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बिल्डरों के लिए बना मास्टर प्लान, जनता के हिस्से आया जाम!

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नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान का बड़ा आरोप

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में शहरी नियोजन पूरी तरह फेल, पांच मिनट का सफर बना घंटों की परीक्षा

NEWS1UP

संवाददाता

ग्रेटर नोएडा वेस्ट। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की बदहाल यातायात व्यवस्था और अव्यवस्थित शहरी विकास को लेकर नेफोमा (NEFOMA) के अध्यक्ष अन्नू खान ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि मास्टर प्लान तैयार करते समय आम नागरिकों की सुविधाओं और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं की अपेक्षा बिल्डरों एवं व्यावसायिक हितों को अधिक प्राथमिकता दी गई। परिणामस्वरूप आज लाखों लोग रोजाना घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं।

नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान

अन्नू खान का कहना है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई लोग जाम से बचने के लिए अपनी गाड़ियां कार्यालयों या घरों पर ही छोड़ने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर महज पांच मिनट की दूरी तय करने में भी घंटों का समय लग रहा है।

चौड़ी सड़कें भी नहीं दे रहीं राहत, छुट्टी के दिन भी थम जाता है शहर

नेफोमा अध्यक्ष के अनुसार, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चौड़ी-चौड़ी सड़कें होने के बावजूद दोनों ओर घंटों लंबा जाम लगा रहता है। उनका कहना है कि अब स्थिति केवल कार्यालय समय तक सीमित नहीं रही, बल्कि सप्ताहांत और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी यातायात व्यवस्था चरमराई रहती है।

फुटपाथों पर अतिक्रमण, पैदल चलना भी बना चुनौती

अन्नू खान का आरोप है कि क्षेत्र के अनेक फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे पैदल चलने वालों का सुरक्षित आवागमन लगभग असंभव होता जा रहा है। उनका कहना है कि फुटपाथों का उद्देश्य पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है, लेकिन जब उन पर अतिक्रमण हो जाता है तो लोगों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट भी सार्वजनिक मार्गों और फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं अतिक्रमणमुक्त बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। ऐसे में यदि फुटपाथ अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं, तो यह शहरी प्रबंधन और प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

35-35 मंजिला सोसायटियां बस गईं, लेकिन बुनियादी ढांचा नहीं बढ़ा

नेफोमा अध्यक्ष का कहना है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 35-35 मंजिला हाईराइज सोसायटियों में लाखों लोगों को बसा दिया गया, लेकिन उसी अनुपात में सड़कों का विस्तार, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, फुटओवर ब्रिज, सर्विस रोड और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं विकसित नहीं की गईं। उनका आरोप है कि यही कारण है कि पूरा क्षेत्र आज गंभीर यातायात संकट से जूझ रहा है।

चमचमाते मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बढ़े, लेकिन ट्रैफिक प्लानिंग नहीं

अन्नू खान का कहना है कि हाईराइज आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ सड़क किनारे बड़े-बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और मॉल तो विकसित कर दिए गए, लेकिन उनके अनुरूप ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ। उनके अनुसार, यदि समय रहते मास्टर प्लान की समीक्षा कर व्यावहारिक सुधार नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

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