाद एक प्रशासनिक आदेशों का न्यायिक जांच के दायरे में आना अब डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सवाल यह है कि सोसायटी के चुनाव और प्रशासनिक विवादों पर आदेश पारित करने की प्रक्रिया कितनी न्यायसंगत व पारदर्शी है ? क्या अधिकारी हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों और न्यायिक दिशा-निर्देशों को पूरी तरह ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं ?
अब डिप्टी रजिस्ट्रार को खुद बताना होगा, आदेश कैसे और क्यों ?

गुलमोहर टावर मामले में हाईकोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि 14 मई 2026 का आदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पूर्व आदेश के अनुरूप किस प्रकार पारित किया गया।
इसके साथ ही संबंधित कार्यवाही का पूरा रिकॉर्ड भी अदालत के सामने पेश करना होगा। यानी अब मामला केवल सोसायटी के चुनाव का नहीं है। डिप्टी रजिस्ट्रार को भी अदालत के सामने अपने आदेश की प्रक्रिया और कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा।
पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले भी चर्चा के केंद्र में
गुलमोहर टावर मामले के साथ एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यकाल में लिए गए कई निर्णय पहले ही हाईकोर्ट में चर्चा और चुनौती का विषय बन चुके हैं। अलग-अलग मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप, रिकॉर्ड तलब किए जाने और अधिकारियों से जवाब मांगे जाने की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि सोसायटी नियमन से जुड़े फैसलों की प्रशासनिक प्रक्रिया में आखिर ऐसी क्या खामी है कि विवाद बार-बार न्यायालय की चौखट तक पहुंच रहे हैं।
सवाल सोसायटी का नहीं, सिस्टम का है
सोसायटी के पदाधिकारी बदलते हैं, चुनाव होते हैं, विवाद होते हैं और उनका फैसला डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय करता है। लेकिन जब फैसले ही बार-बार हाईकोर्ट की जांच के दायरे में आने लगें, तो सवाल किसी एक सोसायटी से आगे बढ़कर पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का बन जाता है।
गुलमोहर टावर मामले में 10 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस दिन अदालत के सामने डिप्टी रजिस्ट्रार का व्यक्तिगत हलफनामा और पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड होगा। अब देखना यह है कि 25 मई 2025 के चुनाव को अवैध घोषित करने वाले आदेश के पीछे क्या आधार था और क्या वह हाईकोर्ट की पूर्व व्यवस्था के अनुरूप था।
