November 5, 2026
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शिवभक्ति की सबसे बड़ी यात्रा आज से: हरिद्वार से दिल्ली-एनसीआर तक हाई अलर्ट, सुरक्षा के अभेद्य घेरे में कांवड़ मार्ग

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40 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात, ड्रोन-सीसीटीवी से निगरानी

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू

NEWS1UP

धर्म-कर्म डेस्क

गाजियाबाद। सावन मास के प्रथम दिन गुरुवार से देश की सबसे विशाल धार्मिक यात्राओं में शुमार कांवड़ यात्रा विधिवत प्रारंभ हो गई। गंगा तटों से जल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे लाखों शिवभक्तों के स्वागत और सुरक्षा के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। हरिद्वार से लेकर दिल्ली की सीमाओं तक पूरा कांवड़ कॉरिडोर पुलिस, पीएसी, अर्धसैनिक बल, जल पुलिस और एसडीआरएफ की निगरानी में है। संवेदनशील स्थलों पर ड्रोन कैमरों और अत्याधुनिक सीसीटीवी के माध्यम से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

हरिद्वार से दिल्ली तक आस्था का सबसे व्यस्त कॉरिडोर

कांवड़ यात्रा का प्रमुख मार्ग हरिद्वार के हर की पैड़ी और बैरागी कैंप से शुरू होकर नारसन-पुरकाजी सीमा के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा। इसके बाद मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मोदीनगर, मुरादनगर और गाजियाबाद होते हुए श्रद्धालु दिल्ली पहुंचेंगे। सीमापुरी, अप्सरा बॉर्डर, भोपुरा, गाजीपुर, लोनी और चिल्ला बॉर्डर से आगे हरियाणा, राजस्थान और दक्षिणी दिल्ली की ओर लाखों कांवड़ियों की आवाजाही होगी। वहीं मेरठ-हापुड़-बुलंदशहर-आगरा कॉरिडोर पर भी भारी भीड़ की संभावना जताई गई है।

सुरक्षा का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 40 हजार जवान मोर्चे पर

कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए 40 हजार से अधिक पुलिसकर्मी विभिन्न राज्यों में तैनात किए गए हैं। इनमें अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 हजार से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी की 35 से ज्यादा कंपनियां तथा अर्धसैनिक बल की टुकड़ियां सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं। दिल्ली पुलिस ने भी हजारों पुलिसकर्मियों और होमगार्डों की ड्यूटी लगाई है। यात्रा मार्ग को सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में विभाजित कर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बदलेगा ट्रैफिक का नक्शा, कई मार्गों पर प्रतिबंध

कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून हाईवे तथा एनएच-58 के कई हिस्सों पर भारी और मध्यम वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। अनेक स्थानों पर वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है, जबकि कांवड़ पटरी मार्ग पर सामान्य वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

ड्रोन से होगी निगरानी, हर गतिविधि पर रहेगी नजर

संवेदनशील शिविरों, प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरे, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाएगी। हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा घाटों पर जल पुलिस और एसडीआरएफ की विशेष टीमें तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य किया जा सके।

इन गतिविधियों पर रहेगा सख्त प्रतिबंध

यात्रा के दौरान कांवड़ मार्ग पर शराब की दुकानें और नॉनवेज होटल-ढाबे बंद रहेंगे। डाक कांवड़ वाहनों पर तेज ध्वनि वाले डीजे, भड़काऊ गीत और धारदार हथियारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

कांवड़ियों की सुविधा के लिए पैदल मार्ग आरक्षित किए गए हैं। जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल, विश्राम स्थल और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और रोडवेज बसों को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा और आम नागरिकों की आवाजाही दोनों सुचारु बनी रहे।

आस्था का महापर्व, प्रशासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी वाली कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और आपदा नियंत्रण की भी सबसे बड़ी परीक्षा होती है। इस बार प्रशासन ने तकनीक आधारित निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा और व्यापक ट्रैफिक प्रबंधन के सहारे यह संदेश देने का प्रयास किया है कि आस्था का सम्मान भी होगा और सुरक्षा से कोई समझौता भी नहीं किया जाएगा।

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