बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के कब्जे को लेकर हाईकोर्ट ने मौके पर उतारी जाँच टीम!
गुलमोहर ग्रीन्स मामले में दो एडवोकेट कमिश्नर करेंगे पूरे प्रोजेक्ट का निरीक्षण
112 अतिरिक्त यूनिटों से लेकर अधूरे फ्लैटों तक होगी टावर-दर-टावर पड़ताल
GDA को पूरा रिकॉर्ड पेश करने का आदेश
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज/गाजियाबाद। गुलमोहर ग्रीन्स में फ्लैटों पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना कब्जा दिए जाने के आरोप अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब सीधे ग्राउंड जांच का रास्ता चुना है। 19 और 20 सितंबर को दो अधिवक्ता आयुक्त संजय कुमार ओम और प्रखर कुमार श्रीवास्तव पूरे प्रोजेक्ट का मौके पर निरीक्षण करेंगे।

यह जांच इसलिए अहम है क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के सामने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के प्रावधानों का अनुपालन किए बिना निर्माण किया गया और कुछ टावरों में अतिरिक्त मंजिलें बनाई गईं, जबकि वहां लोग रह रहे हैं।
अब टावर-दर-टावर खुलेगा निर्माण का हिसाब
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता आयुक्त को पूरे प्रोजेक्ट का विस्तृत सर्वे करने का निर्देश दिया है। मौके पर यह दर्ज होगा कि कुल कितने टावर हैं, प्रत्येक टावर में कितनी मंजिलें हैं और हर मंजिल पर कितने फ्लैट हैं। इसके साथ तैयार और निर्माणाधीन फ्लैटों की भी पहचान होगी। यानी पहली बार इस विवाद में प्रोजेक्ट की वास्तविक जमीनी स्थिति का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार होगा।
Sale Deed और जमीन पर बने फ्लैट, दोनों का होगा मिलान
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन फ्लैटों से जुड़ा है जो अभी अधूरे अथवा निर्माणाधीन हैं, लेकिन जिनके संबंध में बिल्डर-बायर एग्रीमेंट या सेल डीड हो चुकी है। कोर्ट ने बिल्डर को संबंधित दस्तावेज आयुक्त को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
यानी अब सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि दस्तावेज में क्या लिखा है, बल्कि यह भी दर्ज होगा कि मौके पर फ्लैट की वास्तविक स्थिति क्या है।
112 अतिरिक्त यूनिटों पर भी हाईकोर्ट की नजर

मामले में 18 दिसंबर 2024 के तीसरे कंपाउंडिंग ऑर्डर के जरिए 112 अतिरिक्त यूनिटों के निर्माण का विवाद भी सामने आया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार टावर 16 से 19 में 32 और टावर 27 व 28 में 80 अतिरिक्त यूनिट शामिल हैं तथा इन निर्माणों के लिए अपार्टमेंट मालिकों की आवश्यक सहमति नहीं ली गई।
हाईकोर्ट ने आयुक्त को दूसरे और तीसरे कंपाउंडिंग के तहत स्वीकृत फ्लैटों की टावर और फ्लोर के हिसाब से पहचान करने को कहा है। 18 दिसंबर 2024 का कंपाउंडिंग मैप निरीक्षण में संदर्भ दस्तावेज रहेगा।
टावर 16-19 की ऊपरी दो मंजिलें सबसे अहम

याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से टावर 16, 17, 18 और 19 में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण और वहां निवासियों के रहने का दावा किया है। हाईकोर्ट ने इन चार टावरों की ऊपरी दो मंजिलों की स्थिति विशेष रूप से जांचने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता आयुक्त यह दर्ज करेंगे कि इन मंजिलों का निर्माण पूरा है या अभी अधूरा/निर्माणाधीन।
जांच की फीस 1.50 लाख, खर्च भी दोनों पक्ष उठाएंगे
हाईकोर्ट ने दोनों अधिवक्ता आयुक्तों की फीस तय कर दी है, संजय कुमार ओम को 1 लाख और प्रखर कुमार श्रीवास्तव को 50 हजार रुपये। कुल 1.50 लाख रुपये की फीस का आधा-आधा भुगतान दोनों पक्षों को 18 सितंबर 2026 तक करना होगा। अधिवक्ता आयुक्तों के यात्रा, ठहरने और स्थानीय परिवहन का खर्च भी दोनों पक्ष बराबर-बराबर वहन करेंगे।
जांच की तस्वीर भी सामने आएगी
निरीक्षण के दौरान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी होगी। दोनों दिनों की रिकॉर्डिंग और प्रासंगिक तस्वीरें संयुक्त सर्वे रिपोर्ट का हिस्सा बनाई जाएंगी। अधिवक्ता आयुक्त को अपनी रिपोर्ट 25 सितंबर तक पक्षकारों को उपलब्ध कराने और उसके बाद हाईकोर्ट में पेश करने का निर्देश है। किसी पक्ष को आपत्ति होने पर वह अगली सुनवाई में उसे दाखिल कर सकेगा।
GDA को अब देना होगा पूरा हिसाब
हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और पुलिस कमिश्नर को निरीक्षण में आवश्यक सहयोग और सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, अगली सुनवाई पर GDA को मामले का पूरा रिकॉर्ड हाईकोर्ट के सामने पेश करना होगा।
अब 30 सितंबर पर टिकी निगाहें
अधिवक्ता आयुक्त का निरीक्षण 19 और 20 सितंबर को होगा। रिपोर्ट 25 सितंबर तक सामने आएगी और 30 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि-
क्या कागजों में दर्ज प्रोजेक्ट और जमीन पर खड़ा गुलमोहर ग्रीन्स एक ही तस्वीर दिखाते हैं ?
हाईकोर्ट ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए ग्राउंड जांच का आदेश दिया है।
