November 6, 2026
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मासूम की मौत: देर से स्कूल पहुँचने पर 100 उठक-बैठक की ‘सज़ा’, प्रशासन की जाँच शुरू!

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NEWS1UP

संवाददाता

मुंबई। महाराष्ट्र के पालघर ज़िले के सतीवली क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल में क्लास 6 की छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। बीते शुक्रवार रात मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई, और इसके तुरंत बाद प्रशासन ने घटना को लेकर जाँच शुरू कर दी है।

लड़की की मां का आरोप है कि देर से स्कूल पहुँचने पर उसकी बेटी को बैग सहित 100 उठक-बैठक कराने की सज़ा दी गई, जिसके बाद वह दर्द से तड़पती रही और उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।

घटना कैसे हुई?

8 नवंबर को स्कूल में देर से पहुंचने के कारण कुल पाँच छात्रों को कथित तौर पर 100–100 उठक-बैठक करने का दंड दिया गया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के स्थानीय नेता सचिन मोरे ने दावा किया कि छात्रा पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी, बावजूद इसके उसे कठोर दंड दिया गया।

छात्रा की मां की मानें तो शिक्षक ने न केवल उठक-बैठक करवाईं, बल्कि बेटी को स्कूल बैग पीठ पर डालकर दंड करवाया गया, जिसके बाद बच्ची की गर्दन और पीठ में तेज़ दर्द शुरू हो गया।

मां का दर्दनाक आरोप

बच्ची की मां ने बताया-

“सज़ा के बाद मेरी बच्ची उठ भी नहीं पा रही थी। उसकी हालत हर घंटे खराब होती गई। इतने दर्द में वो लगातार रो रही थी। यह इंसानियत के खिलाफ दिया गया दंड था, जिसने मेरी बेटी की जान ले ली।”

उनका आरोप है कि जब उन्होंने स्कूल जाकर शिक्षक से बात की तो शिक्षक ने दंड को उचित ठहराते हुए कहा कि “माता-पिता फीस देते हैं, इसलिए हम पर आरोप लगाते हैं कि हम बच्चों को अनुशासन नहीं सिखाते। इसलिए सज़ा देना जरूरी है।”

मां ने यह भी कहा-

“अनुशासन का मतलब बच्चों पर अत्याचार करना नहीं होता। मेरे बच्चे को अमानवीय दंड दिया गया, और उसी की वजह से उसकी जान चली गई।”

स्कूल का पक्ष

स्कूल के एक शिक्षक ने कहा कि यह साफ नहीं है कि लड़की ने कितनी उठक-बैठक की और उसकी मौत का सीधा कारण क्या है।

शिक्षक ने कहा-

“यह नहीं कहा जा सकता कि मौत इस सज़ा की वजह से हुई या किसी और वजह से,” 

प्रशासन हरकत में, जाँच शुरू

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गलांजे ने बताया कि पूरी घटना की जांच शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा-

“जांच में ही स्पष्ट होगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था,” 


अब तक इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

मासूम की मौत ने उठाए कई सवाल

घटना ने स्कूलों में बदस्तूर जारी कॉर्पोरल पनिशमेंट (शारीरिक दंड) की प्रथा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि क़ानूनन स्कूलों में किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड प्रतिबंधित है, फिर भी कठोर अनुशासन के नाम पर बच्चे आज भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।

एक मासूम की दर्दनाक मौत ने न केवल पालघर, बल्कि पूरे राज्य में गुस्सा और दुख की लहर पैदा कर दी है। अब सभी की नज़रें चल रही जांच पर टिकी हैं, जो बताएगी कि यह दुखद मौत एक दुर्घटना थी या अमानवीय दंड का क्रूर परिणाम।

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