November 5, 2026
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महक जीवन AOA के रजिस्ट्रेशन में गंभीर विसंगतियां, डीआर ने दी रद्द करने की चेतावनी!!

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ऑनलाइन आवेदन में 10 पदाधिकारी, कार्यालय में मिले सिर्फ आठ के दस्तावेज

कार्यकारिणी गठन की बैठक के अभिलेख भी नदारद, 12-डी के तहत पंजीकरण निरस्त करने की चेतावनी

बड़ा सवाल: पंजीकरण के वक्त इन गंभीर विसंगतियों पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी ?

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की महक जीवन अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के पंजीकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एसोसिएशन के ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण के लिए कार्यालय में जमा कराए गए दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला इतना गंभीर है कि संतोषजनक जवाब और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाने पर एसोसिएशन का पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

डीआर कार्यालय के 22 अक्टूबर 2026 के नोटिस ने एसोसिएशन के गठन और पंजीकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऑनलाइन आवेदन में 10 पदाधिकारी/सदस्य दर्शाए गए, लेकिन कार्यालय में केवल आठ के दस्तावेज जमा कराए गए!

इतना ही नहीं, कार्यकारिणी के गठन से संबंधित बैठक के जरूरी अभिलेख भी कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किए गए। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पंजीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में ही इतना अंतर था, तो एसोसिएशन का पंजीकरण किन अभिलेखों के आधार पर किया गया ?

दस नाम ऑनलाइन, आठ का रिकॉर्ड: बाकी दो कहां गए ?

डिप्टी रजिस्ट्रार के नोटिस के मुताबिक, महक जीवन अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के पंजीकरण के लिए 16 सितंबर 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया गया था। इसके बाद संबंधित दस्तावेज 6 दिसंबर 2025 को कार्यालय में जमा कराए गए।

जांच के दौरान सामने आया कि ऑनलाइन आवेदन में कार्यकारिणी के 10 पदाधिकारी/सदस्य दर्शाए गए थे, जबकि कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों में केवल आठ का विवरण उपलब्ध था। शेष दो सदस्यों के संबंध में आवश्यक विवरण कार्यालय में प्रस्तुत अभिलेखों में नहीं मिला।

यह अंतर केवल कागजी खानापूर्ति का सवाल नहीं है। एसोसिएशन की कार्यकारिणी में कौन शामिल है, उसका गठन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और पंजीकरण के लिए प्रस्तुत विवरण कितना प्रमाणिक है, ये सभी सवाल सीधे तौर पर पंजीकरण की वैधता और पारदर्शिता से जुड़े हैं। अब अध्यक्ष और सचिव को इन विसंगतियों पर जवाब देना होगा।

कार्यकारिणी गठन की बैठक हुई, लेकिन रिकॉर्ड कहां है ?

मामले में दूसरी गंभीर विसंगति कार्यकारिणी गठन की बैठक से जुड़े अभिलेखों को लेकर है। नोटिस में कहा गया है कि 16 सितंबर 2025 को कार्यकारिणी गठन के लिए आयोजित बैठक से संबंधित आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किए गए।

इन दस्तावेजों में बैठक का नोटिस, एजेंडा, कार्यवाही विवरण और बैठक में उपस्थित सदस्यों की सूची शामिल है। ये अभिलेख किसी भी संगठन में बैठक की प्रक्रिया और निर्णयों की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे में सवाल है कि कार्यकारिणी का गठन किस प्रक्रिया के तहत किया गया? बैठक में किन सदस्यों ने भाग लिया? पदाधिकारियों का चयन कैसे हुआ? और यदि गठन की प्रक्रिया विधिवत संपन्न हुई थी, तो उससे जुड़े अभिलेख पंजीकरण कार्यालय में क्यों नहीं दिए गए?

इन सवालों का जवाब अब एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को देना होगा।

पंजीकरण पर संकट, धारा 12-डी के तहत कार्रवाई की चेतावनी

डिप्टी रजिस्ट्रार ने मामले में अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि ऑनलाइन आवेदन में दर्शाए गए पदाधिकारियों/सदस्यों और कार्यालय में जमा दस्तावेजों के बीच अंतर को दूर करने के लिए प्रमाणिक अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही, कार्यकारिणी के गठन से संबंधित प्रक्रिया और अभिलेखों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की जाए।

यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की धारा 12-डी के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।

यह चेतावनी महक जीवन AOA के लिए गंभीर है। अब एसोसिएशन के नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों और कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया पर उठे सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना है।

तत्कालीन पंजीकरण प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल उस समय की पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर है। यदि ऑनलाइन आवेदन में 10 पदाधिकारी/सदस्य दर्ज थे, लेकिन कार्यालय में केवल आठ के दस्तावेज जमा हुए, तो इस अंतर का सत्यापन कैसे हुआ ? यदि कार्यकारिणी गठन की बैठक से संबंधित जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं थे, तो पंजीकरण की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी ?

क्या पंजीकरण के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का नियमानुसार परीक्षण किया गया था ? क्या ऑनलाइन आवेदन और कार्यालय में जमा अभिलेखों का मिलान हुआ था ? यदि हुआ था, तो अब सामने आई विसंगतियों की वजह क्या है ?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब केवल एसोसिएशन ही नहीं, बल्कि पंजीकरण की तत्कालीन प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से भी सामने आना चाहिए। यह जांचना जरूरी है कि पंजीकरण के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर और किस आधार पर किया गया था।

नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: निखलेश राजन 

डिप्टी रजिस्ट्रार निखिलेश राजन का कहना है कि-

 नियमों की अनदेखी और उनके साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमानुसार कार्रवाई तय है।

कार्यालय ने अध्यक्ष और सचिव को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि एसोसिएशन निर्धारित अवधि में क्या जवाब देती है और प्रस्तुत अभिलेखों की जांच के बाद विभाग क्या निर्णय लेता है।

निवासियों के हितों से जुड़ा है मामला

अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन किसी भी आवासीय सोसाइटी में निवासियों के सामूहिक हितों के प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। ऐसे संगठन के गठन और पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दस्तावेजों की प्रमाणिकता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

महक जीवन AOA के मामले में सामने आई विसंगतियां अब केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रह गई हैं। सवाल संगठन के गठन की प्रक्रिया, पंजीकरण के आधार और संबंधित अभिलेखों की विश्वसनीयता तक पहुंच गया है।

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