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सोसाइटी के पूर्व महासचिव पर एफआईआर दर्ज

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योग कर रहे निवासी से अभद्रता और गाली-गलौज का आरोप, वीडियो साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने शुरू की जांच

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय सोसायटी गुलमोहर एन्क्लेव में एक विवाद अब कानूनी दायरे में पहुंच गया है। सोसायटी के पूर्व महासचिव ए.के. जैन के खिलाफ सिहानी गेट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर सोसायटी के एक निवासी के साथ सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

योग के दौरान हुआ विवाद, मोबाइल कैमरे में कैद हुई घटना

शिकायतकर्ता गौरव बंसल के अनुसार, 8 जून की सुबह वह सोसायटी के सेंट्रल पार्क में योग एवं व्यायाम कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद पूर्व महासचिव ने कथित रूप से उन्हें देखते ही अपशब्द कहना शुरू कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि विरोध करने के बावजूद उनका व्यवहार नहीं बदला और सार्वजनिक रूप से लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के साक्ष्य सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उन्होंने अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। आरोप है कि कैमरा चालू होते ही पूर्व महासचिव और अधिक आक्रोशित हो गए तथा कथित रूप से सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे। यही वीडियो अब पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्ष्यों के बाद दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस को दी गई शिकायत के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। प्रारंभिक परीक्षण के बाद 19 जुलाई को सिहानी गेट थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच कर रही है।

निष्पक्ष होगी जांच, साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई: ACP

एसीपी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में उपलब्ध वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुरूप विधिक कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद गुलमोहर एन्क्लेव के निवासियों के बीच सार्वजनिक स्थानों पर शालीन व्यवहार, सामाजिक मर्यादा और सामुदायिक अनुशासन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। निवासियों का मानना है कि आवासीय परिसरों में किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान संवाद और विधिसम्मत प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, ताकि शांतिपूर्ण वातावरण और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

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