November 5, 2026
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गौर होम्स AOA चुनाव पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई, मत प्रतिशत और क्लॉज 26 पर उठे सवाल

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30 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार दे चुके हैं कानून के मुताबिक चुनाव कराने के निर्देश

2015 में इसी सोसायटी के मामले में हाई कोर्ट ने ‘वन फ्लैट-वन वोट’ को नकारते हुए मत प्रतिशत के आधार पर मतदान के निर्देश दिए थे

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। गौर होम्स सोसाइटी में चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद अब एक बार फिर न्यायिक चौखट तक पहुंच गया है। मत प्रतिशत के आधार पर मतदान, मॉडल बायलॉज के क्लॉज 26 का अनुपालन और निष्पक्ष तरीके से GBM के माध्यम से चुनाव समिति के गठन की मांग को लेकर सोसायटी निवासी मुकेश पाल सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। मामले में 7 अक्टूबर को प्रतिवादी पक्ष की ओर से एक दिन का समय मांगा गया और अब सुनवाई शुक्रवार को होनी है।

इस पूरे घटनाक्रम की अहम कड़ी यह है कि 30 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार पहले ही निर्देश जारी कर चुके हैं कि गौर होम्स का चुनाव उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट, 2010, मॉडल बायलॉज और पंजीकृत बायलॉज के नियमों एवं प्रावधानों के अनुसार ही कराया जाए।

हाई कोर्ट पहले ही दे चुका है स्पष्ट फैसला

 

गौर होम्स का चुनावी विवाद नया नहीं है। याचिका संख्या 17986/2015, Manish Kansal बनाम State of U.P. में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 मई 2015 को इसी गौर होम्स रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला दिया था।

इस फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मतदान Percentage basis पर होना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि “One flat one vote” की व्यवस्था उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट, 2010, संबंधित नियमों और मॉडल बायलॉज के अनुरूप नहीं है। अदालत ने मतदाता सूची को धारा 12(1)(f), Rule 3, Form-A के Annexure-B और Model Bye-Laws के Clause 8 के अनुरूप तैयार करने के निर्देश भी दिए थे।

यानी गौर होम्स के चुनाव में मत प्रतिशत के आधार पर मतदान का मुद्दा पहली बार नहीं उठा है। इसी सोसायटी के मामले में हाई कोर्ट पहले ही इस व्यवस्था की वैधानिकता पर अपना निर्णय दे चुका है।

फिर क्यों उठ रहा है वही सवाल ?

यही वजह है कि मौजूदा चुनाव को लेकर उठी आपत्तियों को महज सोसायटी का आंतरिक विवाद नहीं माना जा रहा। सवाल यह है कि जब इसी सोसायटी के मामले में हाई कोर्ट पहले ही मतदान की वैधानिक पद्धति स्पष्ट कर चुका है और 30 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार भी एक्ट, मॉडल बायलॉज और पंजीकृत बायलॉज के अनुरूप चुनाव कराने के निर्देश दे चुके हैं, तो मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में उन निर्देशों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है ?

266 निवासियों ने GBM में पारित किए तीन प्रस्ताव

इसी पृष्ठभूमि में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के 266 निवासियों ने 4 अक्टूबर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत आमसभा आयोजित कर तीन प्रस्ताव पारित किए।

पहले प्रस्ताव में तीन सदस्यों की की चुनावी पात्रता का मॉडल बायलॉज के क्लॉज 26 के तहत परीक्षण कराने की मांग की गई। इसके लिए डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा कराई गई 21 जून 2018 और 15 जुलाई 2019 की ऑडिट रिपोर्टों में दर्ज वित्तीय अनियमितताओं का हवाला दिया गया है।

दूसरे प्रस्ताव में 29 सितंबर को कथित रूप से बंद कमरे में गठित चुनाव समिति को अमान्य मानते हुए भंग करने और GBM के माध्यम से नई समिति गठित करने की मांग की गई।

तीसरे प्रस्ताव में चुनाव को मत प्रतिशत के आधार पर कराने की मांग की गई है।

मौजूदा याचिका में भी यही प्रमुख मुद्दे

मुकेश पाल सिंह की मौजूदा याचिका में भी मत प्रतिशत के आधार पर मतदान, क्लॉज 26 का अनुपालन और निष्पक्ष GBM के माध्यम से चुनाव समिति के गठन की मांग की गई है। ऐसे में 2015 के हाई कोर्ट के फैसले और मौजूदा याचिका के मुद्दों के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है।

निवासियों का कहना है कि उनका उद्देश्य चुनाव रोकना नहीं, बल्कि ऐसी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है जिसकी वैधानिकता पर बाद में सवाल न उठे।

अब नजर शुक्रवार की सुनवाई पर

गौर होम्स में चुनावी प्रक्रिया को लेकर अब तीन स्तरों पर घटनाक्रम सामने है, 2015 का हाई कोर्ट का फैसला, 30 सितंबर का डिप्टी रजिस्ट्रार का निर्देश और मौजूदा चुनाव को लेकर हाई कोर्ट में लंबित याचिका।

ऐसे में शुक्रवार की सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल केवल यह नहीं है कि चुनाव कब होगा, बल्कि यह है कि चुनाव जिस प्रक्रिया से होगा, क्या वह उसी कानून और न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप होगा जिसे इसी सोसायटी के मामले में हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है।

क्योंकि चुनाव में जीत किसी की हो सकती है, लेकिन चुनाव की वैधता कानून तय करता है।

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