रिवर हाइट्स में बिजली लोड के नाम पर 80 हजार वसूली का आरोप, अब FIR ने खोला ‘लोड का गणित’
सोसायटी का स्वीकृत लोड 2,112 किलोवाट, वितरित लोड 7313.86 किलोवाट बताए जाने से उठे गंभीर सवाल
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की रिवर हाइट्स सोसायटी में बिजली लोड बढ़ाने के नाम पर 80 हजार रुपये की कथित वसूली का मामला अब आपराधिक जांच के घेरे में है। सोसायटी निवासी एडवोकेट विष्णु कुमार गुप्ता (मानवाधिकार कार्यकर्ता) की तहरीर पर नंदग्राम थाने में AOA के पूर्व अध्यक्ष गौरव वरमानी, पूर्व कोषाध्यक्ष आलोक शर्मा और एक अज्ञात के खिलाफ BNS की धारा 61(2) और 318(4) के तहत FIR दर्ज हुई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके बिजली लोड को बढ़ाने के लिए 20 हजार रुपये प्रति किलोवाट की दर से चार किलोवाट के लिए 80 हजार रुपये मांगे/वसूले गए। लेकिन विवाद यहीं तक सीमित नहीं है। तहरीर में सोसायटी के स्वीकृत विद्युत लोड, वितरित लोड और विद्युत निगम को किए गए भुगतान पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
2,112 किलोवाट स्वीकृत, 7313.86 का आंकड़ा क्यों ?
पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक सोसायटी का स्वीकृत लोड 2,112 किलोवाट है, जबकि 7313.86 किलोवाट वितरित लोड का आंकड़ा सामने रखा गया है। अब सवाल है कि यह आंकड़ा किस अवधि और किस विद्युत रिकॉर्ड से संबंधित है तथा ‘वितरित लोड’ का तकनीकी अर्थ क्या है।
शिकायतकर्ता विष्णु कुमार गुप्ता के अनुसार, बिजली लोड के लिए प्रति माह 105 रुपये प्रति किलोवाट निर्धारित शुल्क लिया जा रहा था। तहरीर में करीब 7.67 लाख रुपये प्रति माह रुपये वसूले जाने और विद्युत वितरण निगम को करीब 2.21 लाख रुपये जमा किए जाने का दावा किया गया है। इसी अंतर के हिसाब-किताब पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।
पूर्व AOA अध्यक्ष गौरव वरमानी ने कहा कि विष्णु कुमार गुप्ता के यहां 5 किलोवाट स्वीकृत था, जबकि करीब 9 किलोवाट इस्तेमाल हो रहा था। उनके मुताबिक, 5 किलोवाट से अधिक लोड के लिए 20 हजार रुपये प्रति अतिरिक्त किलोवाट AOA खाते में जमा कराने की व्यवस्था पूर्व बोर्ड के समय से चली आ रही थी।
बरमानी ने कहा कि रकम किसी निजी खाते में नहीं, AOA के खाते में जमा हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वीकृत लोड से अधिक बिजली इस्तेमाल और उससे जुड़े चार्जेज का मामला बिल्डर से संबंधित है। उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही।
अब जांचे जाएंगे लोड और पैसों के रिकॉर्ड
अब पुलिस के सामने मुख्य सवाल हैं कि 2,112 किलोवाट का स्वीकृत लोड क्या था, 7313.86 का आंकड़ा किस आधार का है, 105 रुपये प्रति किलोवाट शुल्क में कुल कितनी रकम ली गई और विद्युत निगम को कितना भुगतान हुआ ?
ACP नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद के अनुसार,
सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच की जा रही है।
अब AOA के बैंक खाते, विद्युत निगम के रिकॉर्ड और लोड से जुड़े दस्तावेजों के मिलान से पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

