अजनारा में मेंटेनेंस कंपनी ने खड़े किए हाथ! AOA का दो टूक, अधूरा हैंडओवर स्वीकार नहीं
अजनारा इंटीग्रिटी में लिफ्ट, पानी, बिजली, सफाई और सुरक्षा पर संकट की चेतावनी
सैकड़ों परिवारों की जिंदगीभर की जमा-पूंजी दांव पर
निगरानी तंत्र अब भी खामोश क्यों ?
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसाइटी में संकट अब केवल मेंटेनेंस कंपनी और AOA के बीच का विवाद नहीं रह गया है। यह मामला अब उन सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और जिंदगीभर की जमा-पूंजी से जुड़ गया है, जिन्होंने बिल्डर पर भरोसा कर यहां अपना घर खरीदा था।
22 सितंबर 2026 को सोसाइटी की मेंटेनेंस कंपनी लोटस मेंटेनेंस सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड (LMSPL) ने AOA को भेजे पत्र में वित्तीय संकट का हवाला देते हुए साफ कहा कि उसके पास कर्मचारियों और विभिन्न वेंडरों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि भुगतान संकट के कारण सुरक्षा, हाउसकीपिंग, लिफ्ट, पानी और बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
हैंडओवर लीजिए या शुल्क लगाइए
LMSPL ने अपने पत्र में सोसाइटी के सामने दो विकल्प रखे हैं। कंपनी के मुताबिक या तो AOA/समिति सोसाइटी का पूर्ण हैंडओवर ले, अथवा सोसाइटी के संचालन के लिए प्रस्तावित मेंटेनेंस शुल्क लागू किए जाएं, ताकि फंड की व्यवस्था हो सके। कंपनी ने AOA से 29 सितंबर 2026 तक हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया है।

CC-OC के बिना हैंडओवर नहीं: AOA अध्यक्ष

अजनारा इंटीग्रिटी AOA के अध्यक्ष नीरज त्यागी ने इस पूरे मामले में AOA का रुख साफ कर दिया है। त्यागी के मुताबिक, जब तक बिल्डर कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC), ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) समेत सभी आवश्यक दस्तावेज विधिवत रूप से नहीं सौंपता और लंबित कार्य पूरे नहीं कराता, तब तक AOA हैंडओवर स्वीकार नहीं करेगी।
त्यागी ने यह भी कहा कि-
टावर L, M और N के निवासियों के साथ AOA मजबूती से खड़ी है और उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेंटेनेंस कंपनी ने जहां जल्द हैंडओवर की मांग रखी है, वहीं AOA का कहना है कि हैंडओवर केवल मेंटेनेंस व्यवस्था लेने का नाम नहीं है, उससे पहले बिल्डर की जिम्मेदारियां पूरी होना जरूरी है।

अधूरी जिम्मेदारी का बोझ घर खरीदार क्यों उठाएं ?
निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगीभर की कमाई लगाकर घर खरीदा। उनकी शिकायत है कि सोसाइटी में रहने के बावजूद उन्हें आज भी मूलभूत सुविधाओं और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवालों से जूझना पड़ रहा है।
निवासियों के अनुसार कंप्लीशन सर्टिफिकेट, Fire NOC और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका आरोप है कि लोगों को परियोजना में बसाए जाने के समय भी कई बुनियादी सवाल अनसुलझे थे।
इन आरोपों की सक्षम विभागों द्वारा रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
बिजली व्यवस्था पर भी सवाल, बढ़ी दरों का आरोप
सोसाइटी में बिजली आपूर्ति को लेकर भी निवासी सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि निर्माण के लिए लिए गए विद्युत कनेक्शन से ही फ्लैटों में बिजली की आपूर्ति की जा रही है और बढ़ी हुई/कमर्शियल दरों पर वसूली का दबाव बनाया गया है।
यदि बिजली कनेक्शन की श्रेणी या वसूली की दरों को लेकर कोई विवाद है, तो संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
GDA की निगरानी अब सवालों के घेरे में
अजनारा इंटीग्रिटी का मामला अब GDA और जिला प्रशासन की भूमिका को भी सीधे सवालों के सामने ला रहा है। निवासियों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं GDA, जिला प्रशासन और शासन स्तर तक उठा चुके हैं। इसके बावजूद उनका संकट खत्म नहीं हुआ।
