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घर खरीदा, पैसा दिया… फिर भी नहीं मिली रजिस्ट्री: हाईकोर्ट ने 90 दिन की डेडलाइन तय की

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बिल्डर-प्राधिकरण के विवाद में फंसे हजारों फ्लैट खरीदारों को राहत

5 साल बाद वेदांतम और एम्स ग्रीन एवेन्यू की रजिस्ट्री का रास्ता साफ

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट। वर्षों तक अपने ही घर की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों और बिल्डर के चक्कर काटने को मजबूर रहे रेडिकॉन वेदांतम और एम्स ग्रीन एवेन्यू के फ्लैट खरीदारों को आखिरकार न्यायिक राहत मिल गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोनों परियोजनाओं से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 90 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। इस आदेश ने न केवल दोनों सोसाइटी के निवासियों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को नई ऊर्जा दी है, बल्कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की उन अनेक परियोजनाओं के खरीदारों में भी उम्मीद जगा दी है, जिनकी रजिस्ट्री बिल्डर और प्राधिकरण के विवाद के कारण वर्षों से लंबित है।

पांच साल से खरीदार भुगत रहे थे विवाद की कीमत

रेडिकॉन वेदांतम (सेक्टर-16सी) और एम्स ग्रीन एवेन्यू (सेक्टर-4) के हजारों फ्लैट खरीदारों ने वर्षों पहले अपने-अपने फ्लैटों का पूरा भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें आज तक वैधानिक मालिकाना हक नहीं मिल सका। कारण यह रहा कि बिल्डर और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच वित्तीय देनदारियों एवं अन्य विवादों की कीमत खरीदारों को चुकानी पड़ रही थी। परिणामस्वरूप रजिस्ट्री की प्रक्रिया वर्षों तक ठप रही।

प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं मिला, तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

लगातार पत्राचार, बैठकों और प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तब दोनों सोसाइटी के निवासियों ने नेफोमा के नेतृत्व में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण को 90 दिनों के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

प्राधिकरण और बिल्डर के विवाद की सजा खरीदार क्यों भुगतें ?

नेफोमा के मुख्य सलाहकार दीपक दूबे ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फ्लैट खरीदार बिल्डर को पूरा भुगतान कर चुका है, तब बिल्डर के प्राधिकरण पर बकाया का बोझ खरीदार पर क्यों डाला जाए।

उन्होंने कहा-

“यदि बिल्डर पर प्राधिकरण का कोई बकाया है तो उसकी वसूली करना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। खरीदारों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित रखना न तो न्यायसंगत है और न ही संवैधानिक भावना के अनुरूप। दुर्भाग्य यह है कि ऐसे मामलों में लोगों को अपने अधिकार के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।”

अब मालिकाना हक मिलने की उम्मीद मजबूत

एम्स ग्रीन एवेन्यू वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार कौशिक ने कहा कि निवासियों ने लंबे समय तक बिल्डर से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।

उन्होंने कहा-

अंततः न्यायालय ही अंतिम उम्मीद था। अब उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद विश्वास है कि वर्षों से लंबित रजिस्ट्री पूरी होगी और निवासियों को उनके घरों का वैधानिक मालिकाना हक मिलेगा।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हजारों खरीदारों के लिए उम्मीद

नेफोमा के अध्यक्ष अन्नू खान ने कहा कि यह समस्या केवल दो सोसाइटी तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अनेक परियोजनाओं में फ्लैट खरीदार इसी स्थिति से गुजर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि-

न्यायालय का यह आदेश उन सभी खरीदारों के लिए सकारात्मक संकेत है, जिनकी रजिस्ट्री बिल्डर और प्राधिकरण के विवाद के कारण वर्षों से अटकी हुई है। नेफोमा ऐसे सभी मामलों के स्थायी समाधान के लिए प्रयास जारी रखेगी।

आदेश के बाद सोसाइटी में खुशी का माहौल

उच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलते ही दोनों सोसाइटी के निवासियों में उत्साह का माहौल बन गया। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और उम्मीद जताई कि अब वर्षों का इंतजार समाप्त होगा। इस अवसर पर एम्स ग्रीन एवेन्यू वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ए. के. कौशिक, प्रमोद तड़ागी, प्रदीप कपिल, रवि प्रताप, गिरीश सूरी, नवीन शर्मा सहित बड़ी संख्या में निवासी उपस्थित रहे।

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