November 5, 2026
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अयोध्या दीपोत्सव में आसमान पर सजेगी रामायण, 2,100 ड्रोन रचेंगे इतिहास!

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7 नवंबर को परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम

35 हजार स्वयंसेवक, एक हजार कलाकार और 12 देशों के प्रतिनिधियों की प्रस्तावित सहभागिता

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और प्रभु श्रीराम की वैश्विक पहचान को प्रस्तुत करने वाला एक बड़ा सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस यात्रा के दसवें संस्करण को भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। आगामी 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव में राम की पैड़ी से लेकर संपूर्ण अवधपुरी तक लाखों दीपों से रोशनी फैलाने के साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि आयोजन की धार्मिक गरिमा, सांस्कृतिक परंपरा और भव्यता के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस आयोजन को वैश्विक पहचान मिलने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

तीन चरणों में सजेगा दीपोत्सव, रामायण के प्रसंग बनेंगे मुख्य आकर्षण

दीपोत्सव का आयोजन तीन प्रमुख चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण में साकेत महाविद्यालय से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभु श्रीराम के जीवन आदर्शों को प्रदर्शित किया जाएगा।

दूसरे चरण में रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों का प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप तथा श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत करने की तैयारी है।

तीसरे चरण में सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की प्रस्तुतियां, लेजर शो, 3डी प्रोजेक्शन और रामायण पर आधारित आकाशीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गोंडा पुल के समीप हरित आतिशबाजी तथा अंतरराष्ट्रीय रामलीलाओं का मंचन भी आयोजन का हिस्सा होगा।

File photo

2,100 स्वदेशी ड्रोन से आसमान में दिखेगी रामायण, सरयू आरती में 2,147 प्रतिभागी

इस वर्ष के दीपोत्सव में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में 2,100 स्वदेशी ड्रोनों के माध्यम से रामायण पर आधारित आकाशीय प्रस्तुति शामिल है। इसके अतिरिक्त 2,147 प्रतिभागियों द्वारा सरयू आरती और राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

आयोजन में लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों की सहभागिता प्रस्तावित है। इतने बड़े स्तर पर होने वाले कार्यक्रम के मद्देनजर व्यवस्थाओं का समन्वय और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

डिजिटल माध्यमों के जरिए दीपोत्सव को पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इससे अयोध्या के इस सांस्कृतिक आयोजन को देश और विदेश में व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की योजना है।

13 राज्यों के लगभग एक हजार कलाकार दिखाएंगे भारत की सांस्कृतिक विविधता

दीपोत्सव में देश की विविध लोककलाओं और नृत्य परंपराओं को भी मंच मिलेगा। उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के लगभग एक हजार कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

आयोजन में 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है। इसके अलावा भारत में तैनात विदेशी राजदूतों और विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस सहभागिता के जरिए दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद और भारतीय परंपराओं के प्रदर्शन के मंच के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है।

संतों से समन्वय, स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की भी होगी भागीदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पदाधिकारियों और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया है।

दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और अतिथियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और मार्गदर्शन की व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना आयोजन की सफलता के लिए अहम होगा।

आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम बनेगा दीपोत्सव

दीपोत्सव के दसवें संस्करण के जरिए अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। एक ओर सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, रामलीला और पारंपरिक शोभायात्रा भारतीय आस्था की झलक पेश करेंगे, तो दूसरी ओर ड्रोन शो, लेजर प्रस्तुति और डिजिटल प्रसारण आयोजन को आधुनिक स्वरूप देंगे।

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