November 3, 2026
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प्रदूषण पर चिंता, त्योहार पर राहत: सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को दी अस्थायी मंजूरी!

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दो दिन की सीमित छूट, 7 और 8 नवंबर को तय समय में ही जला सकेंगे पटाखे

9 नवंबर से बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, अवैध बिक्री रोकने की जिम्मेदारी प्रशासन की

NEWS1UP

 भूमेश शर्मा

नई दिल्ली। दिवाली पर दिल्ली-NCR में आतिशबाजी को लेकर जारी असमंजस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस साल भी लोगों को सीमित राहत दी है। पिछले साल की तर्ज पर शीर्ष अदालत ने निर्धारित शर्तों के साथ ग्रीन पटाखे जलाने की अस्थायी अनुमति दे दी है। हालांकि, यह छूट केवल दो दिनों और कुछ निर्धारित घंटों के लिए होगी। अदालत ने साफ किया है कि पटाखों से वायु प्रदूषण होता है, लेकिन प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। ऐसे में केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को सख्त नियमों के दायरे में लाना अधिक प्रभावी विकल्प हो सकता है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने आदेश दिया है कि-

7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही आतिशबाजी की जा सकेगी।

इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। वहीं, 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

पांच दिन में निर्माण, प्रमाणित कंपनियों को ही अनुमति

ग्रीन पटाखों के निर्माण को लेकर भी अदालत ने स्पष्ट समयसीमा तय की है। आदेश के मुताबिक, इनका निर्माण केवल 2 से 6 नवंबर तक ही किया जा सकेगा। उत्पादन की अनुमति उन्हीं निर्माताओं को होगी, जिन्हें CSIR-NEERI और PESO से प्रमाणन प्राप्त है।

पटाखों के प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद और बैच से संबंधित QR कोड लगाना अनिवार्य होगा, जिससे उनकी प्रमाणिकता की पहचान की जा सके। अदालत ने बेरियम युक्त पटाखों, लड़ियों और गैर-प्रमाणित पटाखों पर रोक बरकरार रखी है। ऑनलाइन माध्यम से पटाखों की बिक्री भी प्रतिबंधित रहेगी।

प्रतिबंध के बावजूद अवैध बिक्री पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित और गैर-प्रमाणित पटाखों की बिक्री पर प्रभावी निगरानी रखी जाए। अदालत ने प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा करने के साथ-साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या का आंकड़ा जुटाने को भी कहा है। संबंधित अधिकारियों को 14 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी।

दरअसल, पटाखों पर प्रतिबंध और उसके क्रियान्वयन के बीच का अंतर इस पूरे मामले में एक अहम सवाल बनकर सामने आया है। जब प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री जारी रहती है, तो केवल कागजों पर पाबंदी लगाने से प्रदूषण पर कितना नियंत्रण संभव है? अदालत की ताजा व्यवस्था इसी चुनौती के बीच नियंत्रित विकल्प तलाशने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

दिल्ली सरकार और CAQM को पहले ही लग चुकी है फटकार

गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाने पर फटकार लगाई थी।

अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है। प्रतिबंध लागू करने में विफलता और बाजार में अवैध पटाखों की उपलब्धता के बीच नियंत्रित ग्रीन पटाखों का विकल्प अपनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

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