माफियाराज से कानून के शासन तक: योगी ने गिनाए यूपी में बदलाव
लोहिया विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले मुख्यमंत्री, कानून की असली ताकत जनता का विश्वास, एआई पर भी मानवीय विवेक जरूरी
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भूमेश शर्मा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में माफिया के प्रभाव को कम कर कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने इसे निवेश और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए युवा विधिवेत्ताओं से न्याय, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून की सबसे बड़ी पूंजी उसकी धाराएं नहीं, बल्कि आमजन का विश्वास है।

मुख्यमंत्री शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार से हासिल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए न्याय व्यवस्था को सुलभ और निष्पक्ष बनाना भी जरूरी है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय मिलना शासन की सफलता की महत्वपूर्ण कसौटी है।
कानून-व्यवस्था में बदलाव का किया उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, निवेश और विकास की संभावनाओं को लेकर नकारात्मक धारणाएं थीं। उनके अनुसार, सरकार ने इन परिस्थितियों को बदलने के लिए कानून के शासन और विकास से जुड़ी कार्ययोजनाओं पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029-30 तक प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी दोहराया। हालांकि, इस लक्ष्य की प्राप्ति आर्थिक वृद्धि की निरंतरता, निवेश, रोजगार सृजन और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के वास्तविक परिणामों पर निर्भर करेगी।

पुराने कानूनों में बदलाव को बताया सुधार का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुए कानूनी और आर्थिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1,500 से अधिक अप्रासंगिक कानून समाप्त किए गए तथा जन विश्वास अधिनियम के तहत 42 कानूनों के 183 प्रावधानों में छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। उन्होंने जीएसटी, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता और अन्य नीतिगत बदलावों को भी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि सुधार का अर्थ केवल नए कानून बनाना नहीं, बल्कि ऐसे पुराने प्रावधानों को हटाना भी है जिनकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है।
एआई के इस्तेमाल में मानवीय विवेक जरूरी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक ने कानूनी शोध और आंकड़ों के विश्लेषण को आसान बनाया है, लेकिन डीपफेक, डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता और साइबर अपराध जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने युवा विधिवेत्ताओं से कानून के साथ तकनीकी ज्ञान विकसित करने को कहा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। एआई प्रज्ञा कार्यक्रम के तहत 10 लाख युवाओं को एआई, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देने की योजना का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा,
“एआई को सहायक बनाइए, सारथी नहीं”
सीएम ने कहा कि मशीन सुझाव दे सकती है और मसौदा तैयार कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय मनुष्य के विवेक, नैतिकता और कानूनी जिम्मेदारी के आधार पर ही होना चाहिए।

युवा विधिवेत्ताओं से न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील
मुख्यमंत्री ने विधि स्नातकों से अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने, ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवादों के समाधान में योगदान देने, पेशेवर नैतिकता बनाए रखने और नए कानूनों व न्यायिक निर्णयों का नियमित अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विकास की वास्तविक कसौटी समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव है।
विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि विधि की डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।
संविधान को मार्गदर्शक बनाने की सलाह देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,
“फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है”
समारोह में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
