क्रॉसिंग रिपब्लिक की रामलीला का भव्य समापन, राजतिलक के साथ नम आंखों से कलाकारों ने मंच को कहा अलविदा
तीन महीने की मेहनत, दस दिन का मंचन और स्थानीय निवासियों की सामूहिक भागीदारी ने रामलीला को बनाया खास
अगले वर्ष और भव्य आयोजन का संकल्प
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक में आयोजित दस दिवसीय श्रीरामलीला का प्रभु श्रीराम के राजतिलक और भव्य श्रीराम दरबार के साथ श्रद्धा, उल्लास और भावुकता के माहौल में समापन हो गया। क्रॉसिंग रिपब्लिक सांस्कृतिक समिति, CROMA और CIPL के तत्वावधान में आयोजित इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी पेशेवर मंडली ने नहीं, बल्कि सोसाइटी के स्थानीय निवासियों ने ही विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रामकथा को मंच पर जीवंत किया।
बच्चों से बुजुर्गों तक, एक मंच पर दिखा पीढ़ियों का संगम
क्रॉसिंग रिपब्लिक की यह रामलीला सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक एकजुटता की अनूठी मिसाल बनकर सामने आई। मंच पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभाई। कई दृश्यों में पूरे परिवार एक साथ अभिनय करते नजर आए। इस सामूहिक प्रयास ने रामलीला को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आपसी जुड़ाव, पारिवारिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी बनाया।
इस भव्य आयोजन की तैयारी के लिए कलाकारों ने लगातार तीन महीने तक कठिन अभ्यास किया। स्थानीय परिवारों के दिन-रात के सहयोग, समर्पण और सामूहिक प्रयासों से दस दिनों तक रामलीला का मंचन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कलाकारों और सहयोगियों का सम्मान, विदाई के समय छलकीं भावनाएं
समापन समारोह के अवसर पर क्रॉसिंग रिपब्लिक सांस्कृतिक समिति की ओर से कलाकारों, सहयोगी परिवारों और आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे लोगों को स्मृति चिह्न और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। समिति ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हालांकि, समापन का क्षण उत्सव के साथ भावुक विदाई का भी गवाह बना। तीन महीने के अभ्यास और दस दिनों के मंचन के दौरान कलाकारों के बीच बना आत्मीय रिश्ता विदाई के समय साफ नजर आया। जिस मंच पर बीते कई दिनों से रामकथा के प्रसंग जीवंत हो रहे थे, उसी मंच से विदा लेते समय कई कलाकारों की आंखें नम हो गईं।
अगले वर्ष और भव्य आयोजन का संकल्प
रामलीला के समापन के साथ कलाकार और सहयोगी परिवार अपनी नियमित दिनचर्या की ओर लौट गए, लेकिन अपने पीछे साझा यादों, भावनात्मक जुड़ाव और सामूहिक उपलब्धि की एक खूबसूरत कहानी छोड़ गए। सभी ने पावन मंच को नमन करते हुए अगले वर्ष रामलीला को और अधिक भव्य एवं दिव्य स्वरूप में प्रस्तुत करने का संकल्प लिया।
